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कामदगिरि के दर्शन से सभी दुखों का समन होता है: मानस किंकर
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फोटो-4- राष्ट्रीय रामायण मेला में भगवान राम की लीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। 49वें राष्टीय रामायण मेले के समापन दिवस पर बांदा के मानस किंकर रामप्रताप ने कहा कि जहां पर संतों का समाज जुड़ता है, वहां पर तीर्थों के राजा प्रयाग स्वयं आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि कामदगिरि के दर्शन मात्र से सभी दुखों का समन होता है।
चित्रकूट के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यहां की धरा सदैव से पावन व पवित्र रही है। इसी धरा में अनुसुइया आश्रम से अपने तप व सतीत्व बल के प्रभाव से अनुसुइया माता ने मंदाकिनी गंगा प्रकट की। पूर्व प्रवक्ता सत्यदेव त्रिवेदी ने बताया कि रहीम खानखाना सम्राट अकबर के नौ रत्नों में प्रमुख थे। दरबार के षड्यंत्रों से दुखी होकर रहीम दास चित्रकूट आ गए थे। यहां आकर वह भरभूंजा की एक दुकान में आकर भार झोंकने का काम किया करते थे। उनसे प्रभावित होकर लोग एकत्रित हो जाया करते थे।
सिंधु सभ्यता से भी प्राचीन है चित्रकूट तीर्थ
चित्रकूट। रामायण मेला के समापन सत्र में गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रख्यात साहित्यकार व शोधकर्ता डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने बताया कि चित्रकूट सृष्टि का आध्यात्मिक केंद्र है। आर्य सभ्यता के पूर्व की आदिवासी जातियां चित्रकूट में कोल भील के रूप में अभी भी पाई जाती हैं। चित्रकूट विंध्याचल पर्वत की श्रृंखलाओं पर स्थित है और विंध्याचल हिमालय से भी प्राचीन है। यहां की सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता से भी पुरानी है।
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महोत्सव के अंतिम दिन कलाकारों ने बिखेरा जलवा
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले के समापन दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। लखनऊ से पधारे दूरदर्शन के कलाकारों में प्रख्यात लोक गायिका मानसी रघुवंशी ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
रामायण मेला में गुरुवार को अपनी खनकती आवाज के जरिये कार्यक्रम का शुभारंभ मानसी रघुवंशी के गीतों से हुआ। उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, रामहि राम रटन लागी जिभिया, सिया जी बहिनिया हमार हो राम लगिहै पहनुवा, चित्रकूट के घाट घाट पर शबरी देखे बाट राम मेरे आ जाओ, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया, लोक गीतों को सुनाकर मानसी रघुवंशी ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
भक्ति भावना से परिपूर्ण इस प्रस्तुती के बाद मानसी के साथ आए गायक ऋषिराज पांडेय व नितीश सिंह सूर्यवंशी ने भजनों सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इसके पूर्व डॉ. आरके चौरिहा ने सोहर गीत गाकर लोगों का मनोरंजन किया। वृंदावन रास लीला संस्थान के स्वामी देवकी नंदन शर्मा की टीम ने सुबह राम हनुमान युद्ध लीला का मंचन किया। मां भगवती लोकगीत पार्टी के रामखेलावन विश्वकर्मा ने तुम बिन लाखों लाज हरि। अनुरंजना ने चित्रकूट पावन नगरिया घूमन चलो ओ मोरी गुइयां गीत प्रस्तुत किए।
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चित्रकूट के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यहां की धरा सदैव से पावन व पवित्र रही है। इसी धरा में अनुसुइया आश्रम से अपने तप व सतीत्व बल के प्रभाव से अनुसुइया माता ने मंदाकिनी गंगा प्रकट की। पूर्व प्रवक्ता सत्यदेव त्रिवेदी ने बताया कि रहीम खानखाना सम्राट अकबर के नौ रत्नों में प्रमुख थे। दरबार के षड्यंत्रों से दुखी होकर रहीम दास चित्रकूट आ गए थे। यहां आकर वह भरभूंजा की एक दुकान में आकर भार झोंकने का काम किया करते थे। उनसे प्रभावित होकर लोग एकत्रित हो जाया करते थे।
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सिंधु सभ्यता से भी प्राचीन है चित्रकूट तीर्थ
चित्रकूट। रामायण मेला के समापन सत्र में गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रख्यात साहित्यकार व शोधकर्ता डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने बताया कि चित्रकूट सृष्टि का आध्यात्मिक केंद्र है। आर्य सभ्यता के पूर्व की आदिवासी जातियां चित्रकूट में कोल भील के रूप में अभी भी पाई जाती हैं। चित्रकूट विंध्याचल पर्वत की श्रृंखलाओं पर स्थित है और विंध्याचल हिमालय से भी प्राचीन है। यहां की सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता से भी पुरानी है।
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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले के समापन दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। लखनऊ से पधारे दूरदर्शन के कलाकारों में प्रख्यात लोक गायिका मानसी रघुवंशी ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
रामायण मेला में गुरुवार को अपनी खनकती आवाज के जरिये कार्यक्रम का शुभारंभ मानसी रघुवंशी के गीतों से हुआ। उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, रामहि राम रटन लागी जिभिया, सिया जी बहिनिया हमार हो राम लगिहै पहनुवा, चित्रकूट के घाट घाट पर शबरी देखे बाट राम मेरे आ जाओ, रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया, लोक गीतों को सुनाकर मानसी रघुवंशी ने श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
भक्ति भावना से परिपूर्ण इस प्रस्तुती के बाद मानसी के साथ आए गायक ऋषिराज पांडेय व नितीश सिंह सूर्यवंशी ने भजनों सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इसके पूर्व डॉ. आरके चौरिहा ने सोहर गीत गाकर लोगों का मनोरंजन किया। वृंदावन रास लीला संस्थान के स्वामी देवकी नंदन शर्मा की टीम ने सुबह राम हनुमान युद्ध लीला का मंचन किया। मां भगवती लोकगीत पार्टी के रामखेलावन विश्वकर्मा ने तुम बिन लाखों लाज हरि। अनुरंजना ने चित्रकूट पावन नगरिया घूमन चलो ओ मोरी गुइयां गीत प्रस्तुत किए।