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राजनीति के साथ धर्मनीति जरूरी : रामभरोसे
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 19 Feb 2015 10:37 PM IST
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धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रही। उधर, विद्वत सत्र में विद्वानों ने
रामचरित मानस के गूढ़ रहस्यों को बताया। बनारस से आए रामभरोसे तिवारी ने
कहा कि राजनीति के साथ धर्मनीति का होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि रामराज्य में धर्मनीति के साथ राजनीति की जाती थी, जिससे अयोध्या जैसे विशाल साम्राज्य की प्रजा खुशहाल थी। इटावा से आए विश्राम दास ने कहा कि नाव तो पानी में ही रहेगी पर नाव के अंदर पानी प्रवेश न करने पाए, इसके लिए विचार और क्रियाकलाप दोनों जरूरी हैं।
हम बुरे लोेगों के साथ तो रहें पर बुराइयों हमारे अंदर प्रवेश न हो पाएं, इसका ध्यान रखना होगा। पं. वीरेंद्र शास्त्री मुंबई ने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए केंद्र सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मानस मंदाकिनी पांडेय ने बताया कि रामकथा का इति व्रत चित्रकूट के चतुर्दिक परिक्रमा करता है।
द्वितीय सत्र के व्याख्यान सभा की अध्यक्षता डॉ. सभापति मिश्र प्रयाग ने की। संचालन चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने किया। सभापति मिश्र ने कहा कि भगवान श्रीराम का आदर्श चरित्र विश्व की मानवता के लिए अनुकरणीय है। भगवान राम व्यक्तित्व समत्व योग की साधना है, क्योकि राज्याभिषेक के समाचार से उन्हें प्रसन्नता नहीं हुई और वनवास के समाचार से उन्हें रंचमात्र दु:ख की अनुभूति नहीं हुई।
डॉ. सीताराम सिंह विश्वबंधु ने चित्रकूट की महिमा का बखान किया। डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने स्वरचित कविताओं से गोष्ठी में समां बांध दिया। तिरुपति से आए डॉ. आरएस त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रों का सुरमय पाठ किया। रामआसरे दास रामायणी वृंदावन ने कहा कि रामायणों में वाल्मीकि रामायण वरेण्य है। कहा कि जिसमें राम का अयन (घर) है, वही रामायण है। रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन डॉ. हरि प्रसाद दुबे फैजाबाद ने किया।
रांची के सृष्टिधर महतो द्वारा मारकंडेय पुराण के आधार पर छाऊ नृत्य का मंचन किया गया। लखनऊ के अजय मिश्रा ने रामकथा और कृष्णकाव्य के आधार पर गायन किया। यज्ञ नारायण शिवलोक इलाहाबाद के साथ ममता वाराणसी ने भजन गाए। अनुज श्रीवास्तव एंड पार्टी लखनऊ के कलाकारों ने रामकथा के विभिन्न पहलुओं पर भजन गाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। वृंदावन रासमंडली के प्रमुख स्वामी देवकीनंदन शर्मा ने गोस्वामी तुलसीदास का जीवन वृतांत सुनाया।
उन्होंने कहा कि रामराज्य में धर्मनीति के साथ राजनीति की जाती थी, जिससे अयोध्या जैसे विशाल साम्राज्य की प्रजा खुशहाल थी। इटावा से आए विश्राम दास ने कहा कि नाव तो पानी में ही रहेगी पर नाव के अंदर पानी प्रवेश न करने पाए, इसके लिए विचार और क्रियाकलाप दोनों जरूरी हैं।
हम बुरे लोेगों के साथ तो रहें पर बुराइयों हमारे अंदर प्रवेश न हो पाएं, इसका ध्यान रखना होगा। पं. वीरेंद्र शास्त्री मुंबई ने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए केंद्र सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मानस मंदाकिनी पांडेय ने बताया कि रामकथा का इति व्रत चित्रकूट के चतुर्दिक परिक्रमा करता है।
द्वितीय सत्र के व्याख्यान सभा की अध्यक्षता डॉ. सभापति मिश्र प्रयाग ने की। संचालन चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने किया। सभापति मिश्र ने कहा कि भगवान श्रीराम का आदर्श चरित्र विश्व की मानवता के लिए अनुकरणीय है। भगवान राम व्यक्तित्व समत्व योग की साधना है, क्योकि राज्याभिषेक के समाचार से उन्हें प्रसन्नता नहीं हुई और वनवास के समाचार से उन्हें रंचमात्र दु:ख की अनुभूति नहीं हुई।
डॉ. सीताराम सिंह विश्वबंधु ने चित्रकूट की महिमा का बखान किया। डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने स्वरचित कविताओं से गोष्ठी में समां बांध दिया। तिरुपति से आए डॉ. आरएस त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रों का सुरमय पाठ किया। रामआसरे दास रामायणी वृंदावन ने कहा कि रामायणों में वाल्मीकि रामायण वरेण्य है। कहा कि जिसमें राम का अयन (घर) है, वही रामायण है। रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन डॉ. हरि प्रसाद दुबे फैजाबाद ने किया।
रांची के सृष्टिधर महतो द्वारा मारकंडेय पुराण के आधार पर छाऊ नृत्य का मंचन किया गया। लखनऊ के अजय मिश्रा ने रामकथा और कृष्णकाव्य के आधार पर गायन किया। यज्ञ नारायण शिवलोक इलाहाबाद के साथ ममता वाराणसी ने भजन गाए। अनुज श्रीवास्तव एंड पार्टी लखनऊ के कलाकारों ने रामकथा के विभिन्न पहलुओं पर भजन गाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। वृंदावन रासमंडली के प्रमुख स्वामी देवकीनंदन शर्मा ने गोस्वामी तुलसीदास का जीवन वृतांत सुनाया।