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Chitrakoot News: फुटपाथ और सड़क पर श्रद्धालुओं ने गुजारी रात
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फुटपाथ पर लेटे श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : संवाद
चित्रकूट। श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन के बाहर फुटपाथ और सड़क पर ही रात गुजारनी पड़ी। स्टेशन के गेट ट्रेन आने पर ही खोला जाता था। इससे श्रद्धालु ट्रेन में सवार होने के लिए दौड़ पड़ते थे। बाहर कोई पुलिस व्यवस्था नहीं दिखी। स्टेशन के मुख्य गेट को वीआईपी व एसी में रिजर्वेशन वालों के लिए रिजर्व कर दिया गया। इसे लेकर श्रद्धालुओं में रोष रहा।
रात 10 बजे रेलवे स्टेशन के बाहर श्रद्धालु फुटपाथ व सडक़ पर ही बिस्तर लगाये रहे। साढ़े दस बजे कुछ देर के लिए गेट खुला तो श्रद्धालु अंदर जाने के लिए एक दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़े। पांच मिनट में ही गेट बंद कर दिया गया। इसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी रोष रहा। गया बिहार से आई संगीता ने बताया कि उसके बच्चे व पति तीन घंटे से स्टेशन के बाहर खड़े हैं। अंदर ही नहीं जाने दे रहे। मुख्य गेट पर पुलिस कहती रही सिर्फ वीआईपी ही अंदर जाएंगे।
रात 11 बजकर 30 मिनट पर थके हारे श्रद्धालु जब स्टेशन के अंदर नहीं जा पाये तो बाहर ही फुटपाथ पर लेट गये। यहां तक कि मुख्य सडक़ पर ही बैठकर गेट खुलने का इंतजार करते रहे। उप्र उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने फुटपाथ पर सोने वालों के लिए तिरपाल व पानी का इंतजाम किया। पंजाब से आये सुखविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें प्रयागराज जाना है लेकिन चार घंटे बाद भी स्टेशन के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं अब वह सब फुटपाथ पर ही रात गुजारेंगे।
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रात दो बजे रामघाट श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। ऐसे में प्रशासन को श्रद्धालुओं को कामदगिरी भवन व मुख्य गेट पर ही दो घंटे के लिए रोकना पड़ा। जबलपुर की मनीषादेवी ने बताया कि दोपहर को वह चित्रकूट पहुंची। चार घंटे पैदल चलने के बाद रामघाट पहुंचे हैं। अब स्नान कर ही लौटेंगे। भीड़ देखकर डर भी लग रहा है।
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रात 10 बजे रेलवे स्टेशन के बाहर श्रद्धालु फुटपाथ व सडक़ पर ही बिस्तर लगाये रहे। साढ़े दस बजे कुछ देर के लिए गेट खुला तो श्रद्धालु अंदर जाने के लिए एक दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़े। पांच मिनट में ही गेट बंद कर दिया गया। इसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी रोष रहा। गया बिहार से आई संगीता ने बताया कि उसके बच्चे व पति तीन घंटे से स्टेशन के बाहर खड़े हैं। अंदर ही नहीं जाने दे रहे। मुख्य गेट पर पुलिस कहती रही सिर्फ वीआईपी ही अंदर जाएंगे।
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रात 11 बजकर 30 मिनट पर थके हारे श्रद्धालु जब स्टेशन के अंदर नहीं जा पाये तो बाहर ही फुटपाथ पर लेट गये। यहां तक कि मुख्य सडक़ पर ही बैठकर गेट खुलने का इंतजार करते रहे। उप्र उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने फुटपाथ पर सोने वालों के लिए तिरपाल व पानी का इंतजाम किया। पंजाब से आये सुखविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें प्रयागराज जाना है लेकिन चार घंटे बाद भी स्टेशन के अंदर नहीं जाने दे रहे हैं अब वह सब फुटपाथ पर ही रात गुजारेंगे।
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रात दो बजे रामघाट श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। ऐसे में प्रशासन को श्रद्धालुओं को कामदगिरी भवन व मुख्य गेट पर ही दो घंटे के लिए रोकना पड़ा। जबलपुर की मनीषादेवी ने बताया कि दोपहर को वह चित्रकूट पहुंची। चार घंटे पैदल चलने के बाद रामघाट पहुंचे हैं। अब स्नान कर ही लौटेंगे। भीड़ देखकर डर भी लग रहा है।