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चित्रकूटः किसानों को धान बेचने के लिए जूझना पड़ रहा
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मुख्यालय के गल्ला मंडी परिसर के धान खरीद केंद्र के बाहर अपनी बारी आने के इंतजार में ट्रैक्टर में ?
- फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों में धान बेचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक किसान को धान बेचने में करीब चार से पांच दिन का समय लग रहा है। वहीं, केंद्रों में अलाव की व्यवस्था न होने से उन्हें ठंड से भी जूझना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि कभी बोरी कम होने तो कभी गोदामों मेें जगह न होने व नंबर न आने का बहाना बताकर धान नहीं लिया जाता है।
जिले में 14 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से दो शहर के गल्लामंडी और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में खुले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के केंद्रों में समय से धान की खरीद न होने से अधिकतर किसान जिला मुख्यालय स्थित गल्लामंडी के धान केंद्रों में आते हैं। यहां भी बोरियों की कमी व जगह न होने से समय से धान की खरीद नहीं हो पाती है। इससे धान लदे दर्जनों ट्रैक्टर क्रय केंद्रों के बाहर खड़े रहते है।
लौढ़िया खुर्द के महेंद्र सिंह, सपहा शक्ति सिंह, अर्जुन चांदी धुमाई, प्रदीप सिंह बरवारा व अरुण कर्वी माफी आदि किसानों ने बताया कि वे कर्वी मंडी के विपणन केंद्र में चार दिन से आए हैं। यहां धान नहीं लिया जा रहा है। कहा जाता है कि नंबर आने पर धान लिया जाएगा। आरोप लगाया कि जिस किसान की पहुंच होती है, उसका धान खरीदा जाता है।
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इस संबंध में शहर के गल्ला मंडी स्थित पीसीएफ के प्र्रभारी बाबूलाल ने बताया कि अब तक 68 किसानों से तीन हजार 140 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। विपणन केंद्र के प्रभारी इसरार खान ने बताया कि कुछ किसान नंबर आने से पहले ही ट्रैक्टर लाकर खड़ा कर देते हैं। इससे समस्या आती है।
आढ़तियों को बेचना पड़ रहा धान
चित्रकूट। गल्लामंडी में आढ़तियों को धान बेच रहे किसान कामता प्रसाद व सियाशरण ने बताया कि सरकारी केंद्रों में मात्र डंकल धान ही लिया जाता है। अन्य धान को आढ़तियों को बेचना पड़ता है। जिसमें से सवरी सुगंध धान दो हजार सात सौ रुपये प्रति क्विंटल और उषा धान दो हजार आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मंडी में लिया जाता है।
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जिले में 14 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से दो शहर के गल्लामंडी और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में खुले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के केंद्रों में समय से धान की खरीद न होने से अधिकतर किसान जिला मुख्यालय स्थित गल्लामंडी के धान केंद्रों में आते हैं। यहां भी बोरियों की कमी व जगह न होने से समय से धान की खरीद नहीं हो पाती है। इससे धान लदे दर्जनों ट्रैक्टर क्रय केंद्रों के बाहर खड़े रहते है।
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लौढ़िया खुर्द के महेंद्र सिंह, सपहा शक्ति सिंह, अर्जुन चांदी धुमाई, प्रदीप सिंह बरवारा व अरुण कर्वी माफी आदि किसानों ने बताया कि वे कर्वी मंडी के विपणन केंद्र में चार दिन से आए हैं। यहां धान नहीं लिया जा रहा है। कहा जाता है कि नंबर आने पर धान लिया जाएगा। आरोप लगाया कि जिस किसान की पहुंच होती है, उसका धान खरीदा जाता है।
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इस संबंध में शहर के गल्ला मंडी स्थित पीसीएफ के प्र्रभारी बाबूलाल ने बताया कि अब तक 68 किसानों से तीन हजार 140 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। विपणन केंद्र के प्रभारी इसरार खान ने बताया कि कुछ किसान नंबर आने से पहले ही ट्रैक्टर लाकर खड़ा कर देते हैं। इससे समस्या आती है।
आढ़तियों को बेचना पड़ रहा धान
चित्रकूट। गल्लामंडी में आढ़तियों को धान बेच रहे किसान कामता प्रसाद व सियाशरण ने बताया कि सरकारी केंद्रों में मात्र डंकल धान ही लिया जाता है। अन्य धान को आढ़तियों को बेचना पड़ता है। जिसमें से सवरी सुगंध धान दो हजार सात सौ रुपये प्रति क्विंटल और उषा धान दो हजार आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मंडी में लिया जाता है।