{"_id":"6ab171950448f7e55608be31","slug":"diwali-preparations-begin-ghats-to-be-illuminated-with-7-million-earthen-lamps-chitrakoot-news-c-215-1-ckt1001-136624-2026-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: दिवाली की तैयारी शुरू, 70 लाख दीयों से रोशन होंगे घाट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: दिवाली की तैयारी शुरू, 70 लाख दीयों से रोशन होंगे घाट
विज्ञापन
फोटो 21 सीकेटीपी 24 चाक पर दीपक बनाता कुम्हार। संवाद
फोटो 21 सीकेटीपी 26 आग में पके दीपक को निकालती महिला। संवाद
-दो माह पहले ही चाक पर सजी दीपावली, मिट्टी के दिए बनाने पर जुटे कुम्हार
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। दिवाली अभी दो माह दूर है, पर धर्मनगरी में इसकी चमक अभी से दिखने लगी है। रामघाट के कुम्हारन मोहल्ला, खटकाना और द्वारिकापुरी में कुम्हारों ने दीये बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस बार मंदाकिनी के घाट 70 लाख दीयों से जगमग होंगे।
दिवाली अमावस्या पर धर्मनगरी में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटते हैं। हर श्रद्धालु अपने हाथ में एक दिया लेकर आता है। रामघाट, कामदगिरि, सती अनुसूइया और गुप्त गोदावरी तक दीयों की लंबी कतार लगती है। इसके बाद देव दिवाली पर प्रशासन द्वारा लाखों दीये जलाए जाते हैं। घरों में जलने वाले दीये इसके अतिरिक्त होते हैं।
कुम्हारन मोहल्ला के लवलेश प्रजापति कहते हैं कि उनके लिए यही असली दिवाली है। उन्हें दो महीने दिन-रात एक करना होता है। वहीं, खटकाना के सुनील की चाक बारिश में भी नहीं रुक रही है। बारिश ने मिट्टी सुखाना मुश्किल कर दिया है, पर ऑर्डर पहले से आने लगे हैं। अभिलाष प्रजापति बताते हैं कि ट्रॉली मिट्टी का दाम 2000 से 3000 रुपये पार हो गया है। फिर भी मिट्टी के दीये की मांग आज भी कायम है, क्योंकि एलईडी लाइट घाट की आत्मा नहीं जला सकती। सुनीता और रेखा जैसी महिलाएं इस उद्योग की रीढ़ हैं। एक परिवार 10 हजार दीये बनाकर 25 से 30 हजार रुपये कमा लेता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो 21 सीकेटीपी 26 आग में पके दीपक को निकालती महिला। संवाद
-दो माह पहले ही चाक पर सजी दीपावली, मिट्टी के दिए बनाने पर जुटे कुम्हार
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। दिवाली अभी दो माह दूर है, पर धर्मनगरी में इसकी चमक अभी से दिखने लगी है। रामघाट के कुम्हारन मोहल्ला, खटकाना और द्वारिकापुरी में कुम्हारों ने दीये बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस बार मंदाकिनी के घाट 70 लाख दीयों से जगमग होंगे।
दिवाली अमावस्या पर धर्मनगरी में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु जुटते हैं। हर श्रद्धालु अपने हाथ में एक दिया लेकर आता है। रामघाट, कामदगिरि, सती अनुसूइया और गुप्त गोदावरी तक दीयों की लंबी कतार लगती है। इसके बाद देव दिवाली पर प्रशासन द्वारा लाखों दीये जलाए जाते हैं। घरों में जलने वाले दीये इसके अतिरिक्त होते हैं।
विज्ञापन
कुम्हारन मोहल्ला के लवलेश प्रजापति कहते हैं कि उनके लिए यही असली दिवाली है। उन्हें दो महीने दिन-रात एक करना होता है। वहीं, खटकाना के सुनील की चाक बारिश में भी नहीं रुक रही है। बारिश ने मिट्टी सुखाना मुश्किल कर दिया है, पर ऑर्डर पहले से आने लगे हैं। अभिलाष प्रजापति बताते हैं कि ट्रॉली मिट्टी का दाम 2000 से 3000 रुपये पार हो गया है। फिर भी मिट्टी के दीये की मांग आज भी कायम है, क्योंकि एलईडी लाइट घाट की आत्मा नहीं जला सकती। सुनीता और रेखा जैसी महिलाएं इस उद्योग की रीढ़ हैं। एक परिवार 10 हजार दीये बनाकर 25 से 30 हजार रुपये कमा लेता है।
विज्ञापन