{"_id":"687d3af889b63be8760ab676","slug":"the-road-to-varanasi-resonated-with-the-chants-of-bol-bam-50-thousand-devotees-left-chandauli-news-c-189-1-svns1012-133972-2025-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandauli News: बोल-बम के जयकारे से गूंजी वाराणसी जाने वाली सड़क, 50 हजार भक्त रवाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandauli News: बोल-बम के जयकारे से गूंजी वाराणसी जाने वाली सड़क, 50 हजार भक्त रवाना
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। सावन के दूसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए 50 हजार से अधिक कांवड़िये वाराणसी रवाना हुए। इस दौरान बोल बम के जयकारे से जीटी रोड गूंजता रहा। शाम सात बजे कांवड़ियों की रवानगी का सिलसिला शुरू हुआ तो पूरी रात भक्त वाराणसी जाते रहे। इस दौरान पीडीडीयू नगर में सड़क किनारे जगह-जगह शिविर लगाकर कांवड़ियों को चाय, शरबत, हलवा और पूरी का प्रसाद वितरित किया गया।
कांवड़ियों की सुविधा के लिए सड़कों के गड्ढों को स्टोन डस्ट से भर दिए गए। वहीं सड़क की दक्षिण पटरी की अच्छे ढंग से सफाई की गई। कांवड़ियों की सुविधा के लिए रूट डायवर्जन किया गया। वहीं सड़क पर मैट बिछाई कई। सावन माह के दूसरे रविवार को उमस भरी गर्मी ने भक्तों की परीक्षा ली। गर्मी से आम जन परेशान रहे। बावजूद कांवड़ियों के उत्साह में कमी नहीं आई। पीडीडीयू नगर के चतुर्भुजपुर, काली महाल, शहकुटी, अलीनगर सहित विभिन्न मुहल्लों के साथ ही चंदौली, सैयदराजा, बबुरी सहित अन्य स्थानों से महिला, युवा, बच्चे कांवड़ लेकर वाराणसी रवाना हुए। इस दौरान कांवड़ियों के स्वागत के लिए स्वयं सेवी संगठनों और प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई थी। नगर के सुभाष पार्क के समीप नगर पालिका की ओर से शिविर लगाया गया। इसी तरह अलीनगर, मानसरोवर तालाब, जीटी रोड पर गल्ला मंडी, सुभाष पार्क, नई सट्टी, नई बस्ती सहित विभिन्न स्थानों पर स्वयंसेवी संगठनों की ओर शिविर लगाया गया। यहां कांवड़ियों को शर्बत, चाय, हलवा चना आदि वितरित किया गया। यहां कांवड़ियों को शर्बत, चाय आदि वितरित की गई। गेरुआ वस्त्र पहने, कमर में जलाभिषेक के लिए लोटा टांगे, नंगे पैर कांवड़िये शिविर के पास रुकते और यहां साउंड बॉक्स पर बज रहे गीतों पर नाचते और जल ग्रहण करते ओर वाराणसी के लिए निकलते। अलीनगर, चहनियां, धानापुर, सकलडीहा, नियामताबाद, बबुरी से भक्तों की टोली जीटी रोड से होते हुए वाराणसी के लिए रवाना हुई।
इनसेट-
जामेश्वर महादेव के जोड़ा शिवलिंग के दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें
सकलडीहा। क्षेत्र के जामडीह गांव में पौने दो सौ वर्ष से अधिक प्राचीन जामेश्वर महादेव में जोड़े शिवलिंग का दर्शन से भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। पूरे सावन में, महाशिवरात्रि और दीपावली के दूसरे दिन दर्शन पूजन के लिए यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। पहले गाजीपुर के सराय पोस्ता स्टीमर घाट निवासी सुखलाल अग्रहरी चंदौली रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे। जामडीह गांव में पीपल के पेड़ के नीचे स्वप्न में भगवान शिव का उन्हें दर्शन प्राप्त हुआ। सुखलाल ने उसी पीपल के नीचे मंदिर स्थापना के लिए खोदाई शुरू कराई। वहां पर स्वयं अवतरित जोड़ा शिवलिंग दिखा। सुखलाल ने भगवान भोलेनाथ पर आस्था रखते हुए मंदिर का स्थापना कराई। मंदिर स्थापना के बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उनका पुत्र शिव प्रसाद अग्रहरी, भोला अग्रहरी, काशी प्रसाद अग्रहरी और लच्छु अग्रहरी परिजनों के साथ आज भी दर्शन पूजन के लिये आते हैं। ग्राम प्रधान बिहारी यादव ने बताया कि यहां पर दूर दराज और कई जिले की महिलाएं दर्शन पूजन के लिए आती हैं। आस्था के साथ पूजा करने वाले कभी निराश नहीं होते है।
विज्ञापन
इनसेट-
काशी विश्वनाथ मंदिर से पुराना है स्वंय भू कालेश्वर मंदिर का इतिहास
