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Chandauli News: बिना पंजीकरण चल रहा था अस्पताल, ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत से मचा हड़कंप

Tue, 09 Jun 2026 01:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 01:52 AM IST
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Troubled by pressure and ill intentions towards his daughter-in-law, the loco pilot had his accountant murdered.
चकिया  नगर के वार्ड नंबर 7 बुद्ध नगर कालोनी स्थित एक निजी अस्पताल को सीज करते स्वास्थ्य विभाग क - फोटो : योगेश कुशवाहा
चकिया। नगर के बुद्ध नगर कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत के मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद सोमवार को स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और जांच के दौरान अस्पताल को अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर उसे सील कर दिया। वहीं मृतका के परिजनों ने अस्पताल संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। मामला चकिया नगर के वार्ड नंबर सात बुद्ध नगर कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल का है, जहां रविवार को इलाज के दौरान 22 वर्षीय विनीता पासवान की मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। बिहार के कैमूर जिले के चांद थानाक्षेत्र स्थित लाहोपाकड़ गांव निवासी दीपक पासवान अपनी गर्भवती पत्नी विनीता पासवान को प्रसव पीड़ा होने पर छह जून को चकिया स्थित संयुक्त चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। जहां चिकित्सकों ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। पति दीपक पासवान ने आरोप लगाया कि कि इसी दौरान उन्हें एक निजी अस्पताल के दलाल ने अपने झांसे में ले लिया और बेहतर इलाज का भरोसा देकर नगर स्थित निजी अस्पताल पहुंचा दिया। आरोप है कि अस्पताल में मोटी रकम लेकर प्रसूता का ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार प्रसव के अगले दिन प्रसूता की हालत अचानक बिगड़ने लगी लेकिन अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। आरोप लगाया गया कि अस्पताल में मौजूद अप्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी ने आनन-फानन में कई इंजेक्शन लगाए, जिसके बाद उसकी स्थिति और गंभीर हो गई तथा कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल कर्मी घबरा गए और प्रसूता को अपने वाहन से वाराणसी के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां पहुंचने के बाद अस्पताल कर्मी उन्हें छोड़कर फरार हो गए। बाद में परिजन किसी तरह शव को लेकर वापस चकिया पहुंचे। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई। नोडल अधिकारी डॉ. संजय सिंह और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. विकास सिन्हा के नेतृत्व में टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच शुरू की। जांच के दौरान अस्पताल के अभिलेखों और दस्तावेजों की पड़ताल की गई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। टीम को पता चला कि अस्पताल का पूर्व पंजीकरण पिछले वर्ष अप्रैल माह में ही निरस्त हो चुका था। इसके बावजूद अस्पताल संचालक द्वारा न तो दोबारा पंजीकरण कराया गया और न ही संचालन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई। जांच टीम ने पाया कि बिना वैध पंजीकरण और बिना योग्य चिकित्सक के अस्पताल में इलाज और ऑपरेशन जैसी चिकित्सीय सेवाएं दी जा रही थीं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. विकास सिन्हा ने बताया कि अस्पताल संचालक कोई वैध पंजीकरण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई है। कोतवाल अर्जुन सिंह ने बताया कि मृतका के परिजनों द्वारा तहरीर प्राप्त हुई है। मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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