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Chitrakoot News: खराब मशीन बेचने व कमी पूरी न करने पर कंपनी को जुर्माना
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चित्रकूट। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने खराब खोया मशीन बेचने और ठीक न करने पर कानपुर की कंपनी पर हर्जाना देने का आदेश दिया है। साथ ही मशीनों को सही तरीके से स्थापित न कर पाने की स्थिति में ग्राहक को नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ 3.05 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के रीडर एसडी ओझा ने बताया कि मऊ निवासी मनोज कुमार केशरवानी ने आयोग में परिवाद दायर किया था।
बताया कि उसने स्वरोजगार के लिए खोया बनाने की मशीन कानपुर के मेसर्स विश्वकर्मा फैग्रीकैटर्स से 3.05 लाख रुपये में खरीदी थी। 3 जनवरी 2018 को मशीन ट्रांसपोर्ट से आने पर उसने मऊ में लगवाई थी। गारंटी अवधि के अंदर ही 9 जून 2018 को मशीन खराब हो गई। लगातार संपर्क करने के बाद कंपनी ने मशीन को ठीक नहीं कराया।
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रामसुचित और सदस्य अंजू सिंह चौहान ने आदेश जारी किया। इसके तहत कंपनी को मशीनों को सही तरीके से स्थापित कर परिवादी को छह माह की वारंटी प्रदान करने के निर्देश दिए।
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ऐसा न होने पर कंपनी को 3.05 लाख रुपये की धनराशि नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ परिवादी को देने का आदेश दिया है। मानसिक क्षतिपूर्ति के तहत 10 हजार रुपये, वाद व्यय के पांच हजार एवं अनुचित व्यापार का दोषी पाए जाने पर 10 हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए एक माह के भीतर परिवादी को देने के आदेश दिए हैं।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के रीडर एसडी ओझा ने बताया कि मऊ निवासी मनोज कुमार केशरवानी ने आयोग में परिवाद दायर किया था।
बताया कि उसने स्वरोजगार के लिए खोया बनाने की मशीन कानपुर के मेसर्स विश्वकर्मा फैग्रीकैटर्स से 3.05 लाख रुपये में खरीदी थी। 3 जनवरी 2018 को मशीन ट्रांसपोर्ट से आने पर उसने मऊ में लगवाई थी। गारंटी अवधि के अंदर ही 9 जून 2018 को मशीन खराब हो गई। लगातार संपर्क करने के बाद कंपनी ने मशीन को ठीक नहीं कराया।
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दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रामसुचित और सदस्य अंजू सिंह चौहान ने आदेश जारी किया। इसके तहत कंपनी को मशीनों को सही तरीके से स्थापित कर परिवादी को छह माह की वारंटी प्रदान करने के निर्देश दिए।
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ऐसा न होने पर कंपनी को 3.05 लाख रुपये की धनराशि नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ परिवादी को देने का आदेश दिया है। मानसिक क्षतिपूर्ति के तहत 10 हजार रुपये, वाद व्यय के पांच हजार एवं अनुचित व्यापार का दोषी पाए जाने पर 10 हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए एक माह के भीतर परिवादी को देने के आदेश दिए हैं।