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Chitrakoot News: गांव में सड़क नहीं, खाट पर लेटाकर ले जाने पड़ते मरीज
Wed, 07 Oct 2026 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 07 Oct 2026 12:11 AM IST
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फोटो न- 06 सीकेटीपी 25 कलक्ट्रेट परिसर में पोस्टर के साथ प्रदर्शन करते बच्चे व ग्रामीण। संवाद
चित्रकूट। आजादी के 78 साल बाद भी कर्वी का एक गांव ऐसा है जहां सड़क ही नहीं है। बीमार को कंधे पर नहीं, खाट पर लादकर भागना पड़ता है और बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल आते-जाते हैं। हम बात कर रहे हैं सदर ब्लॉक के कोरियनपुरवा की।
मंगलवार को इसी दर्द को लेकर 35 परिवारों के ग्रामीण और स्कूली बच्चे कलक्ट्रेट पहुंचे। उनके हाथों में तख्ती और जुबान पर एक ही मांग थी कि साहब, पक्की सड़क दे दो। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने ग्रामीणों के साथ आए सुदेश कुमार ने बताया कि गांव तक जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। खेतों के बीच बनी कच्ची पगडंडी से ही आना-जाना होता है। इस बार हुई झमाझम बारिश ने हालत और बिगाड़ दी है। हर तरफ जलभराव और घुटनों तक कीचड़ है।
बताया कि सबसे बड़ी मुसीबत किसी व्यक्ति के बीमार होने पर होती है। सड़क न होने से एंबुलेंस गांव के अंदर नहीं आ पाती। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को ग्रामीण खाट पर लादकर कीचड़ भरे रास्ते से करीब एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक लेकर आते हैं। कई बार रास्ते में ही मरीज की हालत बिगड़ जाती है। प्रदर्शन के दौरान संदीय सिंह, उमेश कुमार, संतोष, दादूराम, रामकरन, मालभन, विपुल पांडेय समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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गिरते-पड़ते स्कूल जाते हैं बच्चे
इसी कच्चे रास्ते से परिषदीय स्कूल के बच्चे भी पढ़ने जाते हैं। बारिश में फिसलकर गिरना आम बात है। ज्यादा पानी भरने पर बच्चे स्कूल ही नहीं जा पाते, जिससे पढ़ाई का नुकसान होता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो आंदोलन तेज करेंगे।
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मंगलवार को इसी दर्द को लेकर 35 परिवारों के ग्रामीण और स्कूली बच्चे कलक्ट्रेट पहुंचे। उनके हाथों में तख्ती और जुबान पर एक ही मांग थी कि साहब, पक्की सड़क दे दो। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने ग्रामीणों के साथ आए सुदेश कुमार ने बताया कि गांव तक जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। खेतों के बीच बनी कच्ची पगडंडी से ही आना-जाना होता है। इस बार हुई झमाझम बारिश ने हालत और बिगाड़ दी है। हर तरफ जलभराव और घुटनों तक कीचड़ है।
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बताया कि सबसे बड़ी मुसीबत किसी व्यक्ति के बीमार होने पर होती है। सड़क न होने से एंबुलेंस गांव के अंदर नहीं आ पाती। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को ग्रामीण खाट पर लादकर कीचड़ भरे रास्ते से करीब एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक लेकर आते हैं। कई बार रास्ते में ही मरीज की हालत बिगड़ जाती है। प्रदर्शन के दौरान संदीय सिंह, उमेश कुमार, संतोष, दादूराम, रामकरन, मालभन, विपुल पांडेय समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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गिरते-पड़ते स्कूल जाते हैं बच्चे
इसी कच्चे रास्ते से परिषदीय स्कूल के बच्चे भी पढ़ने जाते हैं। बारिश में फिसलकर गिरना आम बात है। ज्यादा पानी भरने पर बच्चे स्कूल ही नहीं जा पाते, जिससे पढ़ाई का नुकसान होता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो आंदोलन तेज करेंगे।