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पुत्र तो गया बसपा में, अब पिता पर कयासों का दौर
Chitrakoot
Updated Mon, 06 May 2013 05:30 AM IST
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विकास श्रीवास्तव
चित्रकूट। सपा सांसद आरके पटेल के पुत्र सुनील पटेल ने बसपा का दामन थाम लिया है। इसके साथ ही राजनीतिक हलकों में इस सवाल पर तरह-तरह के कयास उड़ान भरने लगे हैं कि क्या सांसदजी भी निकट भविष्य में पाला बदल सकते हैं! यद्यपि इस सवाल पर सांसद दो टूक जवाब देते हैं कि मैं तो मुलायम सिंह का वफादार सिपाही हूं, लेकिन प्रकारांतर से और भी कुछ कह जाते हैं कि हर किसी को अपनी राजनीतिक धारा चुनने की पूरी आजादी है।
क्या यह भविष्य का संकेत है। सपा सांसद आरके पटेल के सुपुत्र सुनील पटेल के सपा से बसपा में जाने के बाद राजनीतिक हल्कों के साथ साथ आम जनमानस की जुबां पर यही सवाल है कि क्या सांसद आरके भी आने वाले समय में बसपा के खेमे में दिखाई देंगे। सवाल लाख टके का है, जाहिर है जवाब सभी जानना चाहते हैं।
सांसद आरके से पिछले दिनों हुई बातचीत में उन्होंने गोलमोल तरीके से इस बात को साफ किया था कि उनके लिए सभी रास्ते खुले हैं। बसपा से लेकर भाजपा तक में जाने के कयासों को उन्होंने यह कहकर न तो खंडन किया और न सहमति दी कि राजनीति में सब कुछ जायज है। गौरतलब है कि सांसद को पहले सपा ने जिले से आगामी लोकसभा के लिए टिकट दिया और बाद में उनका टिकट काटते हुए पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता पर भरोसा दिखाया।
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हालांकि सांसद के कट्टर समर्थक अब भी इस बात का दावा करते नजर आते हैं कि अंतिम रूप से तो आरके पटेल ही चुनाव लड़ेंगे। उनके साथ रहने वाले वरिष्ठ सपा नेता शक्तिप्रताप सिंह तोमर के कटाक्ष पर आज भी लोग चुटकी लेते हैं कि श्यामाचरण को प्लेटफार्म का टिकट मिला है, दिल्ली का टिकट तो आरके को ही मिलेगा। विभिन्न राजनीतिक मंचों से श्यामाचरण गुप्ता की परोक्ष रूप से आरके के खिलाफ ललकार भी इस अंदेशों को पुख्ता करती है कि दोनों राजनीतिक दिग्गजों के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं।
अब जब सांसद के पुत्र सुनील पटेल, जो अपने पिता की तरह ही सपा के उस हालात के भुक्तभोगी हैं, जिन्हें विधानसभा क्षेत्र कर्वी का टिकट मिला और फिर काट दिया गया। अब सदर विधायक वीर सिंह हैं। उनके बसपा की सदस्यता ले लेने से यह सवाल फिजां में तेजी से तैर रहा है कि सांसद भी क्या बसपा में जाने की तैयारी में हैं। हालांकि सांसद आरके पटेल और उनके समर्थक इस बात से इनकार कर रहे हैं। सांसद का कहना है कि हर व्यक्ति को अपनी राजनीतिक धारा चुनने का हक है, चाहे वह मेरा पुत्र ही क्यों न हो। मैं सपाई हूं और मुलायम सिंह का वफादार सिपाही।
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चित्रकूट। सपा सांसद आरके पटेल के पुत्र सुनील पटेल ने बसपा का दामन थाम लिया है। इसके साथ ही राजनीतिक हलकों में इस सवाल पर तरह-तरह के कयास उड़ान भरने लगे हैं कि क्या सांसदजी भी निकट भविष्य में पाला बदल सकते हैं! यद्यपि इस सवाल पर सांसद दो टूक जवाब देते हैं कि मैं तो मुलायम सिंह का वफादार सिपाही हूं, लेकिन प्रकारांतर से और भी कुछ कह जाते हैं कि हर किसी को अपनी राजनीतिक धारा चुनने की पूरी आजादी है।
क्या यह भविष्य का संकेत है। सपा सांसद आरके पटेल के सुपुत्र सुनील पटेल के सपा से बसपा में जाने के बाद राजनीतिक हल्कों के साथ साथ आम जनमानस की जुबां पर यही सवाल है कि क्या सांसद आरके भी आने वाले समय में बसपा के खेमे में दिखाई देंगे। सवाल लाख टके का है, जाहिर है जवाब सभी जानना चाहते हैं।
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सांसद आरके से पिछले दिनों हुई बातचीत में उन्होंने गोलमोल तरीके से इस बात को साफ किया था कि उनके लिए सभी रास्ते खुले हैं। बसपा से लेकर भाजपा तक में जाने के कयासों को उन्होंने यह कहकर न तो खंडन किया और न सहमति दी कि राजनीति में सब कुछ जायज है। गौरतलब है कि सांसद को पहले सपा ने जिले से आगामी लोकसभा के लिए टिकट दिया और बाद में उनका टिकट काटते हुए पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता पर भरोसा दिखाया।
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हालांकि सांसद के कट्टर समर्थक अब भी इस बात का दावा करते नजर आते हैं कि अंतिम रूप से तो आरके पटेल ही चुनाव लड़ेंगे। उनके साथ रहने वाले वरिष्ठ सपा नेता शक्तिप्रताप सिंह तोमर के कटाक्ष पर आज भी लोग चुटकी लेते हैं कि श्यामाचरण को प्लेटफार्म का टिकट मिला है, दिल्ली का टिकट तो आरके को ही मिलेगा। विभिन्न राजनीतिक मंचों से श्यामाचरण गुप्ता की परोक्ष रूप से आरके के खिलाफ ललकार भी इस अंदेशों को पुख्ता करती है कि दोनों राजनीतिक दिग्गजों के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं।
अब जब सांसद के पुत्र सुनील पटेल, जो अपने पिता की तरह ही सपा के उस हालात के भुक्तभोगी हैं, जिन्हें विधानसभा क्षेत्र कर्वी का टिकट मिला और फिर काट दिया गया। अब सदर विधायक वीर सिंह हैं। उनके बसपा की सदस्यता ले लेने से यह सवाल फिजां में तेजी से तैर रहा है कि सांसद भी क्या बसपा में जाने की तैयारी में हैं। हालांकि सांसद आरके पटेल और उनके समर्थक इस बात से इनकार कर रहे हैं। सांसद का कहना है कि हर व्यक्ति को अपनी राजनीतिक धारा चुनने का हक है, चाहे वह मेरा पुत्र ही क्यों न हो। मैं सपाई हूं और मुलायम सिंह का वफादार सिपाही।