सकलडीहा। क्षेत्र के चतुर्भुजपुर स्थित स्वयं भू कॉलेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से पूर्व का है। मान्यता है कि यहां पर दर्शन पूजन करने वालों की सभी मूरादें पूरी होती हैं। सावन में महामृत्युंजय जाप और अखंड पूजन करने वालों की अकाल मृत्यु भी टल जाती है। सावन के दूसरे सोमवार को दर्शन पूजन के लिए शाम से भी भक्तों का भीड़ जुटने लगी है। मंदिर के पीआरओ पीयूष तिवारी ने बताया कि मंदिर का इतिहास काशी विश्वनाथ मंदिर से भी पुराना है। मंदिर पर दर्शन पूजन के लिए अच्छी व्यवस्था है।
विज्ञापन
कांवड़ियों की सुविधा के लिए सड़कों के गड्ढों को स्टोन डस्ट से भर दिए गए। वहीं सड़क की दक्षिण पटरी की अच्छे ढंग से सफाई की गई। कांवड़ियों की सुविधा के लिए रूट डायवर्जन किया गया। वहीं सड़क पर मैट बिछाई कई। सावन माह के दूसरे रविवार को उमस भरी गर्मी ने भक्तों की परीक्षा ली। गर्मी से आम जन परेशान रहे। बावजूद कांवड़ियों के उत्साह में कमी नहीं आई। पीडीडीयू नगर के चतुर्भुजपुर, काली महाल, शहकुटी, अलीनगर सहित विभिन्न मुहल्लों के साथ ही चंदौली, सैयदराजा, बबुरी सहित अन्य स्थानों से महिला, युवा, बच्चे कांवड़ लेकर वाराणसी रवाना हुए। इस दौरान कांवड़ियों के स्वागत के लिए स्वयं सेवी संगठनों और प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई थी। नगर के सुभाष पार्क के समीप नगर पालिका की ओर से शिविर लगाया गया। इसी तरह अलीनगर, मानसरोवर तालाब, जीटी रोड पर गल्ला मंडी, सुभाष पार्क, नई सट्टी, नई बस्ती सहित विभिन्न स्थानों पर स्वयंसेवी संगठनों की ओर शिविर लगाया गया। यहां कांवड़ियों को शर्बत, चाय, हलवा चना आदि वितरित किया गया। यहां कांवड़ियों को शर्बत, चाय आदि वितरित की गई। गेरुआ वस्त्र पहने, कमर में जलाभिषेक के लिए लोटा टांगे, नंगे पैर कांवड़िये शिविर के पास रुकते और यहां साउंड बॉक्स पर बज रहे गीतों पर नाचते और जल ग्रहण करते ओर वाराणसी के लिए निकलते। अलीनगर, चहनियां, धानापुर, सकलडीहा, नियामताबाद, बबुरी से भक्तों की टोली जीटी रोड से होते हुए वाराणसी के लिए रवाना हुई।
विज्ञापन
इनसेट-
जामेश्वर महादेव के जोड़ा शिवलिंग के दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें
सकलडीहा। क्षेत्र के जामडीह गांव में पौने दो सौ वर्ष से अधिक प्राचीन जामेश्वर महादेव में जोड़े शिवलिंग का दर्शन से भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। पूरे सावन में, महाशिवरात्रि और दीपावली के दूसरे दिन दर्शन पूजन के लिए यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। पहले गाजीपुर के सराय पोस्ता स्टीमर घाट निवासी सुखलाल अग्रहरी चंदौली रिश्तेदार के घर से लौट रहे थे। जामडीह गांव में पीपल के पेड़ के नीचे स्वप्न में भगवान शिव का उन्हें दर्शन प्राप्त हुआ। सुखलाल ने उसी पीपल के नीचे मंदिर स्थापना के लिए खोदाई शुरू कराई। वहां पर स्वयं अवतरित जोड़ा शिवलिंग दिखा। सुखलाल ने भगवान भोलेनाथ पर आस्था रखते हुए मंदिर का स्थापना कराई। मंदिर स्थापना के बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उनका पुत्र शिव प्रसाद अग्रहरी, भोला अग्रहरी, काशी प्रसाद अग्रहरी और लच्छु अग्रहरी परिजनों के साथ आज भी दर्शन पूजन के लिये आते हैं। ग्राम प्रधान बिहारी यादव ने बताया कि यहां पर दूर दराज और कई जिले की महिलाएं दर्शन पूजन के लिए आती हैं। आस्था के साथ पूजा करने वाले कभी निराश नहीं होते है।
विज्ञापन
इनसेट-
काशी विश्वनाथ मंदिर से पुराना है स्वंय भू कालेश्वर मंदिर का इतिहास
सकलडीहा। क्षेत्र के चतुर्भुजपुर स्थित स्वयं भू कॉलेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से पूर्व का है। मान्यता है कि यहां पर दर्शन पूजन करने वालों की सभी मूरादें पूरी होती हैं। सावन में महामृत्युंजय जाप और अखंड पूजन करने वालों की अकाल मृत्यु भी टल जाती है। सावन के दूसरे सोमवार को दर्शन पूजन के लिए शाम से भी भक्तों का भीड़ जुटने लगी है। मंदिर के पीआरओ पीयूष तिवारी ने बताया कि मंदिर का इतिहास काशी विश्वनाथ मंदिर से भी पुराना है। मंदिर पर दर्शन पूजन के लिए अच्छी व्यवस्था है।