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लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाकर किया दान
अमर उजाला चित्रकूट
Updated Sat, 14 Jan 2017 10:46 PM IST
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रामघाट में मंदाकिनी नदी में डुबकी लगाने को जुटे श्रद्धालु।
- फोटो : amarujala
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जिले में मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत तरीके और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लाखों श्रद्धालुओं ने प्रात:काल से नदियों व तलाबों, में स्नान करने के बाद दान दिया। सर्वाधिक भीड़ रामघाट किनारे मंदाकिनी नदी में थी। सभी मठ मंदिरों में जाकर श्रद्धालुओं ने खिचड़ी दान दी। नदी किनारे ही खिलौने व गन्ने की दुकानें लगी रही। जहां लेागों ने खरीददारी भी की।
शनिवार को धर्मनगरी के रामघाट स्थित मंदाकिनी नदी किनारे लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। नदी में डुबकी लगाने के बाद परंपरागत तरीके से खिचड़ी दान कर कामदगिरी परिक्रमा लगाई। शहर के भी नदी तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सुबह से स्नान किया। पुरानी बाजार व शंकर बाजार स्थित नदी किनारे मेला लगा रहा। बच्चों ने खिलौने व गुब्बारा खरीदा।
वहीं जिले के राजापुर, मऊ, बरगढ़ क्षेत्र में यमुना नदी में ग्रामीणों ने स्नान कर दान किया। भौरी, शिवरामपुर,सरैंया, मानिकपुर, ऐचवारा आदि क्षेत्र के ग्रामीण आस पास की नदियों व तलाबों में स्नान किया। कई क्षेत्रों में मेला का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति पर कस्बे के ऐतिहासिक मंदिर के पास पांच दिवसीय मेला शुरू हुआ। पहले दिन खिचड़ी दान के बाद कूप का पवित्र जल लेने को होड़ मची रही।
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भीड़ अधिक होने पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस कर्मियों ने कुएं से बाल्टी से जल निकालकर श्रद्धालुओं को बांटा। मेले में आस-पास के सैकड़ों गांव के ग्रामीण शामिल रहे। महिलाओं के साथ बच्चों की संख्या सर्वाधिक रही।
मान्यता के अनुसार भरतकूप कस्बे में स्थित मंदिर के सामने बने कुएं में भरत ने कई तीर्थ स्थलों से लाए जल को डाला था। जब भगवान राम वनवास काल के दौरान चित्रकूट रहे तो उन्हें वापस अयोध्या ले जाने के लिए भरत कई तीर्थों का जल लेकर श्रीराम के चरण धोने को आए थे। वही जल इस कूएं में डालने का उल्लेख रामचरित मानस में किया गया है।
इसी स्थान में सालों से मकर संक्रांति पर पांच दिवसीस मेला लगाया जाता है। मेले में सुबह से आस -पास के सैकड़ों गांव के ग्रामीण पहुंच गये। तीर्थ स्थल पर बने कूप में स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा पाठ किया। इसके बाद लगे मेला का लुप्त उठाया। जिसमें महिलाओं ने श्रंगार के साथ गृहस्थी का समान खरीदा। आकर्षण का केंद्र झूले रहे।
जिसमें छोटे बच्चों ने खूब आनंद उठाया। जिला पंचायत विभाग की ओर से मेले की पूरी व्यवस्था की गई। पहले दिन जिला पंचायत के सभी अधिकारियों ने मेला क्षेत्र में पंडाल लगाकर व्यवस्थाओं की देखरेख की।
मकर संक्रांति पर परंपरा के अनुसार मुख्यालय समेत जिले के कई हिस्सों में खूब पतंगबाजी हुई। रंगबिरंगी पतंगों के पेंच लड़ने के बाद उसे लूटने के लिए छोटे बच्चों की टोली दिनभर गलियों में दौड़ती रही। कई स्थानों मेें युवतियों ने भी पतंग उड़ाई। सुबह से पतंग की दुकानों में भीड़ रही।
