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बैंड बाजे के साथ निकली भगवान शालिगग्राम व तुलसी की बारात
चित्रकूट
Updated Wed, 01 Nov 2017 11:43 PM IST
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तुलसी विवाह के दौरान बारात में शामिल महिलाएं।
- फोटो : amarujala
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चित्रकूट/खोही। धर्मनगरी में तुलसी विवाह धूम-धाम से गाजे-बाजे के मनाया गया। मुख्यालय के पुरानी बाजार, शंकर बाजार से लेकर जानकीकुंड के रघुवीर मंदिर की बड़ी गुफा में मनाया गया। देवस्थानी एकादशी को सायं बारात निकालकर नगर भ्रमण किया। बुधवार की सुबह तुलसी माता की विदाई की गई । सभी कार्यक्रम हिंदू रीति-रिवाज वैदिक रीति से कराए गए ।
तुलसी विवाह के महत्व को बताते हुए आचार्य रामकरण ने कहा कि कार्तिक महीने में जो व्यक्ति तुलसी की स्थापना करते हैं, पूजा करते हैं विवाह करते हैं वे एक करोड़ युगों तक भगवान के साथ निवास करते हैं। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु भक्त थी। बडे़ ही भक्ति व प्रेम भाव से भगवान की पूजा व तपस्या करती थी। तब से तुलसी की पूजा सभी करने लगे। तुलसी जी का विवाह शालिगराम जी के साथ कार्तिक मास की देवस्थानी एकादशी के दिन हुआ जिसे तुलसी विवाह के नाम से मनाया जाता है।
तभी से तुलसी एवं ठाकुर जी का विवाह गृहस्थ, संसारी साधूसंत लोग करके अपने को धन्य समझते हैं। रघुवीर मंदिर बडी गुफा जानकीकुंड में भी बडे़ धूमधाम, हाथी, घोडे़, बाजे गाजे के साथ वैदिक रीति-रिवाज से मनाया गया। मुख्यालय में महिलाओं ने गुलाल की होली भी खेली।
तुलसी विवाह के महत्व को बताते हुए आचार्य रामकरण ने कहा कि कार्तिक महीने में जो व्यक्ति तुलसी की स्थापना करते हैं, पूजा करते हैं विवाह करते हैं वे एक करोड़ युगों तक भगवान के साथ निवास करते हैं। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु भक्त थी। बडे़ ही भक्ति व प्रेम भाव से भगवान की पूजा व तपस्या करती थी। तब से तुलसी की पूजा सभी करने लगे। तुलसी जी का विवाह शालिगराम जी के साथ कार्तिक मास की देवस्थानी एकादशी के दिन हुआ जिसे तुलसी विवाह के नाम से मनाया जाता है।
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तभी से तुलसी एवं ठाकुर जी का विवाह गृहस्थ, संसारी साधूसंत लोग करके अपने को धन्य समझते हैं। रघुवीर मंदिर बडी गुफा जानकीकुंड में भी बडे़ धूमधाम, हाथी, घोडे़, बाजे गाजे के साथ वैदिक रीति-रिवाज से मनाया गया। मुख्यालय में महिलाओं ने गुलाल की होली भी खेली।
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