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एक तरफ खाई दूसरी तरफ कुआं की कहावत हो रही चरितार्थ
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:15 PM IST
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डाकू और पुलिस के बीच पिस रहे ग्रामीण
-डाकुओं के आतंक और पुलिस को दबाव से पीड़ित है ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। पहाड़ों के आस पास बसे गांव के ग्रामीणों के लिए एक तरफ कुआं तो एक तरफ खाई की कहावत चरिततार्थ हो रही है। डाकू और पुलिस दोनों तरफ से उन्हें परेशान किया जा रहा है। डाकुओं की बात न मानने पर जान का खतरा और पुलिस जान जाए कि डाकूओं को शरण दी गई तो वह जेल भेज देती है। इस तरह से ग्रामीण दोनों के बीच पिस रहे हैं। हालांकि कुछ ग्रामीण अपने फायदे के लिए डाकु ओं को शरण देते हैं। जिनके कारण गांव के अन्य ग्रामीणों को सजा भुगतनी पड़ती है।
इस समय पाठा क्षेत्र के नागर गांव का मामला गर्म है। जिसमें ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ पुलिस बल ने अभद्रता कर मारपीट की है। जबकि पुलिस का आरोप है कि घेराबंदी के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया जिससे डाकू बबुली गैंग भाग निकाला। बहरहाल यह कोई नया मामला नहीं है। इसके पहले भी पाठा क्षेत्र व भरतकूप क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उनका आरोप रहा करता था कि पुलिस आए दिन डाकुओं के संरक्षण को लेकर उनके साथ मारपीट करते हैं। बिना जानकारी दिए घरों की तलाशी ली जाती है। महिलाओं के साथ मारपीट की जाती है।
कई ग्रामीणों ने दबी जुबान से बताया कि जंगल में रहना है तो डाकूओं की हर बात माननी पड़ती है। ऐसा न करने पर डाकू लाठी से पीट-पीट कर अधमरा कर देते हैं।वही पुलिस को जब इस बात की जानकारी हो जाती है तो वह जेल भेज देती है। जिससे बचने के लिए जंगलों के आस-पास बसे कई ग्रामीण अपना घर बार छोड़कर मानिकपुर में बस गए हैं।
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-डाकुओं के आतंक और पुलिस को दबाव से पीड़ित है ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। पहाड़ों के आस पास बसे गांव के ग्रामीणों के लिए एक तरफ कुआं तो एक तरफ खाई की कहावत चरिततार्थ हो रही है। डाकू और पुलिस दोनों तरफ से उन्हें परेशान किया जा रहा है। डाकुओं की बात न मानने पर जान का खतरा और पुलिस जान जाए कि डाकूओं को शरण दी गई तो वह जेल भेज देती है। इस तरह से ग्रामीण दोनों के बीच पिस रहे हैं। हालांकि कुछ ग्रामीण अपने फायदे के लिए डाकु ओं को शरण देते हैं। जिनके कारण गांव के अन्य ग्रामीणों को सजा भुगतनी पड़ती है।
इस समय पाठा क्षेत्र के नागर गांव का मामला गर्म है। जिसमें ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ पुलिस बल ने अभद्रता कर मारपीट की है। जबकि पुलिस का आरोप है कि घेराबंदी के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया जिससे डाकू बबुली गैंग भाग निकाला। बहरहाल यह कोई नया मामला नहीं है। इसके पहले भी पाठा क्षेत्र व भरतकूप क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उनका आरोप रहा करता था कि पुलिस आए दिन डाकुओं के संरक्षण को लेकर उनके साथ मारपीट करते हैं। बिना जानकारी दिए घरों की तलाशी ली जाती है। महिलाओं के साथ मारपीट की जाती है।
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कई ग्रामीणों ने दबी जुबान से बताया कि जंगल में रहना है तो डाकूओं की हर बात माननी पड़ती है। ऐसा न करने पर डाकू लाठी से पीट-पीट कर अधमरा कर देते हैं।वही पुलिस को जब इस बात की जानकारी हो जाती है तो वह जेल भेज देती है। जिससे बचने के लिए जंगलों के आस-पास बसे कई ग्रामीण अपना घर बार छोड़कर मानिकपुर में बस गए हैं।
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