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अन्ना जानवरों से परेशान किसान नहीं कर रहे जुताई बुआई
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:23 PM IST
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अन्ना जानवर जुताई बुआई में रोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। खरीफ की फसल की जुताई व बुआई कर रहे किसानों को अन्ना जानवरों की चिंता सताए जा रही है कि बीते साल की तरह तैयार फसल को इस बार भी कहीं अन्ना जानवर न खा जाए। जिससे परेशान कई किसान खरीफ की फसल की बुआई के साथ फसल की सुरक्षा की भी चिंता कर रहे हैं।
जिले में लगभग 28 हजार अन्ना मवेशी हैं। बीते साल किसानों ने अन्ना जानवरों से फसल को बचाने के लिए कई महीने आंदोलन किया था। जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया था कि अन्ना जानवरों के लिए अलग से गौशालाएं बनाई जाएगी लेकिन जमीन चिह्नित होने के बाद भी गौशालाएं नहीं बनाई गई। सूखा प्रभावित क्षेत्र में सरकार ने मवेशियों के लिए चारा और पानी के लिए चरही का इंतजाम किया था। इस बार फिर से बरसात आते ही जिले के पाठा क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर बरसात के मौसम में चारा खाने के लिए किसानों ने अन्ना जानवरों को छोड़ दिया है। जिससे किसान परेशान हैं।
----इनसेट
सरैंया(ब्यूरो)। मानिकपुर के किसान जुगनू तिवारी बताया कि पिछले साल खेत मे लगी गेहूं की फसल को जानवर चट कर गए थे। जिससे खेती करने की हिम्मत नहीं हो रही है। मारकुंडी के भोला द्विवेदी ने बताया कि पाठा क्षेत्र में अधिकतर लोग जानवर नहीं बांधते। जिससे किसानों का भारी नुकसान होता है। सरैंया के गोकरण प्रसाद, संकर्षण द्विवेदी, सुरेश त्रिपाठी, जानकीशरण व हीरालाल ने कहा कि अन्ना मवेशियों से बचने के लिए अभी से खेतों की रखवाली करने की योजना बनाई है। बुआई के बाद खेतों में परिवार का कोई न र्कोई सदस्य रखवाली करेगा। बीते साल अन्ना मवेशियों ने फसल को नुकसान पहुंचाया था।
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-इनसेट
चित्रकूट। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राम सिंह पटेल ने बताया कि अन्ना जानवरों की समस्या को लेकर कई बार आंदोलन किया गया। लेकिन अभी तक मात्र आश्वासन ही मिलते रहे। इस समस्या का स्थाई हल जरूरी है।
:- पाठा क्षेत्र में झुंड बनाकर घूम रहे जानवर
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। खरीफ की फसल की जुताई व बुआई कर रहे किसानों को अन्ना जानवरों की चिंता सताए जा रही है कि बीते साल की तरह तैयार फसल को इस बार भी कहीं अन्ना जानवर न खा जाए। जिससे परेशान कई किसान खरीफ की फसल की बुआई के साथ फसल की सुरक्षा की भी चिंता कर रहे हैं।
जिले में लगभग 28 हजार अन्ना मवेशी हैं। बीते साल किसानों ने अन्ना जानवरों से फसल को बचाने के लिए कई महीने आंदोलन किया था। जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया था कि अन्ना जानवरों के लिए अलग से गौशालाएं बनाई जाएगी लेकिन जमीन चिह्नित होने के बाद भी गौशालाएं नहीं बनाई गई। सूखा प्रभावित क्षेत्र में सरकार ने मवेशियों के लिए चारा और पानी के लिए चरही का इंतजाम किया था। इस बार फिर से बरसात आते ही जिले के पाठा क्षेत्र सहित अन्य स्थानों पर बरसात के मौसम में चारा खाने के लिए किसानों ने अन्ना जानवरों को छोड़ दिया है। जिससे किसान परेशान हैं।
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----इनसेट
सरैंया(ब्यूरो)। मानिकपुर के किसान जुगनू तिवारी बताया कि पिछले साल खेत मे लगी गेहूं की फसल को जानवर चट कर गए थे। जिससे खेती करने की हिम्मत नहीं हो रही है। मारकुंडी के भोला द्विवेदी ने बताया कि पाठा क्षेत्र में अधिकतर लोग जानवर नहीं बांधते। जिससे किसानों का भारी नुकसान होता है। सरैंया के गोकरण प्रसाद, संकर्षण द्विवेदी, सुरेश त्रिपाठी, जानकीशरण व हीरालाल ने कहा कि अन्ना मवेशियों से बचने के लिए अभी से खेतों की रखवाली करने की योजना बनाई है। बुआई के बाद खेतों में परिवार का कोई न र्कोई सदस्य रखवाली करेगा। बीते साल अन्ना मवेशियों ने फसल को नुकसान पहुंचाया था।
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चित्रकूट। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राम सिंह पटेल ने बताया कि अन्ना जानवरों की समस्या को लेकर कई बार आंदोलन किया गया। लेकिन अभी तक मात्र आश्वासन ही मिलते रहे। इस समस्या का स्थाई हल जरूरी है।
:- पाठा क्षेत्र में झुंड बनाकर घूम रहे जानवर