मकरसंक्रांति में पतंग उड़ाने की परंपरा कई साल से चली आ रही है। इस वर्ष भी युवाओं व बच्चों ने छत और मैदान से रंगबिरंगी पतंगे उड़ाई। जिसमें आकाश में कलाबाजी करती पतंगे लोगों का मन मोहती रहीं। वहीं दुकान में कई मंत्रियों व चर्चित नेताओं की तस्वीर वाली पतंगों की धडल्ले से बिक्री जारी रही और युवक ऐसी पतंगों को उडाते भी रहे।
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शनिवार को धर्मनगरी के रामघाट स्थित मंदाकिनी नदी किनारे लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। नदी में डुबकी लगाने के बाद परंपरागत तरीके से खिचड़ी दान कर कामदगिरी परिक्रमा लगाई। शहर के भी नदी तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सुबह से स्नान किया। पुरानी बाजार व शंकर बाजार स्थित नदी किनारे मेला लगा रहा। बच्चों ने खिलौने व गुब्बारा खरीदा।
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वहीं जिले के राजापुर, मऊ, बरगढ़ क्षेत्र में यमुना नदी में ग्रामीणों ने स्नान कर दान किया। भौरी, शिवरामपुर,सरैंया, मानिकपुर, ऐचवारा आदि क्षेत्र के ग्रामीण आस पास की नदियों व तलाबों में स्नान किया। कई क्षेत्रों में मेला का आयोजन किया गया। मकर संक्रांति पर कस्बे के ऐतिहासिक मंदिर के पास पांच दिवसीय मेला शुरू हुआ। पहले दिन खिचड़ी दान के बाद कूप का पवित्र जल लेने को होड़ मची रही।
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भीड़ अधिक होने पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस कर्मियों ने कुएं से बाल्टी से जल निकालकर श्रद्धालुओं को बांटा। मेले में आस-पास के सैकड़ों गांव के ग्रामीण शामिल रहे। महिलाओं के साथ बच्चों की संख्या सर्वाधिक रही।
मान्यता के अनुसार भरतकूप कस्बे में स्थित मंदिर के सामने बने कुएं में भरत ने कई तीर्थ स्थलों से लाए जल को डाला था। जब भगवान राम वनवास काल के दौरान चित्रकूट रहे तो उन्हें वापस अयोध्या ले जाने के लिए भरत कई तीर्थों का जल लेकर श्रीराम के चरण धोने को आए थे। वही जल इस कूएं में डालने का उल्लेख रामचरित मानस में किया गया है।
इसी स्थान में सालों से मकर संक्रांति पर पांच दिवसीस मेला लगाया जाता है। मेले में सुबह से आस -पास के सैकड़ों गांव के ग्रामीण पहुंच गये। तीर्थ स्थल पर बने कूप में स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा पाठ किया। इसके बाद लगे मेला का लुप्त उठाया। जिसमें महिलाओं ने श्रंगार के साथ गृहस्थी का समान खरीदा। आकर्षण का केंद्र झूले रहे।
जिसमें छोटे बच्चों ने खूब आनंद उठाया। जिला पंचायत विभाग की ओर से मेले की पूरी व्यवस्था की गई। पहले दिन जिला पंचायत के सभी अधिकारियों ने मेला क्षेत्र में पंडाल लगाकर व्यवस्थाओं की देखरेख की।
मकर संक्रांति पर परंपरा के अनुसार मुख्यालय समेत जिले के कई हिस्सों में खूब पतंगबाजी हुई। रंगबिरंगी पतंगों के पेंच लड़ने के बाद उसे लूटने के लिए छोटे बच्चों की टोली दिनभर गलियों में दौड़ती रही। कई स्थानों मेें युवतियों ने भी पतंग उड़ाई। सुबह से पतंग की दुकानों में भीड़ रही।
मकरसंक्रांति में पतंग उड़ाने की परंपरा कई साल से चली आ रही है। इस वर्ष भी युवाओं व बच्चों ने छत और मैदान से रंगबिरंगी पतंगे उड़ाई। जिसमें आकाश में कलाबाजी करती पतंगे लोगों का मन मोहती रहीं। वहीं दुकान में कई मंत्रियों व चर्चित नेताओं की तस्वीर वाली पतंगों की धडल्ले से बिक्री जारी रही और युवक ऐसी पतंगों को उडाते भी रहे।