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Chandauli News: शहर की सड़कों पर करम, पैदल चलने लायक भी नहीं है 30 गांवों की डगर
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टांडाकला के चकरा में क्षतिग्रस्त सड़क। संवाद
पीडीडीयू नगर। शहरी क्षेत्र की सड़कों की साल में दो से तीन बार मरम्मत कराई जाती है, वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की 30 ऐसी सड़कें और संपर्क मार्ग हैं, जिनकी एक दशक से कोई सुध नहीं ली गई। इन सड़कों की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि वाहन ही नहीं, पैदल चलने लायक भी नहीं हैं। कहीं गिट्टियां बिखरी हैं तो कहीं सड़क के गड्ढों में पानी भरा हुआ है।
पिछले साल जिले की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने 36.80 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया था। हालांकि, मानसून की पहली बारिश ने विभागीय दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिला मुख्यालय से लेकर कस्बों की मुख्य सड़कों को चमकाने के लिए प्रशासन और पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग भले ही सक्रिय दिख रहे हों, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर इससे बिल्कुल विपरीत है।
कहीं तारकोल की परत गायब होकर गिट्टियां बिखरी हैं, तो कहीं सड़क के गड्ढों में पानी भरा हुआ है। जिले में लगभग आठ हजार किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क फैला हुआ है। वर्ष 2025 के अक्तूबर से दिसंबर के बीच पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड (16.80 करोड़ खर्च, 83 किमी) और निर्माण खंड (20 करोड़ खर्च, 80 किमी) ने विशेष अभियान चलाया था। हालांकि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पहली बारिश में ही गिट्टियां उखड़ गईं और सड़कों पर दोबारा गड्ढे हो गए हैं।
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कोट--
सड़कों के नवनिर्माण और मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय और निर्माण खंड की ओर से 251.75 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई गई है। प्रांतीय खंड ने 194.19 और निर्माण खंड ने 57.56 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी है। मंजूरी मिलने और बजट जारी होने के बाद काम कराया जाएगा। - राजेश कुमार, नोडल अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, चंदौली।
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पिछले साल जिले की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने 36.80 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया था। हालांकि, मानसून की पहली बारिश ने विभागीय दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिला मुख्यालय से लेकर कस्बों की मुख्य सड़कों को चमकाने के लिए प्रशासन और पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग भले ही सक्रिय दिख रहे हों, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर इससे बिल्कुल विपरीत है।
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कहीं तारकोल की परत गायब होकर गिट्टियां बिखरी हैं, तो कहीं सड़क के गड्ढों में पानी भरा हुआ है। जिले में लगभग आठ हजार किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क फैला हुआ है। वर्ष 2025 के अक्तूबर से दिसंबर के बीच पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड (16.80 करोड़ खर्च, 83 किमी) और निर्माण खंड (20 करोड़ खर्च, 80 किमी) ने विशेष अभियान चलाया था। हालांकि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पहली बारिश में ही गिट्टियां उखड़ गईं और सड़कों पर दोबारा गड्ढे हो गए हैं।
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कोट
सड़कों के नवनिर्माण और मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय और निर्माण खंड की ओर से 251.75 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई गई है। प्रांतीय खंड ने 194.19 और निर्माण खंड ने 57.56 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी है। मंजूरी मिलने और बजट जारी होने के बाद काम कराया जाएगा। - राजेश कुमार, नोडल अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, चंदौली।

टांडाकला के चकरा में क्षतिग्रस्त सड़क। संवाद