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सरकारी क्रय केंद्र में धान नहीं बेच रहे किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 25 Dec 2014 11:35 PM IST
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राजापुर और पहाड़ी की तरह मऊ के दोनों खरीद केंद्रों
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में भी धान की खरीद नहीं हुई। पीसीएफ के खरीद केंद्रों में बोहनी तक नहीं
हुई। पर मऊ में वजह उलट है।
किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर व्यापारी घर से आकर धान तौला ले जाते हैं, ऐसे में केंद्रों में जाने, मीनमेख का झंझट ही नहीं पालते।
राजापुर और पहाड़ी के क्रय केंद्रों की पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि यहां पर खरीद न होने की वजह गोदाम प्रभारियों के अनुसार, धान की क्वालिटी खरी न उतरना रही है।
कहीं पतले धान की बात कहकर तो कहीं नमी की बात कहकर धान की खरीद नहीं हुई, पर मऊ के खरीद केंद्रों की स्थिति उलट है। यहां पर किसान सरकारी खरीद केंद्र में धान नहीं बेचना चाहते। वजह व्यापारी घर पहुंचकर उनका धान ज्यादा दाम पर खरीद लेते हैं।
किसानों का कहना है कि उन लोगों ने धान की जो बैरायटी लगाई थी, वह बाजार में सरकारी रेट से कहीं ज्यादा दाम पर बिकता है।
सरकारी क्रय केंद्र में कॉमन धान 1360 रुपये और ए ग्रेड का 1400 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि व्यापारी ए ग्रेड का धान घर से ढाई से तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं।
लबेद के किसान रामरतन सिंह ने बताया कि यही वजह है कि हम लोग यहां की बजाय अपना धान या तो व्यापारी को बेच देते हैं या फिर इलाहाबाद की नारीबारी धान मंडी में, जहां धान की उचित कीमत मिलती है।
जोरवारा गांव के धर्मपाल प्रजापति ने बताया कि व्यापारी दरवाजे पर आकर धान खरीदते हैं और कोई मीनमेख भी नहीं निकालते। न तो छन्ने का झंझट, न क्रय केंद्र ले जाने की, जिससे डीजल और समय की बचत होती है।
मऊ तहसील में धान के दो क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें से एक पीसीएफ की विपणन शाखा का तहसील परिसर में है, जिसमें अक्सर ताला लटकता रहता है। दूसरा मऊ से लगभग पंद्रह किमी दूर खंडेहा के मजरे लबेद में है, यह भी पीसीएफ का है।
लबेद के क्रय प्रभारी बाबूराम ने बताया कि अक्तूबर से अभी तक यहां पर कोई खरीद नहीं हुई है। हालत यह है कि बारदानों का बंडल तक जस का तस बंधा रखा है।
किसान आते ही नहीं। उधर, विपणन शाखा के अवधेश शर्मा ने कहा कि किसान आते ही नहीं। पीसीएफ का लक्ष्य छह सौ क्विंटल और विपणन शाखा का तीन हजार कुंतल है।
यह बात सही है कि यहां पर किसानों के धान के अनुसार रेट कम है। किसान पतले दाना वाला 11-21 धान बोए हैं, जो महंगा बिकता है।
-टीसी शुक्ला, पीसीएफ जिला प्रबंधक।
किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर व्यापारी घर से आकर धान तौला ले जाते हैं, ऐसे में केंद्रों में जाने, मीनमेख का झंझट ही नहीं पालते।
राजापुर और पहाड़ी के क्रय केंद्रों की पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि यहां पर खरीद न होने की वजह गोदाम प्रभारियों के अनुसार, धान की क्वालिटी खरी न उतरना रही है।
कहीं पतले धान की बात कहकर तो कहीं नमी की बात कहकर धान की खरीद नहीं हुई, पर मऊ के खरीद केंद्रों की स्थिति उलट है। यहां पर किसान सरकारी खरीद केंद्र में धान नहीं बेचना चाहते। वजह व्यापारी घर पहुंचकर उनका धान ज्यादा दाम पर खरीद लेते हैं।
किसानों का कहना है कि उन लोगों ने धान की जो बैरायटी लगाई थी, वह बाजार में सरकारी रेट से कहीं ज्यादा दाम पर बिकता है।
सरकारी क्रय केंद्र में कॉमन धान 1360 रुपये और ए ग्रेड का 1400 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि व्यापारी ए ग्रेड का धान घर से ढाई से तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं।
लबेद के किसान रामरतन सिंह ने बताया कि यही वजह है कि हम लोग यहां की बजाय अपना धान या तो व्यापारी को बेच देते हैं या फिर इलाहाबाद की नारीबारी धान मंडी में, जहां धान की उचित कीमत मिलती है।
जोरवारा गांव के धर्मपाल प्रजापति ने बताया कि व्यापारी दरवाजे पर आकर धान खरीदते हैं और कोई मीनमेख भी नहीं निकालते। न तो छन्ने का झंझट, न क्रय केंद्र ले जाने की, जिससे डीजल और समय की बचत होती है।
मऊ तहसील में धान के दो क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें से एक पीसीएफ की विपणन शाखा का तहसील परिसर में है, जिसमें अक्सर ताला लटकता रहता है। दूसरा मऊ से लगभग पंद्रह किमी दूर खंडेहा के मजरे लबेद में है, यह भी पीसीएफ का है।
लबेद के क्रय प्रभारी बाबूराम ने बताया कि अक्तूबर से अभी तक यहां पर कोई खरीद नहीं हुई है। हालत यह है कि बारदानों का बंडल तक जस का तस बंधा रखा है।
किसान आते ही नहीं। उधर, विपणन शाखा के अवधेश शर्मा ने कहा कि किसान आते ही नहीं। पीसीएफ का लक्ष्य छह सौ क्विंटल और विपणन शाखा का तीन हजार कुंतल है।
यह बात सही है कि यहां पर किसानों के धान के अनुसार रेट कम है। किसान पतले दाना वाला 11-21 धान बोए हैं, जो महंगा बिकता है।
-टीसी शुक्ला, पीसीएफ जिला प्रबंधक।