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ग्रीन हाउस क्लब ने चलाया चिपको आंदोलन, काटे गए पेड़ों को दी श्रद्धांजलि
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पीडीडीयू नगर। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर ग्रीन हाउस क्लब की ओर से सरेसर वन क्षेत्र में चिपको आंदोलन चलाया गया। इस मौके पर वनक्षेत्र में काटे गए पेड़ों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उन्हें गले से लगाया गया। इस कार्यक्रम में सरेसर और नसीरपुर के ग्रामीणों ने भी प्रतिभाग किया।
रविवार की सुबह नौ बजे संस्था के सदस्य सरेसर वन क्षेत्र में पहुंचे। यहां ग्रामीणों के साथ कटे पेड़ों को माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्था के सदस्यों ने क्षेत्र में मौजूद पेड़ों से चिपक कर उन्हें कटने से बचाने का संकल्प लिया। इस मौके पर संस्था के सदस्यों ने कहा कि शहर का सबसे हरा भरा क्षेत्र माने जाने वाले सरेसर में लगातार पेड़ों को काटने की वजह से गौरैया और कौओं का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान से आने वाली पीढ़ियों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। कहा कि सरेसर और नसीरपुर में राष्ट्रीय पक्षी मोर की बहुलता है। इसके अलावा गौरैया पेडुकी, चरखी, कबूतर, चकवा, उल्लू कौआ, मैना इत्यादि देशज क्षेत्रों की भरमार होने के साथ ही साइबेरियन पक्षी भी सर्दियों के मौसम में आते हैं। बावजूद इसके संरक्षित क्षेत्र व अनुकूल सुरक्षित माहौल न मिलने की वजह से उनका ठहराव क्षेत्र में स्थायी रूप से नहीं हो पा रहा है। इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी को पत्रक सौंप पर नसीरपुर सरेसर वन क्षेत्र को पक्षी विहार का रूप देकर, व्यवस्थित पर्यटन स्थली के रूप में विकसित करने की मांग की गई। कार्यक्रम सतीशचंद्र पाठक, बेचन प्रसाद केसरी, संजय कुमार जायसवाल, रंजीत भट्टाचार्य, अनिल धवन, मदन शर्मा, डॉ. उमेश चंद्र, जयप्रकाश शर्मा, शीतल यादव रहे। संचालन पवन तिवारी ने किया।
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रविवार की सुबह नौ बजे संस्था के सदस्य सरेसर वन क्षेत्र में पहुंचे। यहां ग्रामीणों के साथ कटे पेड़ों को माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्था के सदस्यों ने क्षेत्र में मौजूद पेड़ों से चिपक कर उन्हें कटने से बचाने का संकल्प लिया। इस मौके पर संस्था के सदस्यों ने कहा कि शहर का सबसे हरा भरा क्षेत्र माने जाने वाले सरेसर में लगातार पेड़ों को काटने की वजह से गौरैया और कौओं का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान से आने वाली पीढ़ियों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा। कहा कि सरेसर और नसीरपुर में राष्ट्रीय पक्षी मोर की बहुलता है। इसके अलावा गौरैया पेडुकी, चरखी, कबूतर, चकवा, उल्लू कौआ, मैना इत्यादि देशज क्षेत्रों की भरमार होने के साथ ही साइबेरियन पक्षी भी सर्दियों के मौसम में आते हैं। बावजूद इसके संरक्षित क्षेत्र व अनुकूल सुरक्षित माहौल न मिलने की वजह से उनका ठहराव क्षेत्र में स्थायी रूप से नहीं हो पा रहा है। इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी को पत्रक सौंप पर नसीरपुर सरेसर वन क्षेत्र को पक्षी विहार का रूप देकर, व्यवस्थित पर्यटन स्थली के रूप में विकसित करने की मांग की गई। कार्यक्रम सतीशचंद्र पाठक, बेचन प्रसाद केसरी, संजय कुमार जायसवाल, रंजीत भट्टाचार्य, अनिल धवन, मदन शर्मा, डॉ. उमेश चंद्र, जयप्रकाश शर्मा, शीतल यादव रहे। संचालन पवन तिवारी ने किया।
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