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1971 में बांग्लादेश और अब पीओके के लिए हो सकता है युद्ध : कैप्टन बालाचरण
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पीडीडीयू नगर। भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध में भारतीय थल सेना की ओर से देश के पूर्वी छोर पर तैनात नगर निवासी रिटायर्ड कैप्टन बालाचरण ने कहा कि 1971 का युद्ध बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए था। वहां की जनता अलग बांग्लादेश की मांग कर रही थी। पाकिस्तान के मुसलमानों को हटाना चाहती थी। इसलिए युद्ध हुआ। इस बार भी भारत की जनता पीओके मांग रही है। इसलिए हो सकता है कि इस बार का युद्ध पीओके के लिए हो।
उन्होंने बताया कि 6-7 मई की रात पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक हुआ है। यह युद्ध नहीं है। युद्ध का मतलब यह होता है कि हमले के बाद दोनों तरफ की सेनाएं आमने-सामने हो जाएं। 24 घंटे गोली-बारूद चलने लगे। अभी यह स्थिति नहीं है। पाकिस्तान ने अभी उस तरीके से जवाब नहीं दिया है। उन्होंने 1971 के युद्ध के समय के ब्लैक आउट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय शहरों में बिजली होती थी, गांवों में तो ढिबरी आदि होती थी। उस दौरान लोगों को ब्लैक आउट के बारे में जागरूक किया गया था। कहा गया था कि दुश्मन देश का कोई विमान प्रकाश आदि देखकर रेकी कर हमले की तैयारी कर रहा हो तो उस समय सायरन बजते ही बिजली के बल्ब के अलावा गांव में जलने वाली ढिबरी तक को बुझा देना था। लोगों ने ऐसा किया। कैप्टन बालाचरण ने बताया कि 1971 का युद्ध 3 दिसंबर से 17 दिसंबर तक चला था। उस समय डिजिटल युग नहीं था। इस वजह से छुट्टी पर आए जवानों को तार भेजकर आने का बुलावा दिया जाता था। जो कभी दो महीने तो कभी तीन महीने बाद उनको मिलता था। आज तो एक सेकेंड में उनके व्हाट्सएस पर मैसेज आ जाता है और वे अलर्ट हो जाते हैं। जैसे इस एयरस्ट्राइक के बाद जवानों की छुट्टियां समाप्त कर दी गई हैं। जवान तुरंत देश की रक्षा के लिए चल पड़े हैं।
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उन्होंने बताया कि 6-7 मई की रात पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक हुआ है। यह युद्ध नहीं है। युद्ध का मतलब यह होता है कि हमले के बाद दोनों तरफ की सेनाएं आमने-सामने हो जाएं। 24 घंटे गोली-बारूद चलने लगे। अभी यह स्थिति नहीं है। पाकिस्तान ने अभी उस तरीके से जवाब नहीं दिया है। उन्होंने 1971 के युद्ध के समय के ब्लैक आउट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय शहरों में बिजली होती थी, गांवों में तो ढिबरी आदि होती थी। उस दौरान लोगों को ब्लैक आउट के बारे में जागरूक किया गया था। कहा गया था कि दुश्मन देश का कोई विमान प्रकाश आदि देखकर रेकी कर हमले की तैयारी कर रहा हो तो उस समय सायरन बजते ही बिजली के बल्ब के अलावा गांव में जलने वाली ढिबरी तक को बुझा देना था। लोगों ने ऐसा किया। कैप्टन बालाचरण ने बताया कि 1971 का युद्ध 3 दिसंबर से 17 दिसंबर तक चला था। उस समय डिजिटल युग नहीं था। इस वजह से छुट्टी पर आए जवानों को तार भेजकर आने का बुलावा दिया जाता था। जो कभी दो महीने तो कभी तीन महीने बाद उनको मिलता था। आज तो एक सेकेंड में उनके व्हाट्सएस पर मैसेज आ जाता है और वे अलर्ट हो जाते हैं। जैसे इस एयरस्ट्राइक के बाद जवानों की छुट्टियां समाप्त कर दी गई हैं। जवान तुरंत देश की रक्षा के लिए चल पड़े हैं।
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