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जीवन में सफलता के लिए भगवत भक्ति जरूरी
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कथा सुनाते मानस वक्ता मुरलीधर महाराज- संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। धर्मनगरी में चल रही मानस वक्ता मुरलीधर महाराज ने कहा कि भक्ति रूपी सीता को पाने के लिए अहंकार रूपी धनुष को भंग करना होता है। जीवन में सफलता के लिए भगवत भक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं है।
जीवनरूपी गाड़ी में सुख व दुख दो तरह के स्टेशन है लेकिन एक राम नाम रुपी ऐसा जंक्शन है जहां से जीवन की गाड़ी मोड़ने पर आंनद ही आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने भगवान राम की बाललीलाओं के साथ रामसीता विवाह का प्रसंग सुनाया। धनुष भंग होते ही जैसे ही राम सीता विवाह का प्रसंग आया तो सैकड़ों भक्त झूमने लगे।
रामायण मेला परिसर में महाजन मनिहार परिवार की मेजबानी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा में गुरुवार को मानस वक्ता ने राजा दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण संस्कार, बाल लीलाओं, विद्यारंभ संस्कार, अहिल्या उद्धार, पुष्प वाटिका व धनुष भंग प्रसंग के साथ भगवान राम व जगत जननी मां सीता के विवाह प्रसंग का बड़े ही सुंदर भाव से वर्णन किया।
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मानस वक्ता महाराज ने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक है। यदि हम भक्ति रूपी सीता को प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे मन में बसे अहंकार रूपी धनुष को भंग करना होगा। यूं तो धाम धाम में सुख है लेकिन सुख का धाम केवल राम है। कलियुग में केवल राम का नाम ही आधार है यही परम आनंद देने वाला सुख का सागर है। इस अवसर पर भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार विजय महाजन, नीलम महाजन, गरीब राम सहित अनेक संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।
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जीवनरूपी गाड़ी में सुख व दुख दो तरह के स्टेशन है लेकिन एक राम नाम रुपी ऐसा जंक्शन है जहां से जीवन की गाड़ी मोड़ने पर आंनद ही आनंद की प्राप्ति होती है। उन्होंने भगवान राम की बाललीलाओं के साथ रामसीता विवाह का प्रसंग सुनाया। धनुष भंग होते ही जैसे ही राम सीता विवाह का प्रसंग आया तो सैकड़ों भक्त झूमने लगे।
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रामायण मेला परिसर में महाजन मनिहार परिवार की मेजबानी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा में गुरुवार को मानस वक्ता ने राजा दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण संस्कार, बाल लीलाओं, विद्यारंभ संस्कार, अहिल्या उद्धार, पुष्प वाटिका व धनुष भंग प्रसंग के साथ भगवान राम व जगत जननी मां सीता के विवाह प्रसंग का बड़े ही सुंदर भाव से वर्णन किया।
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मानस वक्ता महाराज ने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक है। यदि हम भक्ति रूपी सीता को प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे मन में बसे अहंकार रूपी धनुष को भंग करना होगा। यूं तो धाम धाम में सुख है लेकिन सुख का धाम केवल राम है। कलियुग में केवल राम का नाम ही आधार है यही परम आनंद देने वाला सुख का सागर है। इस अवसर पर भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार विजय महाजन, नीलम महाजन, गरीब राम सहित अनेक संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।