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जिले के 13 पशु अस्तताल में डाक्टरों व फार्मसिस्टों की कमी
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चित्रकूट। जिले के पशु अस्पताल इस समय चिकित्सकों समेत अन्य स्टॉफ की कमी से जूझ रहे हैं। आलम ये है कि 13 पशु चिकित्सालयों में 13 चिकित्सक होने चाहिए, जबकि सिर्फ नौ चिकित्सकों से ही काम चल रहा है। वहीं पूरे जिले में मात्र 2 फार्मासिस्ट ही हैं।
जिले में 17 पशु सेवा केंद्र हैं, जिनमें 17 के सापेक्ष 7 अधिकारी ही मौजूद हैं। जिले के अस्पतालों को 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की जरूरत है, जबकि 18 ही काम कर रहे हैं। स्टाफ की कमी के चलते विभाग के कार्यों में गति नहीं आ पा रही है। पशु विभाग में पशुओं के इलाज, गर्भाधान से लेकर पशुओं के टीकाकरण का कार्य तो होता है।
इसके साथ ही बकरी पालन, भेड़ पालन आदि योजनाओं के लिए भी कार्य करना पड़ता है। जिसमें पशुआें के इलाज में मुख्य भूमिका फार्मासिस्टों की होती हैं लेकिन मात्र दो ही फार्मासिस्ट होने के कारण डॉक्टरों को समस्या से जुझना पड़ता हैं।
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चित्रकूट। कार्यवाहक मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि सबसे अधिक समस्या फार्मसिस्टों की है। 13 में मात्र 2 ही फार्मासिस्ट हैं।
चित्रकूट। दुग्ध डेरी का कारोबार करने वाले योगेश जैन ने बताया कि सचल दल की गाड़ी के माध्यम से गांव- गांव पहुंचकर पशुओं का इलाज करना चाहिए। पिछले साल गांवों में लगाए गए पशु मेला से भी पशुपालकों को फायदा हुआ है।
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जिले में 17 पशु सेवा केंद्र हैं, जिनमें 17 के सापेक्ष 7 अधिकारी ही मौजूद हैं। जिले के अस्पतालों को 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की जरूरत है, जबकि 18 ही काम कर रहे हैं। स्टाफ की कमी के चलते विभाग के कार्यों में गति नहीं आ पा रही है। पशु विभाग में पशुओं के इलाज, गर्भाधान से लेकर पशुओं के टीकाकरण का कार्य तो होता है।
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इसके साथ ही बकरी पालन, भेड़ पालन आदि योजनाओं के लिए भी कार्य करना पड़ता है। जिसमें पशुआें के इलाज में मुख्य भूमिका फार्मासिस्टों की होती हैं लेकिन मात्र दो ही फार्मासिस्ट होने के कारण डॉक्टरों को समस्या से जुझना पड़ता हैं।
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चित्रकूट। कार्यवाहक मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि सबसे अधिक समस्या फार्मसिस्टों की है। 13 में मात्र 2 ही फार्मासिस्ट हैं।
चित्रकूट। दुग्ध डेरी का कारोबार करने वाले योगेश जैन ने बताया कि सचल दल की गाड़ी के माध्यम से गांव- गांव पहुंचकर पशुओं का इलाज करना चाहिए। पिछले साल गांवों में लगाए गए पशु मेला से भी पशुपालकों को फायदा हुआ है।