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देश के सर्वोच्च इंजीनियरों के साथ काम करना है सपना: हिमांशु
Sat, 15 Jun 2019 12:41 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
chitrakoot
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Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 15 Jun 2019 12:41 AM IST
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हिमांशु
- फोटो : amarujala
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चित्रकूट। पाठा के मानिकपुर तहसील क्षेत्र के देहरूच माफी गांव निवासी हिमांशु गौरव सिंह ने ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) एडवांस 2019 में आल इंडिया सेकेंड रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उसकी इस सफलता पर हिमांशु के परिजन व गांव के लोग खुश हैं। पिता एलके सिंह महात्मा ज्योतिबा फूले राजकीय पॉलिटेक्निक टेंवा कौशांबी के इलेक्ट्रिानिक्स इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष हैं।
उनके दो पुत्र हिमांशु गौरव सिंह व अंशुमन सिंह हैं। दोनों शुरू से ही बाहर के जिलों में पढ़ाई कर निरंतर सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। हिमांशु का कहना है कि वह देश के सर्वोच्च इंजीनियरों के साथ काम करना चाहता है।
जिले के देहरूच माफी निवासी हिमांशु गौरव सिंह के पिता एलके सिंह का कुछ साल पहले ही गोरखपुर से कौशांबी ट्रांसफर हुआ है। हिमांशु की मां रूपा सिंह ने बच्चों की पढ़ाई के लिए केंद्रीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी ज्वाइन नहीं की थी। हिमांशु की इस सफलता के बाद मां का कहना कि अब लगता है कि उनका सपना पूरा हो रहा है। शुरू से हिमांशु गोरखपुर में माता-पिता के साथ रहा। इस सफलता के प्रति उसे पूर्ण आभास था लेकिन अभी मंजिल नहीं मिली है। छोटे भाई को डाक्टर बनाना है और खुद देश के टॉपर इंजीनियरों की श्रेणी में शामिल होना चाहता है। इन दिनों वह मां व भाई के साथ दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहा है। हिमांशु जेईई मेंस और आईआईटी दिल्ली जोन के टॉपर भी हैं। वह कई ओलंपियाड जीत चुके हैं। उन्होंने इसी साल गोरखपुर के एकेडमिक हाइट्स स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। वह केमिस्ट्री और एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड के टॉपर हैं। फिजिक्स ओलंपियाड में आठवां स्थान मिला था। रीजनल मैथ ओलंपियाड भी टॉप कर चुके हैं। दसवीं में हिमांशु ने 10 सीजीपीए हासिल किया था। हिमांशु बताते हैं कि वह आईआईटी बांबे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करेंगे। उन्होंने बताया कि उसे किताबें पढ़ने का खासकर पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम की किताबें बेहद प्रभावित करती हैं। नावेल पढ़ना पसंद है। चित्रकूट के पैतृक गांव के बारे में बताया कि ज्यादा बार तो नहीं आया लेकिन बाबा शिवभजन व दादी चुनकी देवी का प्यार कभी नहीं भूलता। गांव की मिट्टी में खेलना व घूमना अच्छा लगता है लेकिन अब इसका समय नहीं मिलता है।
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उनके दो पुत्र हिमांशु गौरव सिंह व अंशुमन सिंह हैं। दोनों शुरू से ही बाहर के जिलों में पढ़ाई कर निरंतर सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। हिमांशु का कहना है कि वह देश के सर्वोच्च इंजीनियरों के साथ काम करना चाहता है।
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जिले के देहरूच माफी निवासी हिमांशु गौरव सिंह के पिता एलके सिंह का कुछ साल पहले ही गोरखपुर से कौशांबी ट्रांसफर हुआ है। हिमांशु की मां रूपा सिंह ने बच्चों की पढ़ाई के लिए केंद्रीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी ज्वाइन नहीं की थी। हिमांशु की इस सफलता के बाद मां का कहना कि अब लगता है कि उनका सपना पूरा हो रहा है। शुरू से हिमांशु गोरखपुर में माता-पिता के साथ रहा। इस सफलता के प्रति उसे पूर्ण आभास था लेकिन अभी मंजिल नहीं मिली है। छोटे भाई को डाक्टर बनाना है और खुद देश के टॉपर इंजीनियरों की श्रेणी में शामिल होना चाहता है। इन दिनों वह मां व भाई के साथ दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहा है। हिमांशु जेईई मेंस और आईआईटी दिल्ली जोन के टॉपर भी हैं। वह कई ओलंपियाड जीत चुके हैं। उन्होंने इसी साल गोरखपुर के एकेडमिक हाइट्स स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। वह केमिस्ट्री और एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड के टॉपर हैं। फिजिक्स ओलंपियाड में आठवां स्थान मिला था। रीजनल मैथ ओलंपियाड भी टॉप कर चुके हैं। दसवीं में हिमांशु ने 10 सीजीपीए हासिल किया था। हिमांशु बताते हैं कि वह आईआईटी बांबे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करेंगे। उन्होंने बताया कि उसे किताबें पढ़ने का खासकर पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम की किताबें बेहद प्रभावित करती हैं। नावेल पढ़ना पसंद है। चित्रकूट के पैतृक गांव के बारे में बताया कि ज्यादा बार तो नहीं आया लेकिन बाबा शिवभजन व दादी चुनकी देवी का प्यार कभी नहीं भूलता। गांव की मिट्टी में खेलना व घूमना अच्छा लगता है लेकिन अब इसका समय नहीं मिलता है।
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