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‘हर भारतीय के मन में रामनाम की पोथी’

Chitrakoot Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ से जिले में आई श्रीराम वनगमन पथयात्रा
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समारोहपूर्वक मनाई गई श्रीराम के चित्रकूट आने की तिथि
चित्रकूट। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चित्रकूट आगमन की तिथि वैशाख शुक्ल द्वादशी महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में समारोहपूर्वक मनाई गई। मानवताकुलम लखनऊ के तत्वावधान में चित्रकूट आई श्रीराम वनगमन पथयात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि हर भारतीय के मन में रामनाम की पोथी है, इसलिए इसका मिटना असंभव है।
मुख्य अतिथि यात्रा संयोजक कृष्ण नारायण पांडे ने कहा कि यह प्रभु के चित्रकूट आगमन की प्रामाणिक तिथि है और इस तरह के आयोजनों से क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था और अनुराग के वातावरण का सृजन होगा। उन्होंने वाल्मीकि रामायण की प्रमाणिकता की भी चर्चा की। कहा कि रामायण और पुराणों में वर्णित तिथियों में साम्य देखने को मिलता है। इसलिए रामकथा रसिकों और पथ अन्वेषक विद्वान इसका गहराई से अध्ययन करें। राम पथ गमन यात्रा का उद्देश्य बताते हुए कहा कि रामकथा के प्रसंग स्थलों को चिह्नित, प्रमाणित और संरक्षित करना है कि भावी समाज उससे प्रेरणा ले सके। विकलांग विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि राम पथ के बारे में भले ही मत मतांतर हों किंतु प्रत्येक भारतीय आस्था और विश्वास के कारण अपने आसपास के स्थलों में भगवान राम का सजीव दर्शन पाता है और यही हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कृष्णबिहारी पांडे ने कहा कि राम चित्रकूट आगमन की इस सनातन तिथि से विवि का लगाव निरंतर गहरा होता जा रहा है। ऐसा लगता है कि श्रीराम ने इन साधु-संतों के स्वरूप में स्वयं पधारकर हमें यह तिथि मनाने की प्रेरणा दी है। चित्रकूट के महंत गोविंद दास ने मंदाकिनी नदी की दशा पर चिंता व्यक्त कर इसके संरक्षण का आह्वान किया। अयोध्या से आए गोपाल दास ने प्रभु राम की विभिन्न यात्राओं का वर्णन किया। यहीं के गंगाराम तिवारी ने राष्ट्रीय अस्तित्व में राम के आदर्श की आवश्यकता बताई। नेपाल के डा. ओमप्रकाश पांडे ने सलाह दी कि तथाकथित धर्मनिरपेक्षता से ऊपर उठकर हमें अपने सांस्कृतिक प्रतीकों को गौरव और सम्मान से सहेजकर रखना चाहिए। कार्यक्रम संयोजिका डा. प्रज्ञा मिश्रा ने रामरक्षा स्रोत का वाचन किया। रामखेलावन उर्फ राजा पांडे ने भजन गाया। डा. स्वर्णलता शर्मा ने तुलसी रामायण के प्रसंगों से राम वनगमन को लोक कल्याणकारी बताया। इस मौके पर प्रवेश विवरणिका का विमोचन किया गया। संचालन डा. वीरेंद्र कुमार व्यास ने किया।

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