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आस्था के रंग: यूपी के इस जिले में मजहब की दीवारें पड़ीं छोटी, भाईचारे से सजाया मां दुर्गा का दरबार
Thu, 15 Oct 2026 11:57 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली।
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:57 AM IST
सार
चंजौली जिले में मुस्लिम समाज के लोग कहीं मां दुर्गा का पंडाल तैयार कर रहे हैं तो कहीं पूजा समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बम्हनियाव गांव में लाल मोहम्मद पिछले 20 वर्षों से दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष हैं और खुद पंडाल भी तैयार करते हैं।
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पूजा की तैयारी करते बम्हनियाव गांव की दुर्गा पूजा कमेटी के अध्यक्ष लाल मोहम्मद व अन्य
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
आस्था के रंग अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रेम और भाईचारे की भाषा एक ही होती है। धानापुर क्षेत्र में यह बात दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच साकार होती दिखाई दे रही है। मुस्लिम समाज के लोग कहीं मां दुर्गा का पंडाल तैयार कर रहे हैं तो कहीं पूजा समिति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बम्हनियाव गांव में लाल मोहम्मद पिछले 20 वर्षों से दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष हैं और खुद पंडाल भी तैयार करते हैं। वहीं, कस्बे के हीरोज क्लब में सुद्धन राइन और आजाद मार्केट की दुर्गा पूजा समिति में अफजल शेरू भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आस्था, सहयोग और सद्भाव की यह परंपरा गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर पेश करती है।
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लाल मोहम्मद 20 वर्षों से अध्यक्ष, खुद तैयार करते हैं पंडाल
धानापुर ब्लॉक के बम्हनियाव गांव में दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसमें मुस्लिम भी सहयोग कर रहे हैं। पूजा समिति के अध्यक्ष लाल मोहम्मद पिछले दो दशकों से दुर्गा पूजा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह केवल समिति का नेतृत्व नहीं करते, बल्कि पंडाल तैयार करने में भी हाथ बंटाते हैं। लाल मोहम्मद का कहना है कि मां दुर्गा शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देती है। गांव में सारे त्योहार मिल-जुलकर मनाने की परंपरा है। यही वजह है कि दुर्गा पूजा में सभी समुदायों के लोग भाग लेते हैं। समिति में अध्यक्ष लाल मोहम्मद के साथ उपाध्यक्ष मिठाई लाल मौर्य, संयोजक जन्मेजय सिंह, सहसंयोजक रणजीत सिंह, महामंत्री पंचम विश्वकर्मा, मंत्री कमलबास पाल, कोषाध्यक्ष अनुज कुशवाहा, अस्थायी कोषाध्यक्ष नितेश विश्वकर्मा, संगठन मंत्री राजेश पाल, व्यवस्थापक मंत्री गोविंद मौर्य, उद्घोषक मंत्री सुखेर मौर्य और सूचना मंत्री रोहन जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
धानापुर ब्लॉक के बम्हनियाव गांव में दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसमें मुस्लिम भी सहयोग कर रहे हैं। पूजा समिति के अध्यक्ष लाल मोहम्मद पिछले दो दशकों से दुर्गा पूजा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह केवल समिति का नेतृत्व नहीं करते, बल्कि पंडाल तैयार करने में भी हाथ बंटाते हैं। लाल मोहम्मद का कहना है कि मां दुर्गा शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देती है। गांव में सारे त्योहार मिल-जुलकर मनाने की परंपरा है। यही वजह है कि दुर्गा पूजा में सभी समुदायों के लोग भाग लेते हैं। समिति में अध्यक्ष लाल मोहम्मद के साथ उपाध्यक्ष मिठाई लाल मौर्य, संयोजक जन्मेजय सिंह, सहसंयोजक रणजीत सिंह, महामंत्री पंचम विश्वकर्मा, मंत्री कमलबास पाल, कोषाध्यक्ष अनुज कुशवाहा, अस्थायी कोषाध्यक्ष नितेश विश्वकर्मा, संगठन मंत्री राजेश पाल, व्यवस्थापक मंत्री गोविंद मौर्य, उद्घोषक मंत्री सुखेर मौर्य और सूचना मंत्री रोहन जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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हीरोज क्लब में सुद्धन राइन ने वर्षों तक संभाली कमान
