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बेटी होने के बावजूद माता-पिता ने बढ़ाया हौसला
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Despite being a daughter, parents encouraged
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। जिले के रैपुरा गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक महेंद्र सिंह उर्फ डिप्टी साहब की नातिन सोनाक्षी ने आईएएस की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। दिल्ली में शिक्षण कार्य करते समय उनको यह सफलता मिली। उन्होंने आईएएस की परीक्षा में 193 वीं रैंक पाई है। सोनाक्षी ने कहा कि बेटी होने के बावजूद माता-पिता ने प्रोत्साहित किया। जिससे उनका हौसला बना रहा। सोनाक्षी पटेल उर्फ नेहा मूल रूप से प्रयागराज के हंडिया तहसील अंतर्गत हनुमानगंज की निवासी हैं।
जिले के रैपुरा गांव से पहले भी आईएएस, आईपीएस व पीसीएस कैडर में युवकों ने सफलता पाई है। इस गांव के वर्तमान में दो आईएएस, एक आईपीएस व 12 पीसीएस अफसर हैं। सोनाक्षी की मां सुमनलता ने बताया कि उनके पति त्रिभुवन सिंह गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में जेई हैं। जिससे वह अपनी बेटी सोनाक्षी उर्फ नेहा और बेटा विक्र्रम सिंह को लेकर प्रयागराज में फिर इंटर की पढ़ाई कानपुर में कराई। इसके बाद बेटी की इच्छा के अनुसार उसे शिक्षण व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली भेजा। इस दौरान पति के दूर होने और जिम्मेदारी बढ़ने पर बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने अपनी परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी भी छोड़ दी।
आईएएस में चयनित सोनाक्षी ने दूरभाष में अमर उजाला को बताया कि शुरू से सिविल सर्विस में जाकर देश सेवा में योगदान करने की इच्छा थी। उनके माता पिता ने उसे हर कदम पर बेटी होने के बावजूद प्रोत्साहित किया जिससे उसका हौसला बना रहा। चित्रकूट व अपने गांव के बारे में बताया कि गर्मियों में वह अपने परिवार के साथ नाना व मामा के घर आकर खूब खेलते हैं। उनकी इस सफलता पर मामा राजीव सिंह के अलावा समाजसेवी यशवंत सिंह, अजीत सिंह आदि ने बधाई दी है।
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जिले के रैपुरा गांव से पहले भी आईएएस, आईपीएस व पीसीएस कैडर में युवकों ने सफलता पाई है। इस गांव के वर्तमान में दो आईएएस, एक आईपीएस व 12 पीसीएस अफसर हैं। सोनाक्षी की मां सुमनलता ने बताया कि उनके पति त्रिभुवन सिंह गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में जेई हैं। जिससे वह अपनी बेटी सोनाक्षी उर्फ नेहा और बेटा विक्र्रम सिंह को लेकर प्रयागराज में फिर इंटर की पढ़ाई कानपुर में कराई। इसके बाद बेटी की इच्छा के अनुसार उसे शिक्षण व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली भेजा। इस दौरान पति के दूर होने और जिम्मेदारी बढ़ने पर बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने अपनी परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी भी छोड़ दी।
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आईएएस में चयनित सोनाक्षी ने दूरभाष में अमर उजाला को बताया कि शुरू से सिविल सर्विस में जाकर देश सेवा में योगदान करने की इच्छा थी। उनके माता पिता ने उसे हर कदम पर बेटी होने के बावजूद प्रोत्साहित किया जिससे उसका हौसला बना रहा। चित्रकूट व अपने गांव के बारे में बताया कि गर्मियों में वह अपने परिवार के साथ नाना व मामा के घर आकर खूब खेलते हैं। उनकी इस सफलता पर मामा राजीव सिंह के अलावा समाजसेवी यशवंत सिंह, अजीत सिंह आदि ने बधाई दी है।
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