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कभी पुलिस का पड़ला भारी रहा तो कभी डाकुओं का
Updated Thu, 24 Aug 2017 11:43 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। पुलिस और डाकुआें के बीच अब तक कई बार मुठभेड़ हो चुकी है। इसमें कभी पुलिस का पलड़ा भारी रहा तो कभी डकैत भारी रहे। मुठभेड़ों में पुलिस और एसटीएफ के जवानों सहित दरोगा शहीद हो चुके हैं। राजापुर क्षेत्र के भुजौली गांव में घनश्याम केवट से मुठभेड़ और भरतकूप क्षेत्र में डाकू ठोकिया से एसटीएफ की मुठभेड़ पुलिस विभाग के लिए घातक सिद्ध हुई थी। पुलिस और डकैतों के बीच मुठभेड़ में कई कुख्यात इनामी डाकू मारे गये हैं, लेकिन कुछ मुठभेड़ पुलिस के लिए भी घातक सिद्ध हुई ।
1. यूपी पुलिस को सबसे ज्यादा क्षति साढे़ छह लाख के इनामी डाकू अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने 23 जुलाई 2007 को फतेहगंज बांदा के बघोलन जंगल में पहुंची। उसने घात लगाकर हमला किया था। इसमें एसटीएफ के छह जवान शहीद हो गए थे। एक मुखबिर भी मारा गया था।
2. इससे पूर्व जिले खोही चौकी में तैनात दो सिपाही राजसजीवन और रामपाल, कालिंजर थाने के सिपाही रमाकांत मिश्र की हत्या कर बंदूक लूट चुका था। भरतकूप क्षेत्र में ठोकिया से एक और मुठभेड़ हुई थी, जिसमें कोतवाली पुलिस के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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3. घनश्याम केवट भी पुलिस के लिए चुनौती रहा। उसने 18 जून 2009 को राजापुर थाना क्षेत्र के जमोली गांव में यूपी पुलिस और एसटीएफ के चार सौ जवानों से अकेले लोहा लिया। इसमें डीआईजी बांदा के गनर और पीएसी कंपनी कमांडर समेत चार सिपाही शहीद हो गए थे।
4. इससे पहले भी 50 हजार का इनामी रहा घनश्याम केवट यूपी पुलिस के दो जवानों की हत्या कर चुका था।
5. तराई में दूसरी बार सक्रिय पौने दो लाख के इनामी डाकू गौरी यादव ने चार वर्ष पूर्व बहिलपुरावा थाना क्षेत्र स्थित अपने बिलहरी गांव बहिलपुरवा में चोर को पकड़ने आए दिल्ली पुलिस के एसआई भगवान शर्मा की हत्या कर दी थी।
6. किहुंनिया जंगल में दो जुलाई 2013 को साढे़ छह लाख के इनामी डाकू बलखड़िया गैंग से पुलिस की मुठभेड़ हुई थी। इसमें दो सिपाहियों और पुलिस वाहन के प्राइवेट चालक को गोली लग गई थी, जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि तीनों की इलाज के बाद जान बच गई थी।
7. 24 अगस्त 2017 को मानिकपुर के निही जंगल में डाकू बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ में दरोगा जेपी सिंह शहीद हो गए, जबकि थानाध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी को गोली लगी है। ऑपरेशन कर वीरेंद्र त्रिपाठी के कमर से गोली निकाल ली गई है। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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चित्रकूट। पुलिस और डाकुआें के बीच अब तक कई बार मुठभेड़ हो चुकी है। इसमें कभी पुलिस का पलड़ा भारी रहा तो कभी डकैत भारी रहे। मुठभेड़ों में पुलिस और एसटीएफ के जवानों सहित दरोगा शहीद हो चुके हैं। राजापुर क्षेत्र के भुजौली गांव में घनश्याम केवट से मुठभेड़ और भरतकूप क्षेत्र में डाकू ठोकिया से एसटीएफ की मुठभेड़ पुलिस विभाग के लिए घातक सिद्ध हुई थी। पुलिस और डकैतों के बीच मुठभेड़ में कई कुख्यात इनामी डाकू मारे गये हैं, लेकिन कुछ मुठभेड़ पुलिस के लिए भी घातक सिद्ध हुई ।
1. यूपी पुलिस को सबसे ज्यादा क्षति साढे़ छह लाख के इनामी डाकू अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने 23 जुलाई 2007 को फतेहगंज बांदा के बघोलन जंगल में पहुंची। उसने घात लगाकर हमला किया था। इसमें एसटीएफ के छह जवान शहीद हो गए थे। एक मुखबिर भी मारा गया था।
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2. इससे पूर्व जिले खोही चौकी में तैनात दो सिपाही राजसजीवन और रामपाल, कालिंजर थाने के सिपाही रमाकांत मिश्र की हत्या कर बंदूक लूट चुका था। भरतकूप क्षेत्र में ठोकिया से एक और मुठभेड़ हुई थी, जिसमें कोतवाली पुलिस के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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3. घनश्याम केवट भी पुलिस के लिए चुनौती रहा। उसने 18 जून 2009 को राजापुर थाना क्षेत्र के जमोली गांव में यूपी पुलिस और एसटीएफ के चार सौ जवानों से अकेले लोहा लिया। इसमें डीआईजी बांदा के गनर और पीएसी कंपनी कमांडर समेत चार सिपाही शहीद हो गए थे।
4. इससे पहले भी 50 हजार का इनामी रहा घनश्याम केवट यूपी पुलिस के दो जवानों की हत्या कर चुका था।
5. तराई में दूसरी बार सक्रिय पौने दो लाख के इनामी डाकू गौरी यादव ने चार वर्ष पूर्व बहिलपुरावा थाना क्षेत्र स्थित अपने बिलहरी गांव बहिलपुरवा में चोर को पकड़ने आए दिल्ली पुलिस के एसआई भगवान शर्मा की हत्या कर दी थी।
6. किहुंनिया जंगल में दो जुलाई 2013 को साढे़ छह लाख के इनामी डाकू बलखड़िया गैंग से पुलिस की मुठभेड़ हुई थी। इसमें दो सिपाहियों और पुलिस वाहन के प्राइवेट चालक को गोली लग गई थी, जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि तीनों की इलाज के बाद जान बच गई थी।
7. 24 अगस्त 2017 को मानिकपुर के निही जंगल में डाकू बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ में दरोगा जेपी सिंह शहीद हो गए, जबकि थानाध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी को गोली लगी है। ऑपरेशन कर वीरेंद्र त्रिपाठी के कमर से गोली निकाल ली गई है। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।