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जंगल में अपहृत को छोड़ भागे डाकू

Wed, 18 Jan 2017 10:59 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला चित्रकूट
ब्यूरो अमर उजाला चित्रकूट Updated Wed, 18 Jan 2017 10:59 PM IST
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Pirates leave hijacked in the forest ran
डकैतों की चंगुल से छूटा जानकीशरण। - फोटो : अमर उजाला
 एक लाख की फिरौती मांगने वाले डाकू  गैंग बुधवार को अपहृत को छोड़ भाग गए। पुलिस का दावा है कि पुलिस के दबाव के चलते डाकू गैंग बिना फिरौती के ही अपहृत को छोड़ दिया। अपहृत को  अनुसुइया जंगल से बरामद किया गया।
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गौरतलब है कि जिले की सीमा से जुड़े नयागांव मप्र चित्रकूट के मोहकमगढ़ से किसान जानकीशरण पुत्र गुलाब मवासी का अपहरण रविवार को किया गया था। इसके दो दिन बाद एक लाख की फिरौती मांगी थी। जिस पर सतना एसपी मिथलेश कुमार ने एंटी डकैती टीम के अनिमेष द्विवेदी व नयागांव थाना प्रभारी रितेश शर्मा के साथ मंगलवार की रात भर मोहकमगढ़ व अनुसुइया के जंगलों में सर्च अभियान चलाया।
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बुधवार को तड़के झूरी नदी किनारे गैंग की मौजूदगी की सूचना पर पुलिस टीम ने घेराबंदी की। नयागांव थाना प्रभारी ने बताया कि घेराबंदी बढ़ती देख गैंग अपहृत को वहीं छोड़कर पहाड़ की ओर भाग निकला। अपह़ृत के चिल्लाने पर उसे सकुशल बरामद कर लिया गया है। डकैतों को कोई फिरौती नहीं पहुंचाई गई। अब अपहृत के साथ पुलिस उन स्थानों पर जाकर छानबीन कर रही है जहां-जहां उसे रखा गया था।
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 चार दिन बाद डकैतों के चंगुल से छूटकर आए किसान जानकीशरण को सकुशल पाकर परिजन बेहद खुश हुए। सभी ने उसे गले से लगा लिया। वहीं जानकीशरण ने बताया कि डकैतों ने फिरौती के लिए दो बार फोन करवाया था। दिन में आंख पर पट्टी बांधकर रखते थे।


पुलिस की मौजूदगी में अपहृत व उसके परिजनों ने दावा किया कि फिरौती के लिए मांगे गए रुपये डाकुओं को नहीं पहुंचाए गए हैं। जानकीशरण ने बताया कि गैंग लीडर ललित पटेल को वह पहचानता है लेकिन अन्य को नहीं। गैंग में कुल सात सदस्य थे। जो तमंचा व बंदूक लेकर चलते हैं। दिन में उसके आंख में पट्टी बांधकर जंगल में इधर उधर ले जाते थे।





रात में पट्टी खोलकर किसी पुरवा में रोका जाता था जहां रोटी सब्जी खाने के बाद फिर जंगल में ही पूरी रात रहते थे। उसने बताया कि डकैतों में सिर्फ एक आदमी ही उसके साथ रहता था और बाकी कुछ दूरी पर रहते थे। फिरौती मंगाने के लिए डाकुओं ने दो बार फोन कराया था। जिसमें कुछ रिश्तेदारों के नंबर पर भी बात कराई गई थी।
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