चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में नानाजी स्मृति व्याख्यान माला का आयोजन हुआ। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि नानाजी ने शिक्षालयों को मंदिर का दर्जा दिया और सरस्वती शिशु मंदिर की लंबी शृंखला तैयार की। गुणी और योग्य लोगों को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर स्वयं पीछे रहते थे। यही उनके संगठन कौशल की अनूठी विशेषता थी।
राष्ट्रवादी चिंतक तरुण विजय ने कहा कि भारतीयता के दर्शन करने हों तो नानाजी के डीआरआई को देखना चाहिए। भारतीय संस्कृति और मूल्य जिन ग्रामीण जनों में संरक्षित और संपोषित हैं। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालयों के नियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. भरत शरण सिंह ने विश्वविद्यालयों का आह्वान किया कि नाना जी के विचारों को अपने दैनिक क्रियाकलापों का हिस्सा बनाएं।
ग्राम प्रवास की परंपरा को अन्य विश्वविद्यालय भी की सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभाग कर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतरी के लिए छात्रों के साथ मिलकर कार्यक्रम बनाएंगे। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भरत मिश्रा, कुलसचिव डॉ. अजय कुमार, डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन, प्रो. वीरेंद्र कुमार व्यास भी मौजूद रहे।