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हारमोनियम और तबले की जुगलबंदी के बीच भक्ति सांस्कृतिक संध्या
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फोटो-3- शरदोत्सव में भरतनाट्यम प्रस्तुत करने वाली भोपाल की टीम के सदस्य। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट/खोही। ग्रामोदय मेला में चल रहे शरदोत्सव में भक्ति सांस्कृतिक संध्या में भरतनाट्यम शैली में रामकथा की प्रस्तुति दी गई। गायिका मैथिली ठाकुर ने ठुमक चलत रामचंद्र बाजे पैजनियां गीत सुनाया तो पूरा माहौल राममय हो गया।
सांस्कृतिक संध्या में भोपाल से आईं नृत्यांगना डॉ. लता सिंह मुंशी व समूह ने भरतनाट्यम शैली में रामकथा प्रस्तुत की। इसकी शुरुआत पुष्पांजलि के साथ हुई। राम स्तुति से श्रीराम के चरित्र का वर्णन किया गया। महाकवि तुलसीदास के रचित दोहों के आधार पर खूबसूरत प्रस्तुति दी गई। नृत्य के जरिये समझाया कि जिन्हें राम प्रिय नहीं हैं, उन्हें तज देने में ही भलाई है। नृत्यांगनाओं ने रामजन्म और बाल्यावस्था का वर्णन किया।
मशहूर भजन गायिका मैथिली ठाकुर ने भजनों की प्रस्तुति दी। रामा-रामा रटते रटते बीती रे उमरिया गाया तो श्रोता झूमने लगे। भजन संध्या के बाद मैथिली ठाकुर ने बताया कि सुर और संगीत का क्षेत्र जीवन भर सीखने का है। शास्त्रीय संगीत उन्हें विरासत में मिली।
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सांस्कृतिक संध्या में भोपाल से आईं नृत्यांगना डॉ. लता सिंह मुंशी व समूह ने भरतनाट्यम शैली में रामकथा प्रस्तुत की। इसकी शुरुआत पुष्पांजलि के साथ हुई। राम स्तुति से श्रीराम के चरित्र का वर्णन किया गया। महाकवि तुलसीदास के रचित दोहों के आधार पर खूबसूरत प्रस्तुति दी गई। नृत्य के जरिये समझाया कि जिन्हें राम प्रिय नहीं हैं, उन्हें तज देने में ही भलाई है। नृत्यांगनाओं ने रामजन्म और बाल्यावस्था का वर्णन किया।
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मशहूर भजन गायिका मैथिली ठाकुर ने भजनों की प्रस्तुति दी। रामा-रामा रटते रटते बीती रे उमरिया गाया तो श्रोता झूमने लगे। भजन संध्या के बाद मैथिली ठाकुर ने बताया कि सुर और संगीत का क्षेत्र जीवन भर सीखने का है। शास्त्रीय संगीत उन्हें विरासत में मिली।
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