धानापुर कस्बे में दुर्गा पूजा के दौरान गंगा-जमुनी तहजीब की एक और मिसाल देखने को मिलती है। हीरोज क्लब में सुद्धन राइन वर्ष 1991 से दुर्गा पूजा आयोजन से जुड़े हैं। उन्होंने कई वर्षों तक समिति के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। पंडाल की साज-सज्जा से लेकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना तक के कार्यों में उनकी अहम भूमिका रही है। उम्र अधिक होने के कारण अब वह समिति के संरक्षक के रूप में योगदान दे रहे हैं। लंबे समय से आयोजन से जुड़े रहने के कारण वह समिति के सदस्यों के लिए अनुभव और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण आधार हैं। उनकी सहभागिता बताती है कि सामाजिक रिश्ते किसी एक आयोजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ परंपरा का रूप ले लेते हैं।
धानापुर कस्बे में दुर्गा पूजा के दौरान गंगा-जमुनी तहजीब की एक और मिसाल देखने को मिलती है। हीरोज क्लब में सुद्धन राइन वर्ष 1991 से दुर्गा पूजा आयोजन से जुड़े हैं। उन्होंने कई वर्षों तक समिति के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। पंडाल की साज-सज्जा से लेकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना तक के कार्यों में उनकी अहम भूमिका रही है। उम्र अधिक होने के कारण अब वह समिति के संरक्षक के रूप में योगदान दे रहे हैं। लंबे समय से आयोजन से जुड़े रहने के कारण वह समिति के सदस्यों के लिए अनुभव और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण आधार हैं। उनकी सहभागिता बताती है कि सामाजिक रिश्ते किसी एक आयोजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ परंपरा का रूप ले लेते हैं।
आजाद मार्केट में अफजल शेरू निभाते हैं जिम्मेदारी
आजाद मार्केट की दुर्गा पूजा समिति में अफजल शेरू उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालते हैं। नवरात्र के दौरान वह पंडाल में बैठकर समिति के अन्य सदस्यों के साथ आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। पूजा की तैयारियों से लेकर आयोजन संबंधी जिम्मेदारियों तक उनकी भागीदारी सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है। धानापुर में हीरोज क्लब, गोल्डन क्लब और आजाद मार्केट में दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। इन आयोजनों से जुड़े विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में सहयोग करते हैं। इससे धार्मिक विविधता के बीच आपसी सम्मान और विश्वास की परंपरा मजबूत होती है।
आजाद मार्केट की दुर्गा पूजा समिति में अफजल शेरू उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालते हैं। नवरात्र के दौरान वह पंडाल में बैठकर समिति के अन्य सदस्यों के साथ आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। पूजा की तैयारियों से लेकर आयोजन संबंधी जिम्मेदारियों तक उनकी भागीदारी सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है। धानापुर में हीरोज क्लब, गोल्डन क्लब और आजाद मार्केट में दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। इन आयोजनों से जुड़े विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में सहयोग करते हैं। इससे धार्मिक विविधता के बीच आपसी सम्मान और विश्वास की परंपरा मजबूत होती है।
रिश्तों की मिठास से मजबूत होती साझा संस्कृति
बम्हनियाव गांव से लेकर धानापुर कस्बे तक दुर्गा पूजा की तैयारियां सामाजिक एकता का उदाहरण हैं। लाल मोहम्मद का पंडाल तैयार करना, सुद्धन राइन का वर्षों तक समिति का नेतृत्व करना और अफजल शेरू का उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाना बताता है कि आपसी सद्भाव व्यवहार और सहभागिता से मजबूत होता है। त्योहारों की असली खूबसूरती भी इसी में है कि लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करें और खुशियों में सहभागी बनें। धानापुर में दुर्गा पूजा के साथ जुड़ी यह साझी परंपरा प्रेम, सहयोग और भाईचारे का संदेश देती है। यही साझा संस्कृति क्षेत्र की पहचान और गंगा-जमुनी तहजीब की असली ताकत है।
बम्हनियाव गांव से लेकर धानापुर कस्बे तक दुर्गा पूजा की तैयारियां सामाजिक एकता का उदाहरण हैं। लाल मोहम्मद का पंडाल तैयार करना, सुद्धन राइन का वर्षों तक समिति का नेतृत्व करना और अफजल शेरू का उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाना बताता है कि आपसी सद्भाव व्यवहार और सहभागिता से मजबूत होता है। त्योहारों की असली खूबसूरती भी इसी में है कि लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करें और खुशियों में सहभागी बनें। धानापुर में दुर्गा पूजा के साथ जुड़ी यह साझी परंपरा प्रेम, सहयोग और भाईचारे का संदेश देती है। यही साझा संस्कृति क्षेत्र की पहचान और गंगा-जमुनी तहजीब की असली ताकत है।