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समाज का दर्पण होती है कला : गोपाल भाई
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 26 Feb 2015 11:59 PM IST
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ललित कला विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय जनजाति चित्रकार कार्यशाला का
समापन हो गया।
कार्यशाला में बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रति कुलपति प्रो. योगेश चंद्र दुबे और समाजसेवी गोपाल भाई ने किया। गोपाल भाई ने कहा कि कला समाज का दर्पण होती है। इसके माध्यम से प्राचीनकाल से समाज की दिशा-दशा तय होती थी।
कार्यशाला में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली का सहयोग रहा। इसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए जनजातीय कलाकारों ने पुरानी कला को जीवंत करने का प्रयास किया।
विवि के छात्र-छात्राओं को कला सिखाई। इनके द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रति कुलपति प्रो. योगेश चंद्र दुबे और समाज सेवा संस्थान के गोपाल भाई ने किया। गोपाल भाई ने कहा कि चित्रकला के प्रदर्शन से कई युद्धों को टाला गया है। प्रो. दुबे ने कहा कि चित्रकला मन की अभिव्यक्ति व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है।
मानव संग्रहालय भोपाल के वरिष्ठ कलाकार प्रवीण नारद का कहना था कि निशक्त विद्यार्थियों के साथ कला को साझा करने का अनुभव सुखद रहा। कहा कि अगली बार वे और बड़ा कार्यक्रम आयोजित कराएंगे।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. देवेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कलाकारों की कृतियों की जानकारी दी। संचालन प्रो. गोपाल मिश्र ने किया। इस मौके पर प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी, डॉ. महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ. विनोद कुमार मिश्रा, रत्नाकर ढोंक भोपाल, डॉ. राकेश तिवारी, डॉ. अंबरीश राय, डॉ. प्रसन्न पाटकर, पंकज अग्रवाल भी मौजूद रहे।
कार्यशाला में बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रति कुलपति प्रो. योगेश चंद्र दुबे और समाजसेवी गोपाल भाई ने किया। गोपाल भाई ने कहा कि कला समाज का दर्पण होती है। इसके माध्यम से प्राचीनकाल से समाज की दिशा-दशा तय होती थी।
कार्यशाला में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली का सहयोग रहा। इसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए जनजातीय कलाकारों ने पुरानी कला को जीवंत करने का प्रयास किया।
विवि के छात्र-छात्राओं को कला सिखाई। इनके द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रति कुलपति प्रो. योगेश चंद्र दुबे और समाज सेवा संस्थान के गोपाल भाई ने किया। गोपाल भाई ने कहा कि चित्रकला के प्रदर्शन से कई युद्धों को टाला गया है। प्रो. दुबे ने कहा कि चित्रकला मन की अभिव्यक्ति व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है।
मानव संग्रहालय भोपाल के वरिष्ठ कलाकार प्रवीण नारद का कहना था कि निशक्त विद्यार्थियों के साथ कला को साझा करने का अनुभव सुखद रहा। कहा कि अगली बार वे और बड़ा कार्यक्रम आयोजित कराएंगे।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. देवेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कलाकारों की कृतियों की जानकारी दी। संचालन प्रो. गोपाल मिश्र ने किया। इस मौके पर प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी, डॉ. महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ. विनोद कुमार मिश्रा, रत्नाकर ढोंक भोपाल, डॉ. राकेश तिवारी, डॉ. अंबरीश राय, डॉ. प्रसन्न पाटकर, पंकज अग्रवाल भी मौजूद रहे।