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Chandauli News: नरायनपुर नहर का तटबंध टूटा, 250 एकड़ फसल डूबी, 50 घरों में भरा पानी
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पीडीडीयू नगर/नियामताबाद। गोधना नई बस्ती के पास शनिवार की सुबह नरायनपुर नहर का तटबंध अचानक टूट गया। यह घटना सुबह लगभग चार बजे हुई, जब ज्यादातर लोग सो रहे थे। तेज बहाव के साथ नहर का पानी खेतों और घरों तक पहुंच गया। कुछ लोगों ने सुबह चार बजे ही प्रशासन को इसकी सूचना दी, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। आक्रोशित लोगों ने मुगलसराय-गोधना मार्ग पर चक्काजाम कर दिया इसके बाद चार घंटे में अधिकारी पहुंचे। तब तक 250 एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। वहीं करीब 50 घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान, अनाज व पशुओं के चारे को नुकसान पहुंचा है।
प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार नरायनपुर नहर को गंगा नहर भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें अत्यधिक जल प्रवाह और गहराई होती है। यह नहर जिले में सिंचाई की प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में ज्यादा मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण यह उफान पर थी। तटबंध जिस स्थान पर टूटा, वह काफी समय से क्षतिग्रस्त था और दोनों ओर से कटान की स्थिति में था। स्थानीय लोगों ने बताया कि तटबंध की खराब स्थिति की जानकारी दो महीने पहले सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को शिकायत कर दी गई थी, लेकिन इसका संज्ञान नहीं लिया गया। शनिवार को जब तटबंध टूटा तो तत्काल फोन कर अधिकारियों को सूचना दी गई। चार घंटे तक अधिकारी नहीं पहुंचे। उधर, अधिकारियों के नहीं पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने मुगलसराय-गोधना मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय पर विभाग सक्रिय होता तो यह स्थिति नहीं पैदा होती। उधर, घटना के पांच से छह घंटे बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। इसके बाद नहर का पानी बंद कराकर तटबंध की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया। इस बीच पूरे गांव के एक से दो किमी के दायरे में पानी फैल चुका था। खेतों में लगी धान की फसल जो अभी बढ़ने की स्थिति में है, पूरी तरह डूब गई। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर धान की बोआई की थी। अब उनके सामने भरण-पोषण का संकट पैदा हो गया है। उधर, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मनोज सिंह एवं प्रांत उपाध्यक्ष संतोष मिश्र ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग के अधिकारी नहरों का निरीक्षण नहीं करते हैं। उन्होंने जिन लोगों को फसलों आदि का नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा दिलाने और इस मामले की जांच की मांग की। उधर, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला और किसानों की बर्बाद फसल का मुआवजा दिलाने व तटबंध को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में बृजेश गुप्ता, दयाराम पटेल, शाहिद, तौसीफ, संतोष तिवारी, राकेश पाठक, विजय जायसवाल आदि शामिल रहे।
उधर, गोधना नई बस्ती में एक दिन पहले जहां धूल उड़ रही थी, वहां तटबंध टूटने पर इतना पानी भर गया कि लोगों के घरों से रास्ते का संपर्क ही टूट गया। इसके चलते नाव चलानी पड़ी। उसी से लोग आवागमन कर रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार पहली बार ऐसा हुआ है, जब गोधना नई बस्ती में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हुई। मूसाखाड़ डिवीजन के अधिशासी अभियंता रविशंकर मिश्र का कहना है कि हम मामले की जांच कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकता पहले तटबंध को बांधकर ठीक करने की है। प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया है कि जिस जगह तटबंध टूटा हुआ है वहां पहले किसी के द्वारा पाइप डाली गई थी। ऐसा बड़ी नहरों में होता नहीं है। इससे होल हो गया और तटबंध टूट गया। इसकी जांच कराई जाएगी। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग का कहना है कि तटबंध टूटने के बाद से सभी विभाग सक्रिय हो गए। तटबंध की मरम्मत कराई जा रही है। साथ ही जिन घरों में पानी घुस गया है। वहां के लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए रेस्क्यू टीम व स्वास्थ्य विभाग की टीम लगा दी गई है। स्थिति सामान्य है। जो भी दिक्कत होगी, उसका त्वरित निपटारा किया जाएगा।
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प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार नरायनपुर नहर को गंगा नहर भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें अत्यधिक जल प्रवाह और गहराई होती है। यह नहर जिले में सिंचाई की प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में ज्यादा मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण यह उफान पर थी। तटबंध जिस स्थान पर टूटा, वह काफी समय से क्षतिग्रस्त था और दोनों ओर से कटान की स्थिति में था। स्थानीय लोगों ने बताया कि तटबंध की खराब स्थिति की जानकारी दो महीने पहले सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को शिकायत कर दी गई थी, लेकिन इसका संज्ञान नहीं लिया गया। शनिवार को जब तटबंध टूटा तो तत्काल फोन कर अधिकारियों को सूचना दी गई। चार घंटे तक अधिकारी नहीं पहुंचे। उधर, अधिकारियों के नहीं पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने मुगलसराय-गोधना मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय पर विभाग सक्रिय होता तो यह स्थिति नहीं पैदा होती। उधर, घटना के पांच से छह घंटे बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। इसके बाद नहर का पानी बंद कराकर तटबंध की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया। इस बीच पूरे गांव के एक से दो किमी के दायरे में पानी फैल चुका था। खेतों में लगी धान की फसल जो अभी बढ़ने की स्थिति में है, पूरी तरह डूब गई। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर धान की बोआई की थी। अब उनके सामने भरण-पोषण का संकट पैदा हो गया है। उधर, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मनोज सिंह एवं प्रांत उपाध्यक्ष संतोष मिश्र ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग के अधिकारी नहरों का निरीक्षण नहीं करते हैं। उन्होंने जिन लोगों को फसलों आदि का नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा दिलाने और इस मामले की जांच की मांग की। उधर, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला और किसानों की बर्बाद फसल का मुआवजा दिलाने व तटबंध को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में बृजेश गुप्ता, दयाराम पटेल, शाहिद, तौसीफ, संतोष तिवारी, राकेश पाठक, विजय जायसवाल आदि शामिल रहे।
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उधर, गोधना नई बस्ती में एक दिन पहले जहां धूल उड़ रही थी, वहां तटबंध टूटने पर इतना पानी भर गया कि लोगों के घरों से रास्ते का संपर्क ही टूट गया। इसके चलते नाव चलानी पड़ी। उसी से लोग आवागमन कर रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार पहली बार ऐसा हुआ है, जब गोधना नई बस्ती में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हुई। मूसाखाड़ डिवीजन के अधिशासी अभियंता रविशंकर मिश्र का कहना है कि हम मामले की जांच कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकता पहले तटबंध को बांधकर ठीक करने की है। प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया है कि जिस जगह तटबंध टूटा हुआ है वहां पहले किसी के द्वारा पाइप डाली गई थी। ऐसा बड़ी नहरों में होता नहीं है। इससे होल हो गया और तटबंध टूट गया। इसकी जांच कराई जाएगी। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग का कहना है कि तटबंध टूटने के बाद से सभी विभाग सक्रिय हो गए। तटबंध की मरम्मत कराई जा रही है। साथ ही जिन घरों में पानी घुस गया है। वहां के लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए रेस्क्यू टीम व स्वास्थ्य विभाग की टीम लगा दी गई है। स्थिति सामान्य है। जो भी दिक्कत होगी, उसका त्वरित निपटारा किया जाएगा।
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