{"_id":"5f5d1d8d8ebc3e51e82f177c","slug":"temple-of-dih-baba-located-in-kunda-khurd-village-in-the-ganges-from-katan-chandauli-news-vns546931016","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा की कटान के भेंट चढ़ गया सौ वर्ष पुराना डीहबाबा मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा की कटान के भेंट चढ़ गया सौ वर्ष पुराना डीहबाबा मंदिर
विज्ञापन
दुलहीपुर के कुंडा खुर्द में हो रहा गंगा कटान।
- फोटो : CHANDAULI
पीडीडीयू नगर/दुलहीपुर। बारिश कम होने से गंगा के जल स्तर भी कम होने लगा है। इससे कटान में तेजी आ गई है। शुक्रवार की रात कुंडा खुर्द गांव के मल्लाह बस्ती में गंगा के तट पर सौ वर्ष पुराना डीह बाबा का मंदिर गंगा में समा गया। साथ ही मंदिर से सटा विशाल नीम का पेड़ भी गिर गया।
जिले में गंगा कटान बड़ी समस्या है। नियामताबाद, चहनियां और धानापुर ब्लाक के दर्जनों गांव में गंगा के कटान से प्रति वर्ष सैकड़ों एकड़ भूमि गंगा में समा जाती है। नियामताबाद विकास खंड के बहादुरपुर, कुंडाखुर्द, कुंडा कला, मवई कला, सहजौर, कुरहना आदि गांवों में पानी के घटाव के साथ कटान तेज हो गया है। कुंडा खुर्द गांव के मल्लाह बस्ती में गंगा के तट पर सौ वर्ष पुराना डीह बाबा का मंदिर था। शुक्रवार को आधी रात मंदिर भरभरा कर गंगा समा गया। मंदिर के समीप स्थित नीम का पेड़ भी गंगा नदी में समा गया। डीह बाबा मंदिर से सटे ही हनुमान मंदिर और विशाल पीपल का पेड़ है। वह बच गया है। सुबह बस्ती के लोग पूूजा करने पहुंचे तो मंदिर गायब मिला। गांव के लोगों ने बताया कि इस वर्ष अब तक गांव के दुलारे, विनोद, मान सिह, भानू, विजय की आदि की बोई गई फसल सहित जमीन गंगा में समा चुकी है। प्रति दिन डेढ़ से दो एकड़ भूमि गंगा में समा रही है लेकिन अब तक न तो कटान रोकने की पहल हुई और न ही बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि बहादुरपुर से मल्लाह बस्ती जाने वाला लिंक रोड का बड़ा हिस्सा गंगा में समा चुका है।
दुलहीपुर। गंगा कटान को लेकर प्रति वर्ष अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांवों में पहुंच कर लोगों को आश्वासन देते हैं लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका। चुनाव के दौरान तो तमाम बड़े बड़े नेता भी गंगा कटान को रोकने की नाम पर वोट मांगते हैं लेकिन इसके बाद वे गायब हो जाते हैं।
विज्ञापन
कुंडा खुर्द के प्रधानपति भैयालाल ने कहा कि गंगा कटान की समस्या से कई बार प्रशासन को अवगत करायागया। यही नहीं जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गोपी साहनी ने कहा कि हम लोग नौका संचालन, मछली पालन और खेेती कर जीवन यापन करते हैं। गंगा कटान से पूरे गांव के लोग परेशान हैं। खेती योग्य जमीन चले जाने से हम लोगों के जीवन का आश्रय छिन जा रहा है। बावजूद इसके अब तक किसी को फसल बर्बादी का मुआवजा नहीं मिला। छन्नूलाल निषाद ने कहा कि पिछले वर्ष फसल लगी खेत गंगा में समा गई, लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला। अब मंदिर गंगा में समा गई। यदि कटान पर नहीं रोक ली तो पूरा गांव का ही अस्तित्व समाप्त हो सकता है। हाजी हलीम ने कहा कि कटान की समस्या को लेकर आज तक कोई सरकार किसानों के हित में काम नहीं किया। चुनाव के समय यह मुद्दा बनता है लेकिन बाद में खत्म हो जाता है।
03. ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया, सांसद को भेजा पत्रक
संवाद न्यूज एजेंसी
सचित्र-
पीडीडीयू नगर। कुंडा खुर्द गांव के मल्लाह बस्ती में डीह बाबा मंदिर केे गंगा कटान की भेंट चढ़ जाने के बाद नाराज ग्रामीणों ने गंगा तट पर खड़े होकर प्रदर्शन किया। बाद में गंगा प्रहरी दर्शन निशाद ने चंदौली सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय के सचिव से वार्ता की और कटान की समस्या से अवगत कराया। यही नहीं ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त पत्रक भी भेजा। ग्रामीणों ने पिछड़ा वर्ग कल्याण प्रकोष्ठ के सदस्य शिव शंकर पटेल से भी वार्ता हुई। चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गंगा कटान रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर अवधेश कुमार निषाद, जितेंद्र निषाद, अनिल साहनी, लक्ष्मण निषाद रामजी, सरोज कुमार,हरीनाथ, श्याम बहादुर, रामसेवक, कौशलेंद्र कुमार, उर्मिला देवी, लालमणी, सुनीता, सरबती, सुंदरी, प्रभावती, सूखा, सुदामा, विनता, आशा, मीना कुमारी, पार्वती देवी, चंद्रबली साहनी, फूलमती, जीता रहे।
विज्ञापन
जिले में गंगा कटान बड़ी समस्या है। नियामताबाद, चहनियां और धानापुर ब्लाक के दर्जनों गांव में गंगा के कटान से प्रति वर्ष सैकड़ों एकड़ भूमि गंगा में समा जाती है। नियामताबाद विकास खंड के बहादुरपुर, कुंडाखुर्द, कुंडा कला, मवई कला, सहजौर, कुरहना आदि गांवों में पानी के घटाव के साथ कटान तेज हो गया है। कुंडा खुर्द गांव के मल्लाह बस्ती में गंगा के तट पर सौ वर्ष पुराना डीह बाबा का मंदिर था। शुक्रवार को आधी रात मंदिर भरभरा कर गंगा समा गया। मंदिर के समीप स्थित नीम का पेड़ भी गंगा नदी में समा गया। डीह बाबा मंदिर से सटे ही हनुमान मंदिर और विशाल पीपल का पेड़ है। वह बच गया है। सुबह बस्ती के लोग पूूजा करने पहुंचे तो मंदिर गायब मिला। गांव के लोगों ने बताया कि इस वर्ष अब तक गांव के दुलारे, विनोद, मान सिह, भानू, विजय की आदि की बोई गई फसल सहित जमीन गंगा में समा चुकी है। प्रति दिन डेढ़ से दो एकड़ भूमि गंगा में समा रही है लेकिन अब तक न तो कटान रोकने की पहल हुई और न ही बर्बाद हुई फसल का मुआवजा दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि बहादुरपुर से मल्लाह बस्ती जाने वाला लिंक रोड का बड़ा हिस्सा गंगा में समा चुका है।
विज्ञापन
दुलहीपुर। गंगा कटान को लेकर प्रति वर्ष अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांवों में पहुंच कर लोगों को आश्वासन देते हैं लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका। चुनाव के दौरान तो तमाम बड़े बड़े नेता भी गंगा कटान को रोकने की नाम पर वोट मांगते हैं लेकिन इसके बाद वे गायब हो जाते हैं।
विज्ञापन
कुंडा खुर्द के प्रधानपति भैयालाल ने कहा कि गंगा कटान की समस्या से कई बार प्रशासन को अवगत करायागया। यही नहीं जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाई गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गोपी साहनी ने कहा कि हम लोग नौका संचालन, मछली पालन और खेेती कर जीवन यापन करते हैं। गंगा कटान से पूरे गांव के लोग परेशान हैं। खेती योग्य जमीन चले जाने से हम लोगों के जीवन का आश्रय छिन जा रहा है। बावजूद इसके अब तक किसी को फसल बर्बादी का मुआवजा नहीं मिला। छन्नूलाल निषाद ने कहा कि पिछले वर्ष फसल लगी खेत गंगा में समा गई, लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला। अब मंदिर गंगा में समा गई। यदि कटान पर नहीं रोक ली तो पूरा गांव का ही अस्तित्व समाप्त हो सकता है। हाजी हलीम ने कहा कि कटान की समस्या को लेकर आज तक कोई सरकार किसानों के हित में काम नहीं किया। चुनाव के समय यह मुद्दा बनता है लेकिन बाद में खत्म हो जाता है।
03. ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया, सांसद को भेजा पत्रक
संवाद न्यूज एजेंसी
सचित्र-
पीडीडीयू नगर। कुंडा खुर्द गांव के मल्लाह बस्ती में डीह बाबा मंदिर केे गंगा कटान की भेंट चढ़ जाने के बाद नाराज ग्रामीणों ने गंगा तट पर खड़े होकर प्रदर्शन किया। बाद में गंगा प्रहरी दर्शन निशाद ने चंदौली सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय के सचिव से वार्ता की और कटान की समस्या से अवगत कराया। यही नहीं ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त पत्रक भी भेजा। ग्रामीणों ने पिछड़ा वर्ग कल्याण प्रकोष्ठ के सदस्य शिव शंकर पटेल से भी वार्ता हुई। चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गंगा कटान रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर अवधेश कुमार निषाद, जितेंद्र निषाद, अनिल साहनी, लक्ष्मण निषाद रामजी, सरोज कुमार,हरीनाथ, श्याम बहादुर, रामसेवक, कौशलेंद्र कुमार, उर्मिला देवी, लालमणी, सुनीता, सरबती, सुंदरी, प्रभावती, सूखा, सुदामा, विनता, आशा, मीना कुमारी, पार्वती देवी, चंद्रबली साहनी, फूलमती, जीता रहे।