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Chandauli News: जिले को मिला 1975 हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई का लक्ष्य
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पीडीडीयू नगर। इस बार जिले को 1975 हेक्टेयर कृषि भूमि की सूक्ष्म सिंचाई का लक्ष्य मिला है। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की सिंचाई में सहायता करना है। इसके तहत फव्वारा (स्प्रिंकल) विधि से सिंचाई के लिए लघु व सीमांत किसानों को 75 से 90 और सामान्य किसानों को 65 से 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। लक्ष्य मिलने के बाद उद्यान विभाग किसानों के चयन में जुट गया है।
सूक्ष्म सिंचाई एक ऐसी सिंचाई विधि है जिसमें कम मात्रा में पानी का उपयोग होता है। इसके तहत पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। यह एक कम दबाव और कम प्रवाह दर वाली सिंचाई विधि है जो पानी की बर्बादी को कम करती है और पानी का सही उपयोग सुनिश्चित करती है। सूक्ष्म सिंचाई विधि में कम पानी से ज्यादा क्षेत्र की सिंचाई की जाती है। इसके तहत पानी को पाइपलाइन के माध्यम से स्रोत से खेत तक पूर्व-निर्धारित मात्रा में पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी को तो रोका ही जाता है, साथ ही यह जल उपयोग दक्षता बढ़ाने में भी सहायक है। इस विधि से सिंचाई से 30-40 फीसदी पानी की बचत होती है। वहीं फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार होता है। सरकार ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के मिशन के तहत फव्वारा (स्प्रिंकल) व टपक (ड्रिप) सिंचाई विधि को बढ़ावा दे रही है। इसकी जिम्मेदारी उद्यान विभाग को दी गई है। जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्रधर दूबे ने बताया कि जिले में ऐसे किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है जो पानी की बर्बादी रोकने के लिए फव्वारा (स्प्रिंकल) विधि का उपयोग कर रहे हैं। इच्छुक किसानों को सरकार की ओर से दी जा रही रियायत का लाभ दिया जाएगा।
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सूक्ष्म सिंचाई एक ऐसी सिंचाई विधि है जिसमें कम मात्रा में पानी का उपयोग होता है। इसके तहत पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। यह एक कम दबाव और कम प्रवाह दर वाली सिंचाई विधि है जो पानी की बर्बादी को कम करती है और पानी का सही उपयोग सुनिश्चित करती है। सूक्ष्म सिंचाई विधि में कम पानी से ज्यादा क्षेत्र की सिंचाई की जाती है। इसके तहत पानी को पाइपलाइन के माध्यम से स्रोत से खेत तक पूर्व-निर्धारित मात्रा में पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी को तो रोका ही जाता है, साथ ही यह जल उपयोग दक्षता बढ़ाने में भी सहायक है। इस विधि से सिंचाई से 30-40 फीसदी पानी की बचत होती है। वहीं फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार होता है। सरकार ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के मिशन के तहत फव्वारा (स्प्रिंकल) व टपक (ड्रिप) सिंचाई विधि को बढ़ावा दे रही है। इसकी जिम्मेदारी उद्यान विभाग को दी गई है। जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्रधर दूबे ने बताया कि जिले में ऐसे किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है जो पानी की बर्बादी रोकने के लिए फव्वारा (स्प्रिंकल) विधि का उपयोग कर रहे हैं। इच्छुक किसानों को सरकार की ओर से दी जा रही रियायत का लाभ दिया जाएगा।
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