{"_id":"660c5734efe45cf41f00ddb4","slug":"the-marriage-of-donkey-and-owl-stopped-after-the-dispute-in-mahamurkha-sammelan-chandauli-news-c-189-1-svns1012-112664-2024-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandauli News: महामुर्ख सम्मेलन में विवाद के बाद रुका गदही और उल्लू का विवाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandauli News: महामुर्ख सम्मेलन में विवाद के बाद रुका गदही और उल्लू का विवाह
विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। अस्मिता नाट्य संस्थान के बैनरतले पीडीडीयू नगर के नगर पालिका कार्यालय के समीप महामुर्ख सम्मेलन, हसो हसाओ रेला और नवसंवत्सर अभिनंदन समारोह का आयेाजन किया गया। इसमें गदही दुलहा और उल्लू दुलहन का विवाह आयोजित हुआ, इसमें विवाद हो गया। इसके कारण विवाह टालना पड़ा। इस मौके पर हास्य कवि सम्मेलन में कवियाें ने अपनी रचानाओं से लोगों को हंसा कर लोट पोट कराया।
सम्मेलन की शुरूआत मुख्य अतिथि चिकित्सक डॉ. एके सिंह ने कवियों को लॉलीपाप का माला पहना कर किया। आयोजन के अवसर पर गदही दुलहा-उल्लू दुलहन का संवाद कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने पढ़ते हुए कहा कि उल्लू नहीं करता कभी उल्लूपने की बात, उल्लूपने की बात करता आदमी की जाति, इसलिए उल्लू दिन में नहीं देखता, देखता है सिर्फ रात। वहीं गदही दुलहा की बात करते हुए कहा कि पूर्व जन्म में मैं मानव थी, अब गदही कुल में आई हूं। लोग दूध मलाई खाकर भी, अपने कुल का अपमान करते हैं। हमलोग तो घास भूसा खाकर, लादी ढोकर भी अपने कुल सम्मान करते हैं। इतना सुनते ही उल्लू दुलहन बिदक गई और विवाह अगले वर्ष तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मौके पर काव्य गोष्ठष्की अध्यक्षता करते हुए राजेन्द्र गुप्ता बावरा ने सोना तो कायरापन है, हंसना जीवन संगीत है सुनाया तो संचालक इंद्रजीत निर्भीक ने प्यार मोहब्बत को जगाए रखिए, स्वयं खुश रहकर दूसरे को भी खुशी बनाए रखिए सुनाया। फायर बनारसी ने चेहरे पर झुर्रियां हैं, माथे पर सिकन, ना नूर है ना जमाल, बहनों भाईयों,ये पांच किलो राशन का कमाल। चिंतित बनारसी ने कश्मीर से मेरे शादी का पैगाम आया हैं। अलियार प्रधान ने हसो-हसाओ हसगुल्ला पाओ और दिवाकर उपाध्याय ने क्यूं जलाकर रोशनी, तुम यूं ही तन्हा सो गए, सुरेश अकेला ने मन में गंदा भाव रखने वाले,जब सत्संग करवाने लगें तो जान जाना चुनाव आने वाला है सुनाया। इस मौके पर रतनलाल श्रीवास्तव, विजय कुमार गुप्ता, राजू महराज, नवीन कुमार मौर्य, अभिषेक त्रिपाठी, डीके राजू, कमलेश तिवारी, निक्की गुप्ता आदि उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक विजय कुमार गप्ता ने किया।
विज्ञापन
सम्मेलन की शुरूआत मुख्य अतिथि चिकित्सक डॉ. एके सिंह ने कवियों को लॉलीपाप का माला पहना कर किया। आयोजन के अवसर पर गदही दुलहा-उल्लू दुलहन का संवाद कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने पढ़ते हुए कहा कि उल्लू नहीं करता कभी उल्लूपने की बात, उल्लूपने की बात करता आदमी की जाति, इसलिए उल्लू दिन में नहीं देखता, देखता है सिर्फ रात। वहीं गदही दुलहा की बात करते हुए कहा कि पूर्व जन्म में मैं मानव थी, अब गदही कुल में आई हूं। लोग दूध मलाई खाकर भी, अपने कुल का अपमान करते हैं। हमलोग तो घास भूसा खाकर, लादी ढोकर भी अपने कुल सम्मान करते हैं। इतना सुनते ही उल्लू दुलहन बिदक गई और विवाह अगले वर्ष तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मौके पर काव्य गोष्ठष्की अध्यक्षता करते हुए राजेन्द्र गुप्ता बावरा ने सोना तो कायरापन है, हंसना जीवन संगीत है सुनाया तो संचालक इंद्रजीत निर्भीक ने प्यार मोहब्बत को जगाए रखिए, स्वयं खुश रहकर दूसरे को भी खुशी बनाए रखिए सुनाया। फायर बनारसी ने चेहरे पर झुर्रियां हैं, माथे पर सिकन, ना नूर है ना जमाल, बहनों भाईयों,ये पांच किलो राशन का कमाल। चिंतित बनारसी ने कश्मीर से मेरे शादी का पैगाम आया हैं। अलियार प्रधान ने हसो-हसाओ हसगुल्ला पाओ और दिवाकर उपाध्याय ने क्यूं जलाकर रोशनी, तुम यूं ही तन्हा सो गए, सुरेश अकेला ने मन में गंदा भाव रखने वाले,जब सत्संग करवाने लगें तो जान जाना चुनाव आने वाला है सुनाया। इस मौके पर रतनलाल श्रीवास्तव, विजय कुमार गुप्ता, राजू महराज, नवीन कुमार मौर्य, अभिषेक त्रिपाठी, डीके राजू, कमलेश तिवारी, निक्की गुप्ता आदि उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक विजय कुमार गप्ता ने किया।
विज्ञापन