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पीड़ित की सहायता करने वाले से नहीं किया जा सकता सवाल
चित्रकूट
Updated Wed, 11 Oct 2017 11:25 PM IST
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शिविर में जज के स्वास्थ्य का परीक्षण करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : amarujala
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया। जिसमें मानसिक बीमारी के साथ ही कानून को लेकर चर्चा की गई। निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। जिसमें जज समेत वकील व विभागीय कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी जिला जज लाल चंद्र पांडेय व अपर जिला जज पीके श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में जिला प्राधिकरण के सचिव सिविल जज मो. नसीम ने कहा कि सुबह से लेकर शाम तक कार्यालयों में काम करने से अधिकारी व कर्मचारी तनाव में रहते हैं।
इसके अलावा उन्होंने कानून की जानकारी देते हुए कहा कि दुर्घटना होने पर देखने वाला व्यक्ति घायल व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जा सकता है। अब उस व्यक्ति से कोई प्रश्न नहीं किया जाएगा। मात्र उसको अपने पते की जानकारी देनी पडे़गी। सहायता करने वाला व्यक्ति किसी सिविल या आपराधिक दायित्व के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। इसके अलावा जो लोग पुलिस को सूचना देने या आपातकालीन सेवाओं के लिए फोन करते हैं। ऐसे लोगों को व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। अस्पतालों में पीड़ित के उपचार को धन जमा कराने को नहीं कहा जाएगा
। अस्पतालों द्वारा ऐसे दिश निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्राधिकरण द्वारा कार्यवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामजी पांडेय ने कहा कि मानसिक रोगी को सहानुभूति की आवश्यकता होती है। इस मौके पर मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र देव पटेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी आर के करवरिया, जिला शोध अधिकारी एमएल द्विवेदी व फार्मेसिस्ट पंकज गोयल आदि मौजूद रहे।
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चित्रकूट। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया। जिसमें मानसिक बीमारी के साथ ही कानून को लेकर चर्चा की गई। निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। जिसमें जज समेत वकील व विभागीय कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी जिला जज लाल चंद्र पांडेय व अपर जिला जज पीके श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में जिला प्राधिकरण के सचिव सिविल जज मो. नसीम ने कहा कि सुबह से लेकर शाम तक कार्यालयों में काम करने से अधिकारी व कर्मचारी तनाव में रहते हैं।
इसके अलावा उन्होंने कानून की जानकारी देते हुए कहा कि दुर्घटना होने पर देखने वाला व्यक्ति घायल व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जा सकता है। अब उस व्यक्ति से कोई प्रश्न नहीं किया जाएगा। मात्र उसको अपने पते की जानकारी देनी पडे़गी। सहायता करने वाला व्यक्ति किसी सिविल या आपराधिक दायित्व के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। इसके अलावा जो लोग पुलिस को सूचना देने या आपातकालीन सेवाओं के लिए फोन करते हैं। ऐसे लोगों को व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। अस्पतालों में पीड़ित के उपचार को धन जमा कराने को नहीं कहा जाएगा
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। अस्पतालों द्वारा ऐसे दिश निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्राधिकरण द्वारा कार्यवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामजी पांडेय ने कहा कि मानसिक रोगी को सहानुभूति की आवश्यकता होती है। इस मौके पर मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र देव पटेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी आर के करवरिया, जिला शोध अधिकारी एमएल द्विवेदी व फार्मेसिस्ट पंकज गोयल आदि मौजूद रहे।
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