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निर्जल व्रत रखकर संतान के दीर्घायु की कामना की
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पीडीडीयू नगर। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बृहस्पतिवार को पूरी श्रद्धा के साथ जीवित्पुत्रिका पर्व मनाया गया। इस दौरान महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर संतान के दीर्घायु की कामना की। व्रती महिलाओं ने परंपरा के अनुसार व्रत से जुड़ी कहानियां भी सुनीं। इस दौरान पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
इलिया संवाददाता के अनुसार पुत्र के दीर्घायु की कामना के लिए महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। शाम होते ही व्रती महिलाओं की भीड़ इलिया कस्बा के काली मंदिर, सैदूपुर के हनुमान मंदिर सहित आसपास के गांव के मंदिरों पर इकट्ठा हो गई। इस दौरान व्रती महिलाओं ने धन-समृद्धि व संतान की लंबी आयु की कामना के लिए विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
बबुरी संवाददाता के अनुसार कस्बा स्थित पोखरे पर माताओं ने अपने संतान की लंबी आयु की कामना को लेकर पूजन-अर्चन किया। नहाय खाय व ओठगन के साथ पर्व की शुरूआत हुई। विधान के अनुसार इस वर्ष व्रती महिलाओं ने 33 घंटे का निर्जल व्रत रखा। जानकारों के अनुसार इस वर्ष 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद खर-ज्यूतिया लगा है। इसमें विधान है कि व्रत के दौरान व्रती महिलाएं एक तिनका तक भी मुख से नहीं लगाती हैं। प्रदेश के साथ मध्यप्रदेश, बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत पड़ोसी देश नेपाल के मिथिला और थरुहट में भी पर्व बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। छठ महापर्व की तरह यह व्रत भी सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इसके अलावा चकिया स्थित काली मंदिर, पड़ाव में गंगा नदी के किनारे, नियामताबाद में क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों व तालाबों के किनारे व्रती महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया।
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इलिया संवाददाता के अनुसार पुत्र के दीर्घायु की कामना के लिए महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। शाम होते ही व्रती महिलाओं की भीड़ इलिया कस्बा के काली मंदिर, सैदूपुर के हनुमान मंदिर सहित आसपास के गांव के मंदिरों पर इकट्ठा हो गई। इस दौरान व्रती महिलाओं ने धन-समृद्धि व संतान की लंबी आयु की कामना के लिए विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
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बबुरी संवाददाता के अनुसार कस्बा स्थित पोखरे पर माताओं ने अपने संतान की लंबी आयु की कामना को लेकर पूजन-अर्चन किया। नहाय खाय व ओठगन के साथ पर्व की शुरूआत हुई। विधान के अनुसार इस वर्ष व्रती महिलाओं ने 33 घंटे का निर्जल व्रत रखा। जानकारों के अनुसार इस वर्ष 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद खर-ज्यूतिया लगा है। इसमें विधान है कि व्रत के दौरान व्रती महिलाएं एक तिनका तक भी मुख से नहीं लगाती हैं। प्रदेश के साथ मध्यप्रदेश, बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत पड़ोसी देश नेपाल के मिथिला और थरुहट में भी पर्व बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। छठ महापर्व की तरह यह व्रत भी सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इसके अलावा चकिया स्थित काली मंदिर, पड़ाव में गंगा नदी के किनारे, नियामताबाद में क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों व तालाबों के किनारे व्रती महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया।
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