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मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़े भक्त

Mon, 06 Aug 2018 11:40 PM IST
मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़े भक्त
मंदिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़े भक्त Updated Mon, 06 Aug 2018 11:40 PM IST
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Devotees for Jalabhishek in Temples
रामघाट स्थित मत्यगयेंद्रनाथ स्वामी का जलाभिषेक करते भक्त - फोटो : amarujala
अमर उजाला ब्यूरो
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खोही । सावन के दूसरे सोमवार धर्मनगरी के रामघाट स्थिति मत्यगजेंद्र नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। जिसको नियंत्रयण करने के लिए पुलिस फोर्स लगानी पड़ी। जिले के अन्य प्रसिद्ध शिवालयों में भी भीड़ लगी रही। भगवा वस्त्रधारण किए कांवरियों की टोली दिनभर बोल बम के साथ मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचे।
 रामघाट स्थित मत्यगजेंद्र नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए सुदूर क्षेत्र से भक्त आए जो सुबह होते ही लाइन लगा लिया। मंदिर में पहुंचने के बाद विधिविधान से पूजापाठ कर जलाभिषेक किया। वही जिले के पालेश्वर नाथमंदिर,सोमनाथ, मड़फा, ऋषियन आश्रम में बने शिवमंदिर में भक्ताें ने जलाभिषेक किया। इस दौरान रामघाट व आसपास भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
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शिवभक्त बाणासुर के आश्रम में प्राचीन शिवमंदिर में होती है पूजा


चित्रकूट। भगवान शिव के भक्त बाणासुर की साधन स्थली ऋषियन आश्रम जिले के मऊ तहसहील के गांव बरहा कोटरा में है। जहां पर प्राचीन शिव मंदिर बना हुआ है। जहां सावन के महीने में भक्त पूजा करने के लिए दूर- दूर से आते हैं। इस बार भी मंदिर में पूजा विधिविधान से किया जा रहा है।
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मऊ तहसील से 14 किमी दूर बरहा कोटरा गांव पड़ता है। कहा जाता है कि यह गांव बाणासुर जिसका रामचरित मानस में संत तुलसीदास ने धनुष यज्ञ लीला में जिक्र किया है। उसकी मां बरहा के नमा से पड़ा है। यहां पर दो प्राकृतिक गुफाएं  है एक गुफा में पांच अद्वितीय शिवलिंग को स्पर्श करती अविरल जलधारा बहती है। जबकि दूसरी गुफा को बंद कर दिया गया है। बताया जाता है ऋषियन में पाताल नरेश शिव भक्त बाणासुर के अलावा तमाम ऋषियां ने तपस्या किया था। भगवान श्रीराम वनवास जाते समय यहां रूक कर ऋषियों को आशीर्वाद दिया था। ऋषियन में आज भी पुराने गौरव को दोहराते हुए सात मंदिर अवशेष है। यहां पर शिवमंदिर, गणेश, मंदिर, दुर्गा, मंदिर, सूर्य मंदि आदि हैं। सूर्य मंदिर में सात घोड़ा का रथ भी बना है।

 
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