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चित्रकूट: पूर्व गृह सचिव जगन्नाथ सिंह ने कहा- यहां पर्यटन से हजारों युवाओं को मिल सकता है रोजगार, धर्मनगरी का बताया महत्व

Sat, 16 Apr 2022 09:57 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Published by: आकाश दुबे Updated Sat, 16 Apr 2022 09:57 PM IST
सार

पूर्व गृह सचिव जगन्नाथ सिंह ने चित्रकूट में नांदी के हनुमानजी का दर्शन किए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यहां मिनी फिल्म सिटी बनाई जा सकती है और अकेले पर्यटन के जरिए हजारों युवाओं को रोजगार प्रदान किया जा सकता है।

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Former Home Secretary Jagannath Singh said in Chitrakoot that there is a lot of tourism potential here
पूर्व गृह सचिव जगन्नाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धर्मनगरी में पर्यटन-उद्योग की असीम संभावनाएं हैं। यहां मिनी फिल्म सिटी बनाई जा सकती है और अकेले पर्यटन के जरिए हजारों युवाओं को रोजगार प्रदान किया जा सकता है। ये बातें चित्रकूट पहुंचे पूर्व गृह सचिव व जनपद के जिलाधिकारी रहे जगन्नाथ सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
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शनिवार को पूर्व गृह सचिव ने चित्रकूट में नांदी के हनुमानजी का दर्शन करने के बाद लखनऊ रवाना हो गए। बुंदेली सेना ने पूर्व गृह सचिव का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। जगन्नाथ सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के तौर पर धर्मनगरी के पर्यटन विकास पर उन्होंने विशेष फोकस रखा। खुद 84 कोस में फैले तीर्थस्थल के सैकड़ों स्थलों का निरीक्षण किया। चित्रकूट विशेष पैकेज बनाया और यूपी-एमपी के तीर्थ क्षेत्र में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय से धन लाकर विकास किया। चित्रकूट में प्रयोग के बाद पूरे प्रदेश में थाना दिवस लागू किया।
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बताया कि मोदी-योगी सरकार ने तीर्थ के विकास का द्वार खोल दिया है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और देवांगना में टेबिल टॉप एअरपोर्ट बनने से यहां सैलानियों की संख्या बड़ा इजाफा होगा। जब सैलानी आएंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अब जरूरत केवल इस बात की है कि सैलानियों को सुदूर क्षेत्रों मानिकपुर, मऊ, बरगढ़, रसिन, भरतकूप जैसे क्षेत्रों में स्थित प्रपात, झरने, ऐतिहासिक स्थलों और सौंदर्य से कैसे आत्मसात कराया जाये। इसके लिए स्थानीय स्तर पर वृहद रोडमैप, संसाधन और सुविधाएं प्रत्येक स्थल में विकसित करनी होगी। हमें चिंता करनी होगी कि यहां के पहाड़ कैसे बचें, मंदाकिनी समेत जिले की अन्य सहायक नदियां कैसे बचाई जाएं। यहां पेइंग गेस्ट योजना से लेकर टैक्सी गाड़ियां और टूरिस्ट गाइड की व्यवस्था करनी होगी। गर्मियों में भी शबरी प्रपात धारा प्रवाह गिरे इसकी योजना बनानी होगी।
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पूर्व गृह सचिव ने बताया कि धर्मनगरी में अकेले वह क्षमता है कि इसे मिनी फिल्म सिटी बनाया जा सके। नोएडा फिल्म सिटी बनने के बाद चित्रकूट और बुंदेलखंड ही वह जगह है जहां फिल्मों की शूटिंग के लिए नदियां, पहाड़, झरने, ऐतिहासिक इमारतें, खेत-खलिहान से लेकर मंदिर आदि सब कुछ मौजूद है। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी नदी को लेकर बुंदेली सेना की मांग एकदम सटीक है। नदी में ग्रास कार्प मछलियां डलवाई जानी चाहिए। कई जिलों में नमामि गंगे के तहत नदियों में मछलियां डलवाने की योजना में भी है। ग्रास कार्प मछलियां नदी की काई, घास व गंदगी को खा जाएगीं। फिर हर साल नदी की सफाई की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा मछलियों के शिकार पर भी कड़ाई से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है। नालों की टैपिंग होनी चाहिए और मध्य प्रदेश क्षेत्र में सती अनुसुइया आश्रम से लेकर रामघाट तक नदी की विधिवत सफाई और खुदाई की जरूरत है। खुदाई और सफाई से तमाम नए जलस्रोत खुलने की संभावना है। इसके अलावा बंद हो चुके जलस्रोत भी क्रियाशील होंगे।

उन्होंने बताया कि तीर्थ क्षेत्र में अगले साल रामनवमी पर 101 जगहों पर लोग झांकी सजाकर प्रभु का जन्मोत्सव मनाएं, इसकी वह लगातार एक वर्ष तक कोशिश करेंगे। बताया कि लखनऊ को अवध कहा जाता है और चित्रकूट तो प्रभु की कर्मभूमि और तपस्थली रही, ऐसे में यहां घर-घर रामजन्मोत्सव की धूम मचनी चाहिए। लोग कृष्ण जन्माष्टमी तो घर-घर मनाते हैं लेकिन रामनवमी नहीं। रामनवमी भी चित्रकूट के प्रत्येक हिंदू घरों में पूरे उत्साह और उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। जब ऐसा माहौल बनेगा तो अपने आप देशभर से लोग रामनवमी में चित्रकूट पहुंचेंगे। 
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