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नि:शक्तों को मिल रही उच्च शिक्षा की डिग्री
चित्रकूट
Updated Wed, 26 Jul 2017 11:40 PM IST
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय का 17वां स्थापना दिवस
- फोटो : amarujala
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अमर उजाला ब्यूरो
खोही(चित्रकूट)। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय का 17वां स्थापना दिवस मनाया गया। जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। इसके साथ ही परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
विश्वविद्यालय के अष्टावक्र सभागार में बुधवार को महात्मागांधी ग्रामोद्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत कर कहा कि विकलांग विश्वविद्यालय में नि:शक्तों को उच्च शिक्षा की डिग्री दी जाती है। जिससे कई नि:शक्त आज उच्च पद पर हैं। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने कहा कि जगद् गुरू ने जितनी रचनाएं लिखी हैं उसको पूरे जीवन में पढ़ पाना संभव नहीं है। दीनदयाल शोध संस्थान संगठन के सचिव अभय महाजन ने कहा कि भगवान राम के सेतु निर्माण में जिस तरह गिलहरी ने प्रयास किया उसी तरह से हम लोग इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनवाने के लिए प्रयास करेंगे।
डा. ज्योति विश्वकर्मा ने सरस्वती वंदना एवं जगदगुरू द्वारा रचित कुल गीत प्रस्तुत किया। संगीत शिक्षक विशेष नारायण ने स्वरचित गीत आया आया स्थापना दिवस आया... प्रस्तुत किया। इसके अलावा विश्वविवद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्र्रस्तुत किये। विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी रामपति मिश्र ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर प्रकाश डाला। इस मौके पर कुलपति योगेश चंद्र दुबे, कुल सचिव प्रो गिरिजा प्रसाद दुबे, गीता मिश्रा आदि मौजूद रहीं।
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खोही(चित्रकूट)। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय का 17वां स्थापना दिवस मनाया गया। जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। इसके साथ ही परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
विश्वविद्यालय के अष्टावक्र सभागार में बुधवार को महात्मागांधी ग्रामोद्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत कर कहा कि विकलांग विश्वविद्यालय में नि:शक्तों को उच्च शिक्षा की डिग्री दी जाती है। जिससे कई नि:शक्त आज उच्च पद पर हैं। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने कहा कि जगद् गुरू ने जितनी रचनाएं लिखी हैं उसको पूरे जीवन में पढ़ पाना संभव नहीं है। दीनदयाल शोध संस्थान संगठन के सचिव अभय महाजन ने कहा कि भगवान राम के सेतु निर्माण में जिस तरह गिलहरी ने प्रयास किया उसी तरह से हम लोग इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनवाने के लिए प्रयास करेंगे।
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डा. ज्योति विश्वकर्मा ने सरस्वती वंदना एवं जगदगुरू द्वारा रचित कुल गीत प्रस्तुत किया। संगीत शिक्षक विशेष नारायण ने स्वरचित गीत आया आया स्थापना दिवस आया... प्रस्तुत किया। इसके अलावा विश्वविवद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्र्रस्तुत किये। विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी रामपति मिश्र ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर प्रकाश डाला। इस मौके पर कुलपति योगेश चंद्र दुबे, कुल सचिव प्रो गिरिजा प्रसाद दुबे, गीता मिश्रा आदि मौजूद रहीं।
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