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Chandauli News: तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, 65.36 मीटर पर पहुंचा
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चहनिया। बलुआ स्थित गंगा नदी के जलस्तर में बृहस्पतिवार को 72 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर 3 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रह है। बुधवार को जलस्तर 64.64 मीटर पर था। बृहस्पतिवार को बढ़कर 65.36 मीटर पर पहुंच गया। उधर, गंगा में पानी बढ़ने से नदी के तटवर्ती इलाकों के किसानों व ग्रामीणों में बाढ़ की आंशका सताने लगी है। बाढ़ को लेकर से उनकी बेचैनी बढ़ने लगी है।
गंगा के जलस्तर ने तट पर बने आरती के मंच को भी चपेट में ले लिया है। गंगा सेवा समिति के सदस्य मंच हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले गए। गंगा नदी के तटवर्तीय इलाकों के किसानों व ग्रामीणों में बेचैनी दिखने लगी है। गंगा के तटवर्ती गांव भूपौली, डेरवा, महड़ौरा, कांवर, पकड़ी, महुअरिया, विशुपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ, डेरवाकला, महुअर कला, हरधन जुड़ा, गंगापुर, पुरा विजयी, पुरागणेन, चकरा, हरधनजुड़ा, सोनबरसा, टांडाकला, महमदपुर, सरौली के लोगों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। इसी तरह से तीरगावा, हसनपुर, बड़गांवा, नादी निधौरा, सहेपुर आदि तटवर्तीय गांवों के किसानों व ग्रामीणों की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन पूर्व में बाढ़ के दौरान गंगा नदी में समाहित हो चुकी है। इस बार फिर गंगा नदी में लगातार पानी बढ़ने से तटवर्तीय गांरों के किसानों को उपजाऊ भूमि के कटान की चिंता सताने लगी है। बाढ़ के कारण किसानों द्वारा खेतों में बोई गई सैकड़ों एकड़ फसलें, सब्जियां, ज्वार, बाजरा, अरहर एवं धान की रोपी गई फसलें और पशुओं का हरा चारा बाढ़ के पानी में डूबकर बर्वाद हो जाती हैं। पशुपालकों को पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो जाती है। घाट के किनारे पर झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को विशैले जानवरो का हमेशा खतरा बना रहता है । बढ़ते जलस्तर को लेकर के खेतों में लगी फसलें पानी के कारण बर्बाद हो जाती है।
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गंगा के जलस्तर ने तट पर बने आरती के मंच को भी चपेट में ले लिया है। गंगा सेवा समिति के सदस्य मंच हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले गए। गंगा नदी के तटवर्तीय इलाकों के किसानों व ग्रामीणों में बेचैनी दिखने लगी है। गंगा के तटवर्ती गांव भूपौली, डेरवा, महड़ौरा, कांवर, पकड़ी, महुअरिया, विशुपुर, महुआरी खास, सराय, बलुआ, डेरवाकला, महुअर कला, हरधन जुड़ा, गंगापुर, पुरा विजयी, पुरागणेन, चकरा, हरधनजुड़ा, सोनबरसा, टांडाकला, महमदपुर, सरौली के लोगों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। इसी तरह से तीरगावा, हसनपुर, बड़गांवा, नादी निधौरा, सहेपुर आदि तटवर्तीय गांवों के किसानों व ग्रामीणों की हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन पूर्व में बाढ़ के दौरान गंगा नदी में समाहित हो चुकी है। इस बार फिर गंगा नदी में लगातार पानी बढ़ने से तटवर्तीय गांरों के किसानों को उपजाऊ भूमि के कटान की चिंता सताने लगी है। बाढ़ के कारण किसानों द्वारा खेतों में बोई गई सैकड़ों एकड़ फसलें, सब्जियां, ज्वार, बाजरा, अरहर एवं धान की रोपी गई फसलें और पशुओं का हरा चारा बाढ़ के पानी में डूबकर बर्वाद हो जाती हैं। पशुपालकों को पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो जाती है। घाट के किनारे पर झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को विशैले जानवरो का हमेशा खतरा बना रहता है । बढ़ते जलस्तर को लेकर के खेतों में लगी फसलें पानी के कारण बर्बाद हो जाती है।
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