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Chitrakoot News: भदई अमावस्या पर चित्रकूट बना आस्था का महाकुंभ

Thu, 10 Sep 2026 11:44 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:44 PM IST
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Chitrakoot becomes a grand confluence of faith on Bhadai Amavasya
फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी 08 - रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
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फोटो 10 सीकेटीपी 09 -भादो अमावस्या पर भरतकूप क्षेत्र में जत्थों में पैदल जाते श्रद्धालु। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी 11 भरतकूप- परिक्रमा मार्ग पर पैदल जाती महिला श्रद्धालु व अन्य। संवाद
फोटो 10 सीकेटीपी 12 कीर्तन मंडली के साथ हाथों में भगवा ध्वज लेकर परिक्रमा करते श्रद्धालु। संवाद
= कोई 100 किमी पैदल चलकर आया तो कोई लेटकर कर रहा परिक्रमा
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट/खोही। भदई अमावस्या को लेकर भरतकूप से रामघाट तक हर सड़क, हर पगडंडी पर श्रद्धालुओं का रेला है। भरतकूप से रामघाट तक... जहां देखो वहां सिर ही सिर। नंगे पांव, फटे चप्पल, पैरों में छाले, गोद में बच्चे, सिर पर गठरी, फिर भी हर चेहरे पर मुस्कान और जुबां पर एक ही नाम है जय सीताराम।
कोई 100 किलोमीटर पैदल चलकर आया है तो कोई पेट के बल लेटकर परिक्रमा लगा रहा है। एक वृद्धा ने कहा, चित्रकूट बुलाता है तो पैर खुद चल पड़ते हैं, थकान तो राम देख लेते हैं। ढोलक-मंजीरे, कीर्तन और रामधुन से कामदगिरि का पूरा 5 किमी परिक्रमा मार्ग गूंज रहा है। हाथ में भगवा ध्वज, गले में कंठी-माला और आंखों में दर्शन की प्यास लिए लाखों लोग बढ़े चले जा रहे हैं।
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दतिया, नरैनी, ललितपुर, झांसी, मुरैना, टीकमगढ़, छतरपुर, बांदा से जत्थे पर जत्थे आ रहे हैं। मंदाकिनी में कोई हादसा न हो, इसलिए प्रशासन ने फ्लोटिंग बैरियर लगवाएं हैं। हर घाट पर जल पुलिस और महिला पुलिस तैनात की गई है। शहर में बड़े वाहनों की एंट्री बंद है। आसमान में ड्रोन और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी से निगरानी हो रही है। 6 बड़े रैन बसेरे तैयार हैं, जहां इनके ठहराव के इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन से सबसे आग्रह कर रहा है कि सड़क पर मत सोइए, आप हमारे मेहमान हैं, रैन बसेरे में आइए। इस वक्त चित्रकूट शहर नहीं, आस्था का महाकुंभ बन गया है।
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धर्मनगरी में दस जगहों पर बनाई गईं पार्किंग
चित्रकूट। धर्मनगरी में भादौ अमावस्या मेले में अब वाहनों की बेतरतीब पार्किंग नहीं होगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि छोटे-बड़े सभी वाहन सिर्फ तय पार्किंग स्थलों पर ही खड़े किए जाएंगे। भादौ अमावस्या पर इस बार 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने धर्मनगरी में 10 पार्किंग स्थल चिह्नित किए हैं। इनमें मत्स्यगजेंद्र धर्मकांटा के सामने पुलिस होर्डिंग एरिया, अशोक लीलैंड एजेंसी के पास सीपी सिंह इंटर कॉलेज के बगल में, भाई-भाई ढाबा के सामने बांदा रोड, रामकृपा चिकित्सालय के सामने, रैन बसेरा सीतापुर, पोद्दार इंटर कॉलेज, अवस्थी ट्रेडर्स के बगल में, रामसैया तिराहा के मध्य तथा बरहा हनुमान मंदिर के दोनों तरफ के पार्किंग स्थल शामिल हैं। प्रशासन ने सभी पार्किंग स्थलों पर सुरक्षा, लाइट और जवानों की तैनाती की व्यवस्था शुरू कर दी है। दावा है कि तय पार्किंग व्यवस्था लागू होने से मेला क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुचारू रहेगी और श्रद्धालुओं को दर्शन में आसानी होगी। (संवाद)
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श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए 6 रैन बसेरा तैयार
चित्रकूट। भादौ अमावस्या मेले में उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने ठहराव की पुख्ता व्यवस्था की है। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के रात्रि विश्राम के लिए कुल 6 रैन बसेरे बनाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की योजना के तहत 3 रैन बसेरे शहरी क्षेत्र में और 3 रैन बसेरे ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे हैं, इनमें शहरी क्षेत्र में सीतापुर स्थायी रैन बसेरा, रामशैया बस स्टैंड, भाई-भाई ढाबा (एनएच-35) के पास तथा ग्रामीण क्षेत्र में राम शैया के पास, भरथौल मोड़, भरतकूप मंदिर के पास शामिल हैं। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि सभी 6 रैन बसेरों में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, शौचालय, भोजन, पर्याप्त रोशनी, कंबल-गद्दे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी। (संवाद)

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साध्य योग और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में पड़ेगी भाद्रपद अमावस्या
चित्रकूट। इस बार भाद्रपद अमावस्या पर साध्य योग के साथ पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन दान-पुण्य के साथ पितरों के जल तर्पण का विशेष महत्व है। पंडित रमेश तिवारी और शिवभजन ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार अमावस्या 11 सितंबर को है। इस बार साध्य योग और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि वैदिक परंपरा में कुशा को पवित्र माना जाता है। हवन, श्राद्ध और पितृ तर्पण के समय इसे हाथ की अंगुली में धारण करने की परंपरा है, इसी कारण इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाता है।

फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद

फोटो 10 सीकेटीपी 10 भरतकूप क्षेत्र में लेटी परिक्रमा करती महिलाएं व जाते श्रद्धालु। संवाद

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