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मेडिकल छात्र ने फांसी लगाकर जान दी
चित्रकूट
Updated Wed, 11 Oct 2017 11:21 PM IST
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घटना की जानकारी देते मृतक के परिजन।
- फोटो : amarujala
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चित्रकूट। नेत्र चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे छात्र ने मंगलवार शाम घर में फांसी लगाकर जान दे दी। छात्र का पिता होमगार्ड हैं। उनका कहा है कि परीक्षा में बैक पेपर आने से बेटा परेशान था।
पुरानी बाजार कच्ची छावनी निवासी होमगार्ड हरनारायण श्रीवास्तव का छोटा बेटा अरुण श्रीवास्तव उर्फ छोटू(19) बांदा के राजाराम मेमोरियल कॉलेज के नेत्र चिकित्सा विभाग में नेत्र प्रशिक्षण का प्रथम वर्ष का छात्र था। वह मंगलवार की शाम करीब तीन बजे बांदा से घर लौटा था। शाम को सात बजे इंटरनेट पर परीक्षा परिणाम देखने गया। लौट कर घर आया और बताया कि परीक्षा परिणाम में एक पेपर दोबारा देना पड़ेगा। उसके बैच के सभी साथी पास हो गए हैं। परिजनों के अनुसार इसी बात को लेकर वह परेशान रहा। थोड़ा बहुत खाना खाकर कमरे में सोने चला गया। बुधवार की सुबह देर तक सोकर नहीं उठा तो परिजन उसे जगाने गए। पिता हरनारायण के मुताबिक काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो सभी लोग पीछे के रास्ते से कमरे में पहुंचे तो अरुण फांसी के फंदे पर झूल रहा था। तत्काल उसे फंदे से नीचे उतारकर जिला अस्पताल लाए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस ने शव का पंचनामा कराया। मृतक छात्र दो भाइयों में छोटा था। बड़ा भाई अंकुल भी बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा है। इस घटना के बाद उसकी मां अंजू व पिता हरनारायण का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार मूल रूप से रामनगर के बसिंघा का निवासी था। कई सालों से चित्रकूट आकर रहने लगे थे।
पुरानी बाजार कच्ची छावनी निवासी होमगार्ड हरनारायण श्रीवास्तव का छोटा बेटा अरुण श्रीवास्तव उर्फ छोटू(19) बांदा के राजाराम मेमोरियल कॉलेज के नेत्र चिकित्सा विभाग में नेत्र प्रशिक्षण का प्रथम वर्ष का छात्र था। वह मंगलवार की शाम करीब तीन बजे बांदा से घर लौटा था। शाम को सात बजे इंटरनेट पर परीक्षा परिणाम देखने गया। लौट कर घर आया और बताया कि परीक्षा परिणाम में एक पेपर दोबारा देना पड़ेगा। उसके बैच के सभी साथी पास हो गए हैं। परिजनों के अनुसार इसी बात को लेकर वह परेशान रहा। थोड़ा बहुत खाना खाकर कमरे में सोने चला गया। बुधवार की सुबह देर तक सोकर नहीं उठा तो परिजन उसे जगाने गए। पिता हरनारायण के मुताबिक काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला तो सभी लोग पीछे के रास्ते से कमरे में पहुंचे तो अरुण फांसी के फंदे पर झूल रहा था। तत्काल उसे फंदे से नीचे उतारकर जिला अस्पताल लाए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस ने शव का पंचनामा कराया। मृतक छात्र दो भाइयों में छोटा था। बड़ा भाई अंकुल भी बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा है। इस घटना के बाद उसकी मां अंजू व पिता हरनारायण का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार मूल रूप से रामनगर के बसिंघा का निवासी था। कई सालों से चित्रकूट आकर रहने लगे थे।
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