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Chandauli News: सिक्स लेन की भेंट चढ़ जाएगा शेरशाह सूरी का बनवाया कुआं

Fri, 31 May 2024 04:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2024 04:44 AM IST
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The well built by Shershah Suri will be sacrificed for six lanes.
पीडीडीयू नगर। शेरशाह सूरी ने अपने शासन काल (1540 से 1545) में कोलकाता से लाहौर तक सड़क बनवाई थी, जिसे जीटी रोड (ग्रैंड ट्रंक रोड) के नाम से जाना जाता है। सड़क के किनारे पेड़ लगवावाने के साथ जगह-जगह कुएं और तालाब खोदवाए गए थे। नगर में जीटी रोड के किनारे सात कुएं खोदवाए गए थे। इनमें छह या तो बेपानी हो चुके हैं या उन्हें ढक दिया गया है। अंतिम कुआं भी सिक्स लेन की भेंट चढ़ जाएगा। नई बस्ती स्थित कैलाशपुरी मोड के समीप का सातवां कुआं अभी भी प्रयोग में लाया जा रहा है। इसका पानी अभी भी आसपास के होटल, चाय-पान आदि के दुकानदार उपयोग कर रहे हैं। अब यह कुआं सिक्स लेन की जद में आ चुका है। शीघ्र ही इसको सड़क बनाने के लिए पाट दिया जाएगा। इससे करीब साढ़े चार सौ साल पुराना यह कुआं भी लोगों की लोगों की स्मृति में सिमटकर रह जाएगा। शेरशाह सूरी ने अपने शासनकाल में ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण करवाकर यातायात की सुगम व्यवस्था की थी। उसके द्वारा बनाई गई यह रोड बांग्लादेश से होती हुई दिल्ली और वहां से काबुल तक जाती थी। रोड का सफ़र आरामदायक बनाने के लिए शेरशाह सूरी ने कई जगहों पर कुंए, मस्जिद और विश्रामगृहों का निर्माण भी करवाया था। नगर में जीटी रोड के किनारे वर्तमान चंदासी में एक, नई बस्ती में दो के साथ नई सट्टी, परमार कटरा, रेलवे के वीआईपी गेट व अलीनगर बस स्टैंड के पास कुआं खोदवाया गया था। इनमें चार कुओं को पूरी तरह ढंक दिया गया है जबकि नई बस्ती में एक और अलीनगर बस स्टैंड के पास के कुएं में पानी बचा है। अलीनगर के कुएं का पानी प्रयोग के लायक नहीं बचा है जबकि नई बस्ती के कुएं के पानी को लोग अभी भी प्रयोग में ला रहे हैं। यही बचा कुआं सिक्स लेन की भेंट चढ़ने वाला है। ग्रांड ट्रंक रोड बहुत पुरानी है। प्राचीन काल में इसे उत्तरापथ कहा जाता था। यह गंगा के किनारे बसे नगरों को, पंजाब से जोड़ते हुए ख़ैबर दर्रा पार करती हुई अफ़ग़ानिस्तान के केंद्र तक जाती थी। मौर्यकाल में बौद्ध धर्म का प्रसार इसी उत्तरापथ के माध्यम से गंधार तक हुआ। यह मार्ग सदियों से इस्तेमाल होता रहा लेकिन सोलहवीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी ने इसे पक्का करवाया था। उसने दूरी मापने के लिए जगह-जगह पत्थर लगाने के साथ छायादार पेड़ लगवाए, राहगीरों के लिए सरायें बनवाईं और चुंगी की व्यवस्था की थी।
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