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Chitrakoot News: हरि नाम के गुणगान का चित्रकूट में अपना ही महत्व
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फोटो-5- कथा सुनाते भगवताचार्य नवलेश दीक्षित। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। श्रीमद्भागवत अष्टोत्तर शत ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ करते हुए भागवताचार्य नवलेश दीक्षित महराज ने कहा कि हरि नाम के गुणगान का चित्रकूट में अपना ही महत्व है। यहां पर भगवान का नाम लेने से व्यक्ति का उद्धार हो जाता है।
श्रीमद्भागवत कथा अष्टोत्तर शत कथाओं में हर बार कुछ न कुछ मिला है। उन्होंने कहा कि पहले में उन्हें गंगा मिली तो दूसरे में यमुना और अब तीसरी कथा में उन्हें सरस्वती की प्राप्ति हो रही है। इस बार की कथा में यजमान और कथा सुनने वाले सभी लोग त्रिवेणी में स्नान करेंगे।
सोमवार को कथा यज्ञ के पहले दिन भगवताचार्य ने कहा कि चित्रकूट में कथा सुनने व सुनाने का अपना अलग महत्व है। यहां पर दोनों को असीमित लाभ होता है और यह तय है कि यहां पर कथा सुनने वाले अपने घर कुछ न कुछ लेकर जाऐं।
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उन्होंने बताया कि भागवत महापुराण में अठारह अध्याय, 18 हजार श्लोक हैं। हर श्लोक अपने आपमें पूर्ण है। इसके स्मरण मात्र से ही व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है।
इसके पूर्व सुबह के सत्र में लगभग दो सौ यजमानों ने आचार्यों के समक्ष श्रीमद भागवत पूराण का पूजन व आराधना की। यहां पर लगभग हर यजमान ने अपने पूर्वज की याद में श्रीमद्भागवत की एक चौकी रखवाई है। कार्यक्रम में यजमान बनने के लिए दिल्ली, एमपी, असम, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भक्त आए हुए हैं।
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श्रीमद्भागवत कथा अष्टोत्तर शत कथाओं में हर बार कुछ न कुछ मिला है। उन्होंने कहा कि पहले में उन्हें गंगा मिली तो दूसरे में यमुना और अब तीसरी कथा में उन्हें सरस्वती की प्राप्ति हो रही है। इस बार की कथा में यजमान और कथा सुनने वाले सभी लोग त्रिवेणी में स्नान करेंगे।
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सोमवार को कथा यज्ञ के पहले दिन भगवताचार्य ने कहा कि चित्रकूट में कथा सुनने व सुनाने का अपना अलग महत्व है। यहां पर दोनों को असीमित लाभ होता है और यह तय है कि यहां पर कथा सुनने वाले अपने घर कुछ न कुछ लेकर जाऐं।
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उन्होंने बताया कि भागवत महापुराण में अठारह अध्याय, 18 हजार श्लोक हैं। हर श्लोक अपने आपमें पूर्ण है। इसके स्मरण मात्र से ही व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है।
इसके पूर्व सुबह के सत्र में लगभग दो सौ यजमानों ने आचार्यों के समक्ष श्रीमद भागवत पूराण का पूजन व आराधना की। यहां पर लगभग हर यजमान ने अपने पूर्वज की याद में श्रीमद्भागवत की एक चौकी रखवाई है। कार्यक्रम में यजमान बनने के लिए दिल्ली, एमपी, असम, बिहार, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भक्त आए हुए हैं।