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स्कूल खुले, बच्चों के चेहरे खिले
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चित्रकूट। इस साल कोरोना काल के बाद से बंद नर्सरी से कक्षा आठ तक के भी स्कूल सोमवार को खुल गए। जिससे स्कूल पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं में खुशी देखी गई।
इस साल कोरोना काल में दिसंबर माह में स्कूल बंद कर दिए गए थे। जिसमें कोराना के मरीज कम होने पर सोमवार से कक्षा नर्सरी से लेकर आठ तक के भी स्कूल खोल दिए गए। स्कूल खुलने पर छात्र-छात्राएं समय से पहुंच गए और उनके चेहरों में खुशी देखी गई। कक्षा तीन के छात्र हिमांशु दुबे, मोहित तिवारी, छात्रा अनुपमा गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में अवकाश होने पर ऑनलाइन पढ़ाई की पर अब स्कूल खुलने से बहुत खुशी हुई है। बीएसए राजीव रंजन मिश्र ने बताया कि सभी परिषदीय स्कूल खुले रहे। जिसमें पहले दिन लगभाग 50 प्रतिशत छात्र-छात्राएं पहुंचे। जिनको कोरोना के नियमों का पालन कराया गया।
स्कूल खुलते ही फीस को लेकर भी अभिभावक चिंतित नजर आए। कहा कि स्कूल बंद होने के बाद जब स्कूल खुलते है तो एक मुश्त तीन से चार महीने की फीस जमा करनी पड़ती है। जबकि ऑनलाइन पढ़ाई में मात्र खानापूर्ति ही की जाती है। अधूरा कोर्स भी रहता है जिसको पूरा कराना पड़ता है।
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इस साल कोरोना काल में दिसंबर माह में स्कूल बंद कर दिए गए थे। जिसमें कोराना के मरीज कम होने पर सोमवार से कक्षा नर्सरी से लेकर आठ तक के भी स्कूल खोल दिए गए। स्कूल खुलने पर छात्र-छात्राएं समय से पहुंच गए और उनके चेहरों में खुशी देखी गई। कक्षा तीन के छात्र हिमांशु दुबे, मोहित तिवारी, छात्रा अनुपमा गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में अवकाश होने पर ऑनलाइन पढ़ाई की पर अब स्कूल खुलने से बहुत खुशी हुई है। बीएसए राजीव रंजन मिश्र ने बताया कि सभी परिषदीय स्कूल खुले रहे। जिसमें पहले दिन लगभाग 50 प्रतिशत छात्र-छात्राएं पहुंचे। जिनको कोरोना के नियमों का पालन कराया गया।
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स्कूल खुलते ही फीस को लेकर भी अभिभावक चिंतित नजर आए। कहा कि स्कूल बंद होने के बाद जब स्कूल खुलते है तो एक मुश्त तीन से चार महीने की फीस जमा करनी पड़ती है। जबकि ऑनलाइन पढ़ाई में मात्र खानापूर्ति ही की जाती है। अधूरा कोर्स भी रहता है जिसको पूरा कराना पड़ता है।
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