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अमर उजाला में खबर छपने के बाद शिकायतकर्ता को हुई जानकारी

Thu, 29 Sep 2022 01:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 01:06 AM IST
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Family satisfied with the dismissal of the officer who took bribe
चित्रकूट। नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सेक्सन अफसर कुसुम मिश्रा की बर्खास्तगी की जानकारी चित्रकूट के रिटायर्ड बैंक मैनेजर महेंद्र प्रताप को बुधवार को अमर उजाला पढ़ने से ही हुई। फैसले से वह खुश व संतुष्ट नजर आए। कहाकि अब उनका रुपया भी दिलाने की प्रक्रिया होनी चाहिए।
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मूल रूप से रैपुरा के औगनी का पुरवा निवासी महेंद्र प्रताप सिंह बैंक आफ बड़ौदा में वरिष्ठ मैनेजर रहे। बताया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए वह साल 2000 में कर्वी के पहाड़ी रोड पर निजी मकान बनवा कर रहने लगे। उनके दो बेटे हैं जिसमें छोटा बेटा रविंद्र स्टेट बैंक आफ इंडिया में कार्यरत है। बडे़ बेटे अरविंद को नौकरी न मिलने की चिंता थी। बताया कि 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरी का विज्ञापन छपा।
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जिसमें उनके बेटे ने आवेदन किया। इस दौरान सेतु निगम में कार्यरत एक कर्मचारी से उनका संपर्क हुआ, उसने हाईकोर्ट की सेक्सन अफसर कुसुम मिश्रा ने मिलवाया। 10 लाख रुपये में नौकरी दिलाने की बात हुई। नौकरी तो नहीं मिली और रुपये भी देने से इनकार कर दिया। वह तो पढ़े लिखे हैं फिर ऐसे कैसे इस रैकेट में फंस गए।
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बुधवार को वह चित्रकूट स्थित घर में थे और अखबार पढ़ने से उन्हें फैसले की जानकारी हुई। कहा कि यह रैकेट है जिसमें बेरोजगारों को फंसाया जाता है। कई लोगों की संलिप्तता है इसकी जानकारी अब धीरे धीरे हो रही है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
अफसरों ने भी नहीं किया सहयोग
महेंद्र प्रताप ने बताया कि 2020 से लेकर 2022 तक स्थानीय पुलिस अफसरों के पास कई बार गए लेकिन हर बार हाईकोर्ट का मामला बताकर टरका दिया जाता था। किसी तरह की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इस दौरान उन्होंने एक रिश्तेदार की सलाह पर सुप्रीम कोर्ट, मानवाधिकार आयोग व हाईकोर्ट में शिकायती पत्र भेजा। इस पर 2021 में हाईकोर्ट से एक पत्र आया इसमें सारी जानकारी व साक्ष्य का हलफनामा भेजने के लिए कहा गया। कई बार हाईकोर्ट में जांच व पूछताछ के लिए गए। आरोपी अफसर को सामने बैठाकर जज की कमेटी ने सवाल जवाब किया। इस दौरान कई बार उन्हें संबधित अफसर की ओर से धमकी व दबाव बनाने का प्रयास हुआ।

ऑनलाइन खाते में पैसे भेजना बना साक्ष्य
उन्होंने बताया कि इस शिकायत के बाद उनका लगातार मानसिक संघर्ष चलता रहा। उनके पास पर्याप्त सबूत होने से बल रहा। बताया कि रुपये चार लाख नगद और छह लाख रुपये ऑनलाइन दिए थे। 2019 में लोकसभा चुनाव होने के कारण जब उनके रुपये की मांग हुई तो इतना कैश लेकर आने जाने में चेकिंग में फंसने की संभावना थी। तब सेक्सन अफसर ने आनलाइन रुपये ट्रांसफर के लिए कहा था। शिकायत के बाद अदालत की जांच शुरू हुई तो अफसर ने लिखित पत्र में कहा कि उनके बीच रुपये का लेनदेन है जल्द ही इसे लौटाया जाएगा। एक बार छह हजार रुपये ऑनलाइन उनके खाते में भेजे भी गए। यही सब सबूत उन्होंने जांच कमेटी को सौंपे। (संवाद )
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