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पिता से मिली सीख के सहारे आगे बढ़ रहे हैं हम
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पीडीडीयू नगर। पिता न सिर्फ जन्मदाता होता है बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की सीख भी देता है। हर किसी के जीवन में पिता की छाप जरूर दिखती है। अपने पूर्वजों को याद करने का पर्व पितृपक्ष की शुरूआत हो चुकी है। लोग पूर्वजों की याद में पिंडदान, जलदान कर रहे हैं। जिले के गणमान्य लोग बता रहे हैं कि वे पिता को कैसे याद करते हैं।
मेरे पिता लोकनाथ सिंह न सिर्फ स्वतंत्रताम सेनानी बल्कि अच्छे जनप्रतिनिधि रहे। स्वतंत्रता संग्राम के बाद विधायक बनकर उन्होंने क्षेत्र की सेवा की। वे क्षेत्र में शिक्षा का उजियारा फैलाना चाहते थे। यही कारण है कि लोकनाथ सिंह महाविद्यालय की स्थापना हुई। आज भी उनकी इमानदारी और सच्चाई हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। वे कहते थे कि इमानदारी और सच्चाई का कोई मोल नहीं है। उनकी सच्चाई की रोशनी आज भी गहरे अंधियारे में भी मुझे रोशनी दिखाती है। इस रोशनी के सलारे लगातार आगे बढ़ रहा हूं। उनकी इच्छानुसार इलाके के युवाओं को शिक्षा के सहारे भविष्य उज्ज्वल करना चाहता हूं।
धनंजय सिंह
प्रबंधक लोकनाथ सिंह महाविद्यालय रामगढ़, चहनियां
मेरे पिता रामजी पांडेय साधारण किसान थे लेकिन अनुशासन के प्रति बहुत सख्त थे। शिक्षा और सेहत के प्रति जागरूक थे। उन्होंने हम लोगों में शिक्षा की अलख जगाई। आज जो हूं उनकी बदौलत हूं। वे कहते थे कि शिक्षा ऐसी चीज है जिसे कोई चुरा नहीं सकता है। शिक्षा कमाई के लिए नहीं बल्कि ज्ञान के लिए होनी चाहिए। ज्ञान बढ़ेगा तो हर क्षेत्र में सफलता मिलेेगी। आज उनकी बातें अक्षरस: सही साबित होती दिखती है। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए अपने बच्चों को और परिचितों को भी मैं शिक्षा के महत्व को समझाता हूं। शिक्षा के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। अनुशासित शिक्षित व्यक्ति कभी असफल नहीं हो सकता।
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रमाकांत पांडेय
प्रधानाध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बल्लीपुर पलिया, चहनियां
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मेरे पिता लोकनाथ सिंह न सिर्फ स्वतंत्रताम सेनानी बल्कि अच्छे जनप्रतिनिधि रहे। स्वतंत्रता संग्राम के बाद विधायक बनकर उन्होंने क्षेत्र की सेवा की। वे क्षेत्र में शिक्षा का उजियारा फैलाना चाहते थे। यही कारण है कि लोकनाथ सिंह महाविद्यालय की स्थापना हुई। आज भी उनकी इमानदारी और सच्चाई हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। वे कहते थे कि इमानदारी और सच्चाई का कोई मोल नहीं है। उनकी सच्चाई की रोशनी आज भी गहरे अंधियारे में भी मुझे रोशनी दिखाती है। इस रोशनी के सलारे लगातार आगे बढ़ रहा हूं। उनकी इच्छानुसार इलाके के युवाओं को शिक्षा के सहारे भविष्य उज्ज्वल करना चाहता हूं।
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धनंजय सिंह
प्रबंधक लोकनाथ सिंह महाविद्यालय रामगढ़, चहनियां
मेरे पिता रामजी पांडेय साधारण किसान थे लेकिन अनुशासन के प्रति बहुत सख्त थे। शिक्षा और सेहत के प्रति जागरूक थे। उन्होंने हम लोगों में शिक्षा की अलख जगाई। आज जो हूं उनकी बदौलत हूं। वे कहते थे कि शिक्षा ऐसी चीज है जिसे कोई चुरा नहीं सकता है। शिक्षा कमाई के लिए नहीं बल्कि ज्ञान के लिए होनी चाहिए। ज्ञान बढ़ेगा तो हर क्षेत्र में सफलता मिलेेगी। आज उनकी बातें अक्षरस: सही साबित होती दिखती है। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए अपने बच्चों को और परिचितों को भी मैं शिक्षा के महत्व को समझाता हूं। शिक्षा के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। अनुशासित शिक्षित व्यक्ति कभी असफल नहीं हो सकता।
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रमाकांत पांडेय
प्रधानाध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बल्लीपुर पलिया, चहनियां