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कहीं नहीं मिली सहायता, उपर वाले के सहारे रास्ता नाप रहे श्रमिक

Tue, 19 May 2020 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 10:30 PM IST
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There was no help anywhere, workers are measuring the way with the help of the above
पीडीडीयू नगर से पैदल ही पत्नी रेशमा व बच्चों के साथ अपने घर गया को जाता जितेंद्र। - फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर। लॉकडाउन सबसे खराब स्थिति मजदूरों की है। कोई सहायता नहीं मिली तो मजदूर पैदल ही घरों के लिए चलने को मजबूर हैं। खाने को पैसे नहीं हैं, आगे का कोई ठिकाना नहीं है, ऐसे में असहाय होकर प्रवासी श्रमिक पैदल ही घर के लिए चल दिये। पैदल चल रहे श्रमिकों ने मुंबई की स्थिति भयावह बताई।
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बिहार के गया जिले के निवासी जितेन्द्र अपनी पत्नी रेशमा, पांच वर्षीय पुत्री सौम्या, तीन वर्षीय पुत्र जैश के साथ मुंबई से पैदल घर के लिए जा रहे हैं। बताया कि पिछले दस वर्षों से वह मुंबई में रहकर मजदूरी करते रहे। लॉकडाउन लागू होने के बाद काम बंद हो गया और वे पैसे पैसे के लिए मोहताज हो गए। मकान मालिक ने एक माह तो बर्दाश्त किया लेकिन इस माह धमकी दी कि यदि किराया नहीं देने पर घर से निकाल दिया। यहां तक कि बर्तन सहित अन्य कपड़े भी रख लिए। किसी तरह पैदल चलते हुए यहां तक पहुंचे। गया के टेकारी निवासी आनंदी रमनी छह माह पहले मजदूरी के लिए मुंबई गए थे। अच्छी कमाई हो रही थी, घर पैसे भेज रहे थे लेकिन लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया और वे पैसे पैसे के लिए मोहताज हो गए। घर से पैसे मंगाकर किसी तरह काम चलाया। लॉकडाउन में कुछ छूट मिलने के बाद घर वापसी के लिए आवेदन किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में पैदल ही घर चलना मजबूरी हो गई। बिहार के गया जिले के मानपुर निवासी दीपक साव ने बताया कि पांच माह पहले मुंबई कमाने गए थे। दैनिक मजदूरी कर रहे थे। इसीबीच लॉकडाउन लागू हो गया। एक माह तक एक कमरे में बंद रहा। इसमें पूरी कमाई खत्म हो गई। कई दिन तक विभिन्न संस्थाओं की ओर से मिलने वाले खाने पर निर्भर रहा। दूसरी तरफ मुंबई में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में डर लगने लगा। कोई रास्ता न देख भगवान का नाम लेकर पैदल ही घर के लिए चल दिए। घर पहुंच जाएंगे तो कम से कम अपनों के बीच रहने का एहसास तो होगा।
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