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महिलाओं का धरना
ब्यूरो अमर उजाला चंदौली
Updated Tue, 31 Mar 2015 01:29 AM IST
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वनाधिकार कानून को लागू करने के लिए आदिवासी महिलाओं ने सोमवार की दोपहर
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एकजुट होकर ताकत दिखाई। भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पर जुटी महिलाओं ने
प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
वहां पहुंचे सीओ सदर राजेश कुमार व नायब तहसील गुलाब चंद्रा भी महिलाओं के तेवर के आगे टिक नहीं पाए। अंत में डीएम एनके सिंह व एसपी मुनिराज जी ने कलेक्ट्रेट में महिलाओं से मिलकर उनकी समस्या सुनी और निवारण के लिए 25 दिन का वक्त मांगा।
इस बीच दो घंटे तक धरना चलता रहा।
आदिवासी महिलाओं का कहना था कि गोंड, खरवार, चेरो, पनिका सहित अन्य जातियों को जनजाति का दर्जा व लोगों के ऊपर वन विभाग द्वारा फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं।
इसे अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। कहा कि वनाधिकार कानून 2006 के तहत जंगलों में निवास करने वाले लोगों के लिए सरकार ने प्रावधान बनाए हैं, लेकिन वह अमल में नहीं लाया जा रहा है। यह सीधे तौर पर जनपद के अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता है।
संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची का प्रभाव जनपद में तत्काल लागू किया जाए, ताकि गरीबों को इसका लाभ मिल सके। दबंगों द्वारा आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
वहीं पुलिस अतिक्रमण के नाम पर हमारे घरों को उजाड़ रही है। डीएम व एसपी ने महिलाओं समस्याओं को सुना और आश्वस्त किया कि जल्द ही आदिवासियों की समस्या का समाधान किया जाएगा।
इस मौके पर बिंदा देवी, रमाशंकर, शिवमुनि, धनपत्ती, कैलाशी, रामनाथ आदि उपस्थित रहे।
इनसेट-------
पुलिस के खिलाफ रहा गुस्सा
चंदौली। सोमवार को कलेक्ट्रेट पर जुटी आदिवासी महिलाएं किसी भी अधिकारी की कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी। उनके अंदर सदर कोतवाली पुलिस के खिलाफ गुस्सा था।
क्योंकि अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत आदिवासी रविवार की रात कलेक्ट्रेट के बाहर खाना पका रहे थे। इसी बीच पुलिस पहुंची और आदिवासियों को खदेड़ना शुरू कर दिया।
पुलिस ने पुरुषों के साथ ही महिलाओं संग भी अभद्रता की। आदिवासी बिंदा देवी ने कहा कि पुलिस द्वारा जिस प्रकार से रात्रि में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया वह शोभनीय नहीं है।
वहां पहुंचे सीओ सदर राजेश कुमार व नायब तहसील गुलाब चंद्रा भी महिलाओं के तेवर के आगे टिक नहीं पाए। अंत में डीएम एनके सिंह व एसपी मुनिराज जी ने कलेक्ट्रेट में महिलाओं से मिलकर उनकी समस्या सुनी और निवारण के लिए 25 दिन का वक्त मांगा।
इस बीच दो घंटे तक धरना चलता रहा।
आदिवासी महिलाओं का कहना था कि गोंड, खरवार, चेरो, पनिका सहित अन्य जातियों को जनजाति का दर्जा व लोगों के ऊपर वन विभाग द्वारा फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं।
इसे अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे। कहा कि वनाधिकार कानून 2006 के तहत जंगलों में निवास करने वाले लोगों के लिए सरकार ने प्रावधान बनाए हैं, लेकिन वह अमल में नहीं लाया जा रहा है। यह सीधे तौर पर जनपद के अधिकारियों की लापरवाही व उदासीनता है।
संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची का प्रभाव जनपद में तत्काल लागू किया जाए, ताकि गरीबों को इसका लाभ मिल सके। दबंगों द्वारा आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
वहीं पुलिस अतिक्रमण के नाम पर हमारे घरों को उजाड़ रही है। डीएम व एसपी ने महिलाओं समस्याओं को सुना और आश्वस्त किया कि जल्द ही आदिवासियों की समस्या का समाधान किया जाएगा।
इस मौके पर बिंदा देवी, रमाशंकर, शिवमुनि, धनपत्ती, कैलाशी, रामनाथ आदि उपस्थित रहे।
इनसेट-------
पुलिस के खिलाफ रहा गुस्सा
चंदौली। सोमवार को कलेक्ट्रेट पर जुटी आदिवासी महिलाएं किसी भी अधिकारी की कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी। उनके अंदर सदर कोतवाली पुलिस के खिलाफ गुस्सा था।
क्योंकि अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत आदिवासी रविवार की रात कलेक्ट्रेट के बाहर खाना पका रहे थे। इसी बीच पुलिस पहुंची और आदिवासियों को खदेड़ना शुरू कर दिया।
पुलिस ने पुरुषों के साथ ही महिलाओं संग भी अभद्रता की। आदिवासी बिंदा देवी ने कहा कि पुलिस द्वारा जिस प्रकार से रात्रि में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया वह शोभनीय नहीं है।