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व्यवस्था का सच : सड़क दुर्घटना, सर्पदंश, डूबने या बिजली गिरने से मौत हुई तो कर्ज लेकर कराना पड़ता है पोस्टमार्टम

Wed, 27 May 2026 01:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 01:14 AM IST
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The reality of the system: If someone dies due to a road accident, snake bite, drowning, or lightning, a postmortem has to be done by taking a loan.
विशाल कुमार गुप्ता नौगढ़। विकास योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बीच चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र की हकीकत आज भी लोगों को झकझोर रही है। यहां के लोग जिंदगी भर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते हैं। फिर मौत के बाद चार से पांच हजार कर्ज लेकर पोस्टमार्टम कराते हैं। सड़क दुर्घटना, सर्पदंश, डूबने या आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत होने पर परिजनों को शव के पोस्टमार्टम के लिए खुद से वाहन की व्यवस्था करके 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय चंदौली जाना पड़ता है। नौगढ़ सीएचसी पर आज तक एक भी शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका है।
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मौत के बाद शुरू होती है कर्ज की जंग
यहां किसी परिवार में आकस्मिक मौत होने पर पहले ही पूरा परिवार सदमे में होता है। ऐसे में जब पुलिस पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं को पूरी करने के लिए कहती है तो शुरू होती कर्ज की जंग। इसके बाद वाहन की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई बार शव घंटों तक अस्पताल में पड़ा रहता है। परिजन किराये की गाड़ी तलाशते हैं। ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि मानवीय आधार पर अपनी जेब से पैसा देकर शव का पोस्टमार्टम करवाते हैं।
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जिन्होंने अपनों को खोया जानें उनकी कहानी
केस 1
बेटे का शव को ले जाने के लिए खर्च करने पड़े थे चार हजार रुपये
गोलाबाद निवासी घनश्याम विश्वकर्मा बताते हैं कि सड़क दुर्घटना में बेटे की मौत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से पोस्टमार्टम के लिए चंदौली शव ले जाने के लिए कहा गया था। पैसे नहीं थे हमने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। पुलिस ने कहा कि यह जरूरी है। कराना ही पड़ेगा। शव वाहन उपलब्ध नहीं था, निजी वाहन पर चार हजार रुपये खर्च करने पड़े।
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केस 2
आकाशीय बिजली ने भाई की जान ली, कर्ज लेकर कराया पोस्टमार्टम
शमशेरपुर निवासी अमरनाथ कहते हैं कि साल 2021 में उनके भाई राजनाथ की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम करवाने के लिए पुलिस लगातार दबाव बना रही थी। लालच दे रही थी कि पोस्टमार्टम करवा लेने पर सरकारी मदद मिलेगी। हम लोग पोस्टमार्टम करवाना नहीं चाहते थे। बार-बार कहने पर मजबूरी में ले जाना पड़ा। सरकारी शव वाहन नहीं मिला। इस कारण चार हजार रुपये कर्ज लेकर निजी वाहन बुक करना पड़ा।
केस 3

रुपये नहीं थे तो प्रधान ने की थी मदद
अतरवा निवासी फूलवासी बताती हैं कि साल 2023 में तालाब में डूबने से उनके पति की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के लिए 4500 रुपये निजी वाहन का चालक किराया मांग रहा था। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण गांव के प्रधान ने आर्थिक मदद की, तब शव को चंदौली ले जाया गया। फिर पोस्टमार्टम के बाद शव को घर लाने के लिए अलग से रुपये देने पड़े।
केस 4
बेटे की मौत के बाद नहीं मिली सरकारी मदद
गोलाबाद निवासी सरोज यादव के बेटे की कुएं में गिरने से मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के लिए शव वाहन सीएचसी में उपलब्ध नहीं था। पुलिस सुबह से शाम तक बार-बार पोस्टमार्टम करवाने के लिए कह रही थी। हमने हाथ जोड़कर कहा कि साहब रुपये नहीं हैं। कर्ज भी लेंगे तो भरेंगे कैसे। उन्होंने कहा कि यह जरूरी प्रक्रिया है। मजबूरी में चार हजार रुपये कर्ज लेकर निजी वाहन से शव लेकर जिला अस्पताल गए।

किन मामलों में जरूरी होता है पोस्टमार्टम करवाना
- सड़क दुर्घटना में मौत
- सर्पदंश से मौत
- आकाशीय बिजली गिरने से मौत
- तालाब, नदी या कुएं में डूबने से मौत
- संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
- अन्य अप्राकृतिक मृत्यु के मामले
ये है ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- नौगढ़ सीएचसी पर स्थायी शव वाहन की तैनाती
- 24 घंटे उपलब्ध रहे वाहन सुविधा
- वनांचल क्षेत्र के लिए अलग पोस्टमार्टम केंद्र की व्यवस्था
- गरीब परिवारों के लिए निशुल्क शव परिवहन सुविधा
- दुर्घटना और आपदा पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता
नौगढ़ सीएचसी के लिए शव वाहन उपलब्ध कराने के संबंध में उच्च अधिकारियों से बातचीत करके शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रयास है कि जल्द ही यहां शव वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- डॉ. संजय सिंह, डिप्टी सीएमओ, चंदौली
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