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अधिक उत्पादन को आईपीएम अपनाएं

Mon, 12 Jan 2015 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट।
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट। Updated Mon, 12 Jan 2015 10:39 PM IST
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get good production by ipm

तिलहन उत्पादन कार्यक्रम के तहत सोमवार को सिद्धपुर गांव में तीस किसानों को सरसों और राई में लगने वाले कीट रोगों के नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) को अपनाकर अधिक उत्पादन किया जा सकता है।

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कृषि रक्षा पर्यवेक्षक रमेश कुमार कुशवाहा ने बताया कि प्रशिक्षण में चयनित तीस किसानों को छह ग्रुप में बांटकर इनका नाम भी मित्र कीटों के नाम पर रखा गया था।
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शिवपूजन सिंह स्पाइडर ग्रुप, रामस्वरूप क्राईसोपा ग्रुप,  सूरजभान सिंह लेडी बर्ड बीटल ग्रुप, ओमप्रकाश ड्रैगनफ्लाई ग्रुप, राजाराम एनपीवी ग्रुप और शिवकुमार जैन्थोफिला ग्रुप के लीडर बनाए गए थे।
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सभी किसानों को आईपीएम की विधियां बताई गईं। हरी खाद का प्रयोग, बीज शोधन, जैव उर्वरकों एवं जैविक रसायनों का प्रयोग, लाइन और समय से बुआई, खरपतवारों का नियंत्रण और उन्नतशील बीजों का प्रयोग करके उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

किसानों को यांत्रिक क्रियाओं और जैविक नियंत्रण की भी जानकारी दी गई। मौके पर प्रभारी राजकीय कृषि बीज भंडार खेतपाल सिंह त्यागी, जिला सलाहकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन रामहंस, जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार, प्रगतिशील किसान धर्मराज सिंह आदि मौजूद रहे।

 
पैकेट में बने निशान का रखें ध्यान
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया गया कि दवाओं की बोतलों, बोरियों और पैकेटों में निशान होते हैं। प्रयोग करते समय इनका ध्यान रखने की जरूरत है। सबसे पहले हरे, फिर नीले और इसके बाद पीले रंग की निशान वाली दवाओं का प्रयोग कीटनाशक के रूप में करना चाहिए। कीटों की महामारी की स्थिति में लाल तिकोन की दवाओं का प्रयोग करना चाहिए